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रेलवे अस्पताल में महिला की मौत पर हंगामा, मारपीट
अमर उजाला ब्यूरो, अागरा
Updated Sun, 13 Mar 2016 01:24 AM IST
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महिला की मौत
- फोटो : demo
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आगरा कैंट स्थित रेलवे अस्पताल में इलाज में लापरवाही के चलते शनिवार की सुबह रेलवे कर्मचारी की पत्नी सुधा शर्मा (42) की मौत हो गई। गुस्साए परिवारीजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
आगरा कैंट रेलवे कालोनी निवासी राजदीप शर्मा आगरा फोर्ट पर कार्यालय अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्नी सुधा हृदय रोग से पीड़ित थीं। सुबह करीब साढ़े चार बजे उन्हें रेलवे अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ देर उपचार के बाद उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिवारीजनों का अस्पताल के कर्मचारियों से विवाद हो गया। मामला मारपीट तक पहुंच गया। किसी तरह मामला शांत किया गया।
पति राजदीप शर्मा का आरोप है कि रेलवे अस्पताल के डाक्टर और कर्मचारियों की लापरवाही से उनकी पत्नी की जान चली गई। कई दफा कॉल करने के बाद चंद कदम की दूरी पर एंबुलेंस पहुंचने में 20 मिनट लगे। किसी तरह अस्पताल पहुंचे तो वहां 15 मिनट तक आक्सीजन सिलेंडर तक नहीं लाया गया। डाक्टर काफी देर से आए। अगर रेलवे अस्पताल की सेवाएं बेहतर होतीं तो शायद पत्नी की जान बचाई जा सकती थी। शर्मा के घर शोक जताने पहुंचे अन्य रेलवे कर्मचारियों ने भी अस्पताल की सेवाओं को लचर बताया।
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इस संबंध में रेलवे अस्पताल के अधीक्षक डा. जेपी उपाध्याय का कहना है कि मरीज को लगभग कोमा की स्थिति में लाया गया था, ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर ने जीवन के लक्षण नहीं होने के बाद भी कार्डिक मसाज, सांस देने समेत सभी प्रयास किए। पेशेंट की एंजियोप्लास्टी भी हो चुकी थी। एक सप्ताह पहले ही हेरिटेज अस्पताल से डिस्चार्ज होकर आई थीं। एंबुलेंस महज दस मिनट में पहुंच गई थी। बाद में वे खुद कर्मचारी के घर गए थे।
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आगरा कैंट रेलवे कालोनी निवासी राजदीप शर्मा आगरा फोर्ट पर कार्यालय अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्नी सुधा हृदय रोग से पीड़ित थीं। सुबह करीब साढ़े चार बजे उन्हें रेलवे अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ देर उपचार के बाद उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिवारीजनों का अस्पताल के कर्मचारियों से विवाद हो गया। मामला मारपीट तक पहुंच गया। किसी तरह मामला शांत किया गया।
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पति राजदीप शर्मा का आरोप है कि रेलवे अस्पताल के डाक्टर और कर्मचारियों की लापरवाही से उनकी पत्नी की जान चली गई। कई दफा कॉल करने के बाद चंद कदम की दूरी पर एंबुलेंस पहुंचने में 20 मिनट लगे। किसी तरह अस्पताल पहुंचे तो वहां 15 मिनट तक आक्सीजन सिलेंडर तक नहीं लाया गया। डाक्टर काफी देर से आए। अगर रेलवे अस्पताल की सेवाएं बेहतर होतीं तो शायद पत्नी की जान बचाई जा सकती थी। शर्मा के घर शोक जताने पहुंचे अन्य रेलवे कर्मचारियों ने भी अस्पताल की सेवाओं को लचर बताया।
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इस संबंध में रेलवे अस्पताल के अधीक्षक डा. जेपी उपाध्याय का कहना है कि मरीज को लगभग कोमा की स्थिति में लाया गया था, ड्यूटी पर मौजूद डाक्टर ने जीवन के लक्षण नहीं होने के बाद भी कार्डिक मसाज, सांस देने समेत सभी प्रयास किए। पेशेंट की एंजियोप्लास्टी भी हो चुकी थी। एक सप्ताह पहले ही हेरिटेज अस्पताल से डिस्चार्ज होकर आई थीं। एंबुलेंस महज दस मिनट में पहुंच गई थी। बाद में वे खुद कर्मचारी के घर गए थे।