अलीगढ़। लॉक डाउन के चलते सभी प्रकार की सामाजिक, आर्थिक व अन्य गतिविधियां बंद पड़ी हुई हैं और कई प्रकार की असुविधाएं हो रही हैं।लेकिन इन सबके बीच एक राहत भरी बात यह है जिस माहौल में हम सांस ले रहे हैं उस हवा की सेहत सुधर गई है। साथ ही आसमान का रंग भी और ज्यादा नीला और साफ हो गया है ।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के ज्योग्राफी डिपार्टमेंट के चेयरमैन प्रो. अतीक अहमद ने लॉक डाउन के एक दूसरे ही पहलू को उजागर किया है । उन्होंने अपने अध्ययन में पाया है कि सभी तरह की व्यवसायिक गतिविधि, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण, खुदाई आदि बंद होने से शहर की हवा की सेहत में बहुत सुधार हुआ है। इसके साथ ही बसें भी नहीं चल रही हैं । सड़कों पर ऑटोमोबाइल भी बंद है । इससे वातावरण में डस्ट पार्टिकल न के बराबर हैं और कार्बन मोनोऑक्साइड का उत्सर्जन भी सामान्य से बहुत अधिक नीचे आ गया है। इस तरह की हवा मनुष्यों के लिए बेहद लाभदायक है। इसके अलावा लॉक डाउन तो है ही, साथ-साथ रुक-रुक कर हुई बारिश ने भी डस्ट पार्टिकल और कार्बन पार्टिकल को आसमान से जमीन पर नीचे बैठाने का काम किया। प्रोफेसर अतीक कहते हैं सामान्य दिनों में अलीगढ़ के वातावरण में एसपीएम यानि, सस्पेंडेड पर्टिकुलेंट मैटर, 130 से 140 नैनोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक होता है । लेकिन इस वक्त यह एसपीएम 110 पर आ गया है। इसी तरह वातावरण में 48 से 58 नैनोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक रहने वाला सल्फर डाइ ऑक्साइड अब 35 तक आ गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हवा की सेहत में कितना सुधार हुआ है । प्रोफेसर अतीक ने बताया लॉक डाउन के बाद पर्यावरण में आए यह बदलाव दुनिया भर के भूगोलवेत्ताओं और पर्यावरण के लिए काम करने वालों को उत्साहित कर रहे हैं । बहुत संभव है कि भविष्य में वातावरण में कार्बन की मात्रा को कम करने के लिए कई प्रकार के फैसले लिए जाएं ।