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एशियन पैरा गेम्स: डिस्कस थ्रो में गोल्ड जीतने के बाद प्रणव सूरमा ने क्यों याद किए विराट कोहली? कही बड़ी बात
Tue, 20 Oct 2026 09:01 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Tue, 20 Oct 2026 09:01 PM IST
सार
एशियन पैरा गेम्स में भारत के प्रणव सूरमा ने डिस्कस थ्रो की एफ51/52/53 संयुक्त स्पर्धा में 11.66 मीटर का थ्रो कर गोल्ड मेडल जीता और नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया। जीत के बाद उन्होंने क्रिकेटर विराट कोहली का जिक्र करते हुए बल्लेबाजों के कभी-कभी गेंदबाजी करने का उदाहरण भी दिया।
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विराट कोहली-प्रणव सूरमा
- फोटो : ANI-IANS
विस्तार
भारत के पैरा एथलीट प्रणव सूरमा ने एशियन पैरा गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीत लिया। मंगलवार को आयोजित स्पर्धा में उन्होंने 11.66 मीटर की दूरी तक चक्का फेंककर नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया। इस स्पर्धा में भारत के राम रतन सिंह ने भी सिल्वर मेडल अपने नाम किया। गोल्ड जीतने के बाद सूरमा ने अपनी उपलब्धि के बारे में बात करते हुए भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली का भी जिक्र किया।
पहली बड़ी प्रतियोगिता में ही बनाया एशियाई रिकॉर्ड
32 वर्षीय प्रणव सूरमा ने संयुक्त एफ51/52/53 वर्ग की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में अपने चौथे प्रयास में 11.66 मीटर की दूरी हासिल की। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने गोल्ड मेडल जीतने के अलावा नया एशियाई रिकॉर्ड भी कायम किया। भारत के ही 31 वर्षीय राम रतन सिंह ने अपने दूसरे प्रयास में 10.35 मीटर की दूरी तक चक्का फेंककर सिल्वर मेडल जीता। इस तरह भारत ने स्पर्धा में गोल्ड और सिल्वर दोनों पदक अपने नाम किए।
गोल्ड जीतने के बाद विराट कोहली का किया जिक्र
प्रणव सूरमा ने अपनी जीत के बाद क्रिकेट का उदाहरण देते हुए विराट कोहली का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में कई बार बल्लेबाज भी गेंदबाजी करते हैं और कभी-कभी विकेट हासिल कर लेते हैं। सूरमा ने कहा, 'जब हम क्रिकेट खेलते हैं, तो कभी-कभी कोई बल्लेबाज भी गेंदबाजी करता है। विराट कोहली बहुत अच्छी बल्लेबाजी करते हैं, लेकिन लंबे समय बाद जब वह एक ओवर डालते हैं, तो उसमें विकेट भी ले लेते हैं।'
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पहली बड़ी प्रतियोगिता में ही बनाया एशियाई रिकॉर्ड
32 वर्षीय प्रणव सूरमा ने संयुक्त एफ51/52/53 वर्ग की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में अपने चौथे प्रयास में 11.66 मीटर की दूरी हासिल की। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने गोल्ड मेडल जीतने के अलावा नया एशियाई रिकॉर्ड भी कायम किया। भारत के ही 31 वर्षीय राम रतन सिंह ने अपने दूसरे प्रयास में 10.35 मीटर की दूरी तक चक्का फेंककर सिल्वर मेडल जीता। इस तरह भारत ने स्पर्धा में गोल्ड और सिल्वर दोनों पदक अपने नाम किए।
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गोल्ड जीतने के बाद विराट कोहली का किया जिक्र
प्रणव सूरमा ने अपनी जीत के बाद क्रिकेट का उदाहरण देते हुए विराट कोहली का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में कई बार बल्लेबाज भी गेंदबाजी करते हैं और कभी-कभी विकेट हासिल कर लेते हैं। सूरमा ने कहा, 'जब हम क्रिकेट खेलते हैं, तो कभी-कभी कोई बल्लेबाज भी गेंदबाजी करता है। विराट कोहली बहुत अच्छी बल्लेबाजी करते हैं, लेकिन लंबे समय बाद जब वह एक ओवर डालते हैं, तो उसमें विकेट भी ले लेते हैं।'
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क्लब थ्रो है प्रणव सूरमा का पसंदीदा इवेंट
प्रणव सूरमा इससे पहले चीन में आयोजित पिछले एशियन पैरा गेम्स में क्लब थ्रो की एफ51 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। क्लब थ्रो उनका पसंदीदा इवेंट है, जबकि डिस्कस थ्रो में वह इस बार हिस्सा ले रहे हैं। सूरमा ने कहा कि डिस्कस थ्रो में इतने बड़े मंच पर पहली बार प्रतिस्पर्धा करते हुए व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना और एशियाई रिकॉर्ड तोड़ना उनके लिए बेहद खुशी की बात है। इस बार वह क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो दोनों स्पर्धाओं में भाग ले रहे हैं।
क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो की तकनीक अलग
सूरमा के मुताबिक, क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो तकनीकी रूप से काफी अलग स्पर्धाएं हैं। क्लब थ्रो में क्लब पर गोंद लगाकर उसे उंगलियों से पकड़ना होता है, जबकि डिस्कस थ्रो में हाथ पर गोंद लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि गोंद लगाने, उपकरण को सही तरीके से पकड़ने और उचित तकनीक के साथ उसे छोड़ने की प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण होती है। इसी वजह से एक स्पर्धा से दूसरी स्पर्धा में खुद को ढालने के लिए विशेष अभ्यास की जरूरत होती है। सूरमा ने कहा कि डिस्कस थ्रो उनके लिए नया इवेंट है और इसके लिए उन्होंने पिछले एक साल से लगातार अभ्यास किया है।
प्रणव सूरमा इससे पहले चीन में आयोजित पिछले एशियन पैरा गेम्स में क्लब थ्रो की एफ51 स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। क्लब थ्रो उनका पसंदीदा इवेंट है, जबकि डिस्कस थ्रो में वह इस बार हिस्सा ले रहे हैं। सूरमा ने कहा कि डिस्कस थ्रो में इतने बड़े मंच पर पहली बार प्रतिस्पर्धा करते हुए व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना और एशियाई रिकॉर्ड तोड़ना उनके लिए बेहद खुशी की बात है। इस बार वह क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो दोनों स्पर्धाओं में भाग ले रहे हैं।
क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो की तकनीक अलग
सूरमा के मुताबिक, क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो तकनीकी रूप से काफी अलग स्पर्धाएं हैं। क्लब थ्रो में क्लब पर गोंद लगाकर उसे उंगलियों से पकड़ना होता है, जबकि डिस्कस थ्रो में हाथ पर गोंद लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि गोंद लगाने, उपकरण को सही तरीके से पकड़ने और उचित तकनीक के साथ उसे छोड़ने की प्रक्रिया काफी चुनौतीपूर्ण होती है। इसी वजह से एक स्पर्धा से दूसरी स्पर्धा में खुद को ढालने के लिए विशेष अभ्यास की जरूरत होती है। सूरमा ने कहा कि डिस्कस थ्रो उनके लिए नया इवेंट है और इसके लिए उन्होंने पिछले एक साल से लगातार अभ्यास किया है।
ईरानी खिलाड़ी ने फेंका ज्यादा दूर, फिर भी मिला कांस्य
स्पर्धा में ईरान के अलीरेजा हेमामी ने अपने चौथे प्रयास में 20.20 मीटर की दूरी हासिल की और कांस्य पदक जीता। हालांकि, उनका थ्रो प्रणव सूरमा और राम रतन सिंह के मुकाबले अधिक दूरी का था, लेकिन वह शीर्ष दो स्थानों पर नहीं पहुंच सके। इसका कारण संयुक्त वर्ग में इस्तेमाल होने वाली रेजा पॉइंट प्रणाली है। इस प्रणाली में अलग-अलग दिव्यांगता वर्गों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को उनकी श्रेणी के आधार पर मानकीकृत अंकों में बदला जाता है। इसके बाद इन अंकों के आधार पर खिलाड़ियों की रैंकिंग तय होती है। इसलिए संयुक्त स्पर्धा में केवल थ्रो की दूरी के आधार पर अंतिम स्थान निर्धारित नहीं होता।
क्या है एफ51 वर्ग?
एफ51 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं, जिनके धड़, पैरों और हाथों की गतिविधियों में गंभीर सीमाएं होती हैं। इन खिलाड़ियों की बांहों की गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। पैरा एथलेटिक्स में एफ51 से एफ57 तक के वर्गों में ऐसे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं, जो बैठकर थ्रो स्पर्धाओं में हिस्सा लेते हैं। इन वर्गों में निचले शरीर से संबंधित दिव्यांगता, मांसपेशियों की ताकत में कमी, अंगों की कमी और जोड़ों की गति सीमित होने जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं।
स्पर्धा में ईरान के अलीरेजा हेमामी ने अपने चौथे प्रयास में 20.20 मीटर की दूरी हासिल की और कांस्य पदक जीता। हालांकि, उनका थ्रो प्रणव सूरमा और राम रतन सिंह के मुकाबले अधिक दूरी का था, लेकिन वह शीर्ष दो स्थानों पर नहीं पहुंच सके। इसका कारण संयुक्त वर्ग में इस्तेमाल होने वाली रेजा पॉइंट प्रणाली है। इस प्रणाली में अलग-अलग दिव्यांगता वर्गों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को उनकी श्रेणी के आधार पर मानकीकृत अंकों में बदला जाता है। इसके बाद इन अंकों के आधार पर खिलाड़ियों की रैंकिंग तय होती है। इसलिए संयुक्त स्पर्धा में केवल थ्रो की दूरी के आधार पर अंतिम स्थान निर्धारित नहीं होता।
क्या है एफ51 वर्ग?
एफ51 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं, जिनके धड़, पैरों और हाथों की गतिविधियों में गंभीर सीमाएं होती हैं। इन खिलाड़ियों की बांहों की गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। पैरा एथलेटिक्स में एफ51 से एफ57 तक के वर्गों में ऐसे खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं, जो बैठकर थ्रो स्पर्धाओं में हिस्सा लेते हैं। इन वर्गों में निचले शरीर से संबंधित दिव्यांगता, मांसपेशियों की ताकत में कमी, अंगों की कमी और जोड़ों की गति सीमित होने जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं।