कौन हैं दीप्ति जीवांजी?: एशियन पैरा गेम्स में जीता गोल्ड; कभी तानों का सामना किया, अब विश्व में लहरा रहीं परचम
दीप्ति जीवांजी ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिला 400 मीटर टी20 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। तेलंगाना के एक छोटे से गांव में आर्थिक तंगी और सामाजिक भेदभाव का सामना करने वाली दीप्ति 2024 में विश्व चैंपियन बनीं और पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक जीता। जानिए उनकी प्रेरणादायक सफलता की कहानी।
विस्तार
दीप्ति जीवांजी ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में 400 मीटर टी20 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। तेलंगाना के एक छोटे से गांव में आर्थिक तंगी और सामाजिक तानों के बीच पली-बढ़ीं दीप्ति आज विश्व चैंपियन और पैरालंपिक पदक विजेता हैं। जानिए उनकी संघर्ष से सफलता तक की पूरी कहानी।
भारत की पैरा एथलीट दीप्ति जीवांजी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रतिभा को किसी परिस्थिति में बांधा नहीं जा सकता। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में उन्होंने महिला 400 मीटर टी20 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। दीप्ति ने 56.36 सेकंड का समय निकालकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। वह अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी जापान की नीना कन्नो से दो सेकंड से भी अधिक आगे रहीं। कन्नो ने 58.92 सेकंड के समय के साथ रजत पदक जीता, जबकि जापान की अकाने काटो ने 1 मिनट 0.26 सेकंड में दौड़ पूरी कर कांस्य पदक अपने नाम किया।
दीप्ति का यह स्वर्ण एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत का पांचवां स्वर्ण पदक रहा। मंगलवार को दूसरे दिन भारत को पहला स्वर्ण भी इसी मुकाबले से मिला, लेकिन दीप्ति की यह कामयाबी केवल एक दौड़ या एक पदक की कहानी नहीं है। इसके पीछे संघर्ष, परिवार की मुश्किलें, सामाजिक भेदभाव और एक कोच के भरोसे से बदली जिंदगी की कहानी छिपी है।
दीप्ति का जन्म तेलंगाना के कलेड़ा गांव में एक बेहद साधारण परिवार में हुआ। उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते थे। आर्थिक तंगी के कारण परिवार को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। दीप्ति को बौद्धिक दिव्यांगता थी, जिसका असर उनकी संवाद क्षमता और सीखने की प्रक्रिया पर भी पड़ा।
बचपन में उन्हें अपनी इस स्थिति के कारण सामाजिक तानों और भेदभाव का सामना करना पड़ा। गांव में कुछ लोग उनके रूप-रंग और व्यवहार को लेकर उनका मजाक उड़ाते थे। हालात ऐसे थे कि उनके माता-पिता को भी उन्हें अनाथालय भेजने जैसी सलाह दी गई। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि गुजारा करने के लिए उन्हें अपनी खेती की जमीन तक बेचनी पड़ी।
हालांकि, इन मुश्किलों के बीच दीप्ति की सबसे बड़ी ताकत उनकी रफ्तार बनी। महज 15 साल की उम्र में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के कोच एन. रमेश की नजर तेलंगाना में आयोजित एक राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के दौरान उन पर पड़ी। उन्होंने दीप्ति की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण का मौका मिला। यहीं से उनकी जिंदगी ने नई दिशा पकड़नी शुरू की।
कोच एन. रमेश के मार्गदर्शन में दीप्ति ने अपनी गति को निखारा और टी20 वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। वर्ष 2023 के एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद 2024 में जापान के कोबे में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने महिला 400 मीटर टी20 स्पर्धा में 55.07 सेकंड का समय निकालकर विश्व रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस प्रदर्शन ने दीप्ति को दुनिया की शीर्ष पैरा धाविकाओं में शामिल कर दिया। जिस खिलाड़ी को कभी समाज के एक हिस्से के तानों का सामना करना पड़ा था, वही अब अपने प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर रही थी।
दीप्ति ने 2024 के पेरिस पैरालंपिक में भी इतिहास रचा। उन्होंने महिला 400 मीटर टी20 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। वह बौद्धिक दिव्यांगता वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं, जिन्होंने पैरालंपिक में पदक हासिल किया। यह उपलब्धि उनके करियर के सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक रही। विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण और पैरालंपिक का कांस्य जीतने के बाद दीप्ति ने दिखा दिया कि उनकी सफलता कोई संयोग नहीं है। लगातार बड़े मंचों पर शानदार प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय पैरा खेलों की प्रमुख खिलाड़ियों में स्थापित किया।
अब एशियन पैरा गेम्स 2026 में दीप्ति ने एक बार फिर स्वर्ण पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में नया अध्याय जोड़ दिया है। महिला 400 मीटर टी20 के फाइनल में उन्होंने 56.36 सेकंड का समय निकाला। इससे पहले हीट में 57.57 सेकंड के समय के साथ उन्होंने एशियन पैरा गेम्स का रिकॉर्ड बनाया था। फाइनल में उन्होंने अपने प्रदर्शन को और बेहतर किया और नया गेम्स रिकॉर्ड कायम किया।
दीप्ति की कहानी बताती है कि किसी खिलाड़ी की पहचान उसकी शुरुआती परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके हौसले और मेहनत से बनती है। गांव की पगडंडियों से अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स ट्रैक तक पहुंचने वाली दीप्ति आज उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हैं, जो तमाम चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। उनकी दौड़ में सिर्फ पदक जीतने की होड़ नहीं, बल्कि उन तमाम धारणाओं को पीछे छोड़ने का संदेश भी है, जो किसी की क्षमता को उसकी परिस्थितियों या दिव्यांगता के आधार पर आंकती हैं।
दीप्ति जीवांजी की प्रमुख उपलब्धियां और सम्मान
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वर्ष |
प्रतियोगिता / सम्मान |
स्पर्धा |
पदक |
प्रदर्शन / खास बात |
|---|---|---|---|---|
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2026 |
एशियन पैरा गेम्स, आइची-नागोया (जापान) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
स्वर्ण पदक |
56.36 सेकंड के समय के साथ नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। |
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2025 |
विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप, नई दिल्ली (भारत) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
रजत पदक |
घरेलू मैदान पर शानदार प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। |
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2024 |
पेरिस पैरालंपिक, पेरिस (फ्रांस) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
कांस्य पदक |
55.82 सेकंड का समय निकाला। पैरालंपिक पदक जीतने वाली बौद्धिक दिव्यांगता वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। |
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2024 |
विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप, कोबे (जापान) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
स्वर्ण पदक |
55.06 सेकंड के समय के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाया। |
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2024 |
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार, भारत |
खेल उपलब्धियां |
अर्जुन पुरस्कार |
खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। |
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2023 |
एशियन पैरा गेम्स, हांगझोऊ (चीन) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
स्वर्ण पदक |
56.69 सेकंड के समय के साथ गेम्स रिकॉर्ड बनाया। |
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2023 |
वर्चुअस ग्लोबल गेम्स, विची (फ्रांस) |
महिला 400 मीटर (टी20) |
दो रजत पदक |
बौद्धिक दिव्यांगता वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की। |