फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   15 महीने बाद पर्यावरणविद सुबोध नंदन जेल से पैरोल पर रिहा

15 महीने बाद पर्यावरणविद सुबोध नंदन जेल से पैरोल पर रिहा

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 26 May 2021 12:23 PM IST
विज्ञापन
15 महीने बाद पर्यावरणविद सुबोध नंदन जेल से पैरोल पर रिहा
पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा का जेल से रिहा होने के बाद स्वागत करते हुए नागरिक चेतना समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा व अन्य - फोटो : Amar Ujala
अलीगढ़। 15 महीने जिला कारागार में रहने के बाद वरिष्ठ पर्यावरणविद सुबोध नंदन शर्मा को बुधवार को जेल से पैरोल पर रिहा कर दिया गया। उन्हें 40 साल पुराने एक वित्तीय मामले में फरवरी 2020 में जेल जाना पड़ा था।
विज्ञापन
जेल से बाहर आते ही सुबोध नंदन शर्मा ने चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही जेल प्रशासन का भी बहुत आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस महानिदेशक से रिहाई के संबंध में पैरोकारी करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के हरियाणा के प्रभारी विवेक बंसल का भी आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
बुधवार को रिहाई के वक्त उनका स्वागत करने के लिए नागरिक चेतना समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा, उड़ान सोसायटी के ज्ञानेंद्र मिश्रा, पर्यावरण सुरक्षा समिति हरीतिमा के भीकम सिंह आदि अन्य लोग पहुंचे।
विज्ञापन
विज्ञापन
जेल के ही अंदर हो गया पर्यावरणविद् का टीकाकरण अलीगढ़। 15 महीने जिला कारागार में बिताने के बाद बाहर आए सुबोध नंदन शर्मा ने बताया कि कारागार में ही उनको कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जेल प्रशासन ने उनको किसी बंदी की तरह नहीं बल्कि उनकी उम्र और अनुभव का लिहाज करते हुए बहुत ही शिष्ट और सभ्य तरीके से रखा।
जेल प्रशासन को दिया टिड्डी दल से बचाव का फार्मूला अलीगढ़। जेल में रहने के दौरान पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा कारागार परिसर में भी अपनी पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियां करते रहे। वह वहां वृक्षारोपण से लेकर गौरैया के लिए घोंसला बनाने तक का काम करते रहे। इसी दौरान जब जेल प्रशासन ने उनसे टिड्डी दल के हमले के संबंध में चर्चा की तो उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर जेल प्रशासन को बताया कि कारागार परिसर में जितनी अधिक गौरैया होंगी उतना ही परिसर टिड्डी दल के हमले से बचा रहेगा। क्योंकि गौरैया टिड्डी का भक्षण करती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed