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संकट में अन्नदाता, कैसे होगी गेहूं व जौ की थ्रेशिंग

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 28 Mar 2020 04:27 PM IST
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Annadata in crisis, how will threshing of wheat and barley
कासगंज में तैयार गेहूं की फसल। - फोटो : AMAR UJALA
संवाद न्यूज़ एजेंसी कासगंज। कोरोनावायरस के खौफ से किसानों का दर्द दोगुना हो गया है। जहां एक ओर किसान रोजी रोटी को लेकर चिंतित हैं। वही वर्ष भर की सबसे अहम फसल पर भी संकट मंडरा रहा है। किसान चिंतित हैं कि आखिर गेहूं और जौ की फसल की थ्रेशिंग कैसे होगी। क्योंकि लॉक डाउन के चलते सबको घर में रहने की सलाह दी जा रही है। ट्रैक्टर थ्रेशर भी गांव के गलियारों में नहीं दिख रहे। गेहूं और जौ की फसल पारंपरिक फसल है। यह फसल सबसे अहम फसल होती है, क्योंकि वर्षभर रोटी के लिए गेहूं पर ही आश्रित रहना होता है। ऐसे में इस फसल को लेकर किसान सबसे अधिक संवेदनशील रहते हैं। पिछले दिनों प्रकृति की मार पड़ी। कई बार बारिश हुई। उससे फसलें बर्बादी के कगार पर पहुंच गईं। खेतों में कुछ हद तक फसलें बची भी हैं उस पर अब कोरोना वायरस के खौफ की मार पड़ने लगी है, क्योंकि तमाम गांव ऐसे हैं जहां ट्रैक्टर तो हैं लेकिन थ्रेशर नहीं है। दूसरे गांव के ट्रैक्टर और थ्रेशर स्वामियों के भरोसे किसान रहते हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि ट्रैक्टर, थ्रेशर कैसे मिलेंगे। क्योंकि ट्रैक्टर स्वामी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि सड़कों पर गए तो कार्रवाई हो जाएगी और डीजल के लिए सड़कों पर जाना जरूरी है। असमंजस की स्थिति किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई है। इसका अभी तक कोई भी रास्ता साफ नहीं हुआ है कि आखिर किसानों की फसलें कैसे कटेगी और उनकी थ्रेशिंग कैसे होगी। किसान हरवीर सिंह, प्रेमपाल सिंह का कहना है कि खेतों में गेहूं और जौ की फसलें तैयार हो चुकी हैं। जौ पूरी तरह चुका है, जिसकी कटाई अभी नहीं की गई तो फसल खेतों में ही खराब हो जाएगी। बाली टूटकर जमीन पर गिर जाएगी। आंकड़े -96 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में है गेंहू की फसल -15 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में है जौ की फसल
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