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2700 सहायक अध्यापकों के नियुक्ति पत्र तलब
अमर उजाला ब्यूरो, अागरा
Updated Wed, 09 Mar 2016 01:49 AM IST
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डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी के फर्जी मार्कशीट प्रकरण में एसआईटी ने अब 2700 सहायक अध्यापकों को आरोपी बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इनके नाम पते पहले ही बेसिक शिक्षा विभाग की मदद से हासिल कर लिए गए हैं। अब इन सभी के नियुक्ति पत्र तलब किए गए हैं। इन्हें साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके बाद इन शिक्षकों के लिए नौकरी कर पाना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा। इन सभी की बीएड की डिग्री फर्जी बताई जा रही है।
यूनिवर्सिटी से संबद्ध 83 कॉलेजों में 2004 से 2009 के बीच बीएड की 25000 फर्जी मार्कशीट जारी की गई थीं। इनमें से 4500 का इस्तेमाल सरकारी नौकरी पाने में किया गया। सबसे ज्यादा सहायक अध्यापक बने। इनकी संख्या 2700 है। यूनिवर्सिटी में इन डिग्रियों का रिकार्ड एसआईटी को नहीं मिला था। इसके बाद एसआईटी ने अपने लखनऊ स्थित थाना में यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी बनाया। अब सहायक अध्यापकों का नंबर आया है। ये पूरे प्रदेश में तैनात हैं।
केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि चूकिं इस फर्जीवाड़े के लाभार्थी सहायक अध्यापक ही हैं, इसलिए उन्हें आरोपी बनाया जाना जरूरी है। एसआईटी ने फर्जी पाई गई डिग्रियों के रोल नंबर बेसिक शिक्षा विभाग को दिए थे। इनकी मदद से पता चल गया कि इन रोल नंबर की डिग्रियों से 2700 सहायक अध्यापक बने हैं।
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अब इनकी नियुक्ति के पत्र सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों से तलब किए गए हैं। इनसे एक तो सहायक अध्यापकों के पते की जानकारी मिलेगी। दूसरा उनकी नियुक्ति का साक्ष्य मिलेगा। इसके लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं। लगभग 300 शिक्षकों से एसआईटी पूछताछ भी कर चुकी है। बता दें, आगरा जनपद में 10 शिक्षकों की डिग्री फर्जी मिल चुकी है। हाल ही में 11 और मिले हैं जिनकी डिग्री फर्जी होने का शक है।
फरार लिपिकों के घर की कुर्की की तैयारी
आगरा। यूनिवर्सिटी के छह लिपिक इस प्रकरण में फरार चल रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए आगरा पुलिस को इनके गैर जमानती वारंट दिए गए थे लेकिन पुलिस एक को भी नहीं पकड़ पाई। एसआईटी ने अब लखनऊ स्थित सीबीआई कोर्ट में आरोपियों के घर के कुर्की वारंट जारी कराने के लिए अर्जी दी है।
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यूनिवर्सिटी से संबद्ध 83 कॉलेजों में 2004 से 2009 के बीच बीएड की 25000 फर्जी मार्कशीट जारी की गई थीं। इनमें से 4500 का इस्तेमाल सरकारी नौकरी पाने में किया गया। सबसे ज्यादा सहायक अध्यापक बने। इनकी संख्या 2700 है। यूनिवर्सिटी में इन डिग्रियों का रिकार्ड एसआईटी को नहीं मिला था। इसके बाद एसआईटी ने अपने लखनऊ स्थित थाना में यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी बनाया। अब सहायक अध्यापकों का नंबर आया है। ये पूरे प्रदेश में तैनात हैं।
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केस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि चूकिं इस फर्जीवाड़े के लाभार्थी सहायक अध्यापक ही हैं, इसलिए उन्हें आरोपी बनाया जाना जरूरी है। एसआईटी ने फर्जी पाई गई डिग्रियों के रोल नंबर बेसिक शिक्षा विभाग को दिए थे। इनकी मदद से पता चल गया कि इन रोल नंबर की डिग्रियों से 2700 सहायक अध्यापक बने हैं।
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अब इनकी नियुक्ति के पत्र सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों से तलब किए गए हैं। इनसे एक तो सहायक अध्यापकों के पते की जानकारी मिलेगी। दूसरा उनकी नियुक्ति का साक्ष्य मिलेगा। इसके लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं। लगभग 300 शिक्षकों से एसआईटी पूछताछ भी कर चुकी है। बता दें, आगरा जनपद में 10 शिक्षकों की डिग्री फर्जी मिल चुकी है। हाल ही में 11 और मिले हैं जिनकी डिग्री फर्जी होने का शक है।
फरार लिपिकों के घर की कुर्की की तैयारी
आगरा। यूनिवर्सिटी के छह लिपिक इस प्रकरण में फरार चल रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए आगरा पुलिस को इनके गैर जमानती वारंट दिए गए थे लेकिन पुलिस एक को भी नहीं पकड़ पाई। एसआईटी ने अब लखनऊ स्थित सीबीआई कोर्ट में आरोपियों के घर के कुर्की वारंट जारी कराने के लिए अर्जी दी है।