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एशियन गेम्स: वित्या रामराज ने किसे समर्पित किया अपना रजत पदक? बोलीं- मेडल का रंग बदलने का प्रयास किया

Fri, 25 Sep 2026 12:59 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Fri, 25 Sep 2026 12:59 PM IST
सार

भारत को चार गुणा 400 मिश्रित रिले टीम इवेंट में रजत पदक दिलाने वाली वित्या रामराज अपने प्रदर्शन से संतुष्ट हैं। वित्या ने एशियन गेम्स में पदक जीतने के बाद बताया कि उन्होंने ये पदक अपनी जुड़वां बहन को समर्पित किया है।

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Vithya Ramraj dedicate her Asian Games silver medal to her Twin sister know reaction after podium finish
चार गुणा 400 मिक्स्ड रिले टीम - फोटो : IANS

विस्तार

वित्या रामराज ने एशियन गेम्स 2026 में 4x400 मीटर मिक्स्ड रिले में सिल्वर मेडल जीता, जिसे उन्होंने अपनी जुड़वां बहन नित्या को समर्पित किया है। वित्या रामराज को इस बार अपनी बहन की कमी खली और पिछले गेम्स में तीन मेडल जीतने के बाद इस बार वे अपने मेडल का रंग बदलने के लिए दृढ़ संकल्प थीं। मचेत्तिरा पूवम्मा, विशाल थेन्नारासु, वित्या और थेक्किनालिल मनु की भारतीय टीम ने 3:14.46 का समय लिया। बहरीन ने गेम्स-रिकॉर्ड 3:12.87 के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। वियतनाम 3:14.54 के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
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पिछले एशियाड में जीते थे तीन पदक
वित्या ने पिछले एशियन गेम्स में तीन मेडल जीते थे, उन्होंने कहा कि वे अपने पिछले मेडल टैली में सुधार करने के मकसद से इस प्रतियोगिता में उतरी थीं। वित्या ने कहा, 'पिछले एशियन गेम्स में मैंने तीन मेडल जीते थे, इसलिए इस बार मैंने अपने मेडल का रंग बदलने की कोशिश की, बस यही बात थी।' यह मेडल वित्या के लिए व्यक्तिगत रूप से भी खास था। उन्होंने इसे अपनी जुड़वां बहन नित्या रामराज को समर्पित किया, जो खुद भी एक एथलीट हैं। नित्या ने पिछले गेम्स में हिस्सा लिया था लेकिन 2026 के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा, क्योंकि पिछले एशियन गेम्स में मेरी जुड़वां बहन मेरे साथ थी, इसलिए इस बार मुझे उनकी बहुत याद आ रही थी, इसलिए मैंने अपना मेडल उन्हें समर्पित किया।
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कोच की भूमिका को बताया अहम 
वित्या ने रेस के दौरान ध्यान केंद्रित रखने में अपने कोच की भूमिका को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि आसपास की प्रतियोगिता से ध्यान भटकने के बजाय उन्हें अपने कोच के निर्देशों से आत्मविश्वास मिला। वित्या ने कहा, मैं भनोट सर का शुक्रिया अदा करती हूं, क्योंकि पिछले एशियन गेम्स में मेरे कोच मेरे साथ नहीं थे। इस बार मेरे कोच मेरे साथ हैं। वे मुझे देख रहे थे; वे मुझसे कह रहे थे, 'तुम यह कर सकती हो'। वह वहां रणनीति समझा रहे थे। मैं बस अपने कोच का चेहरा देख रही थी; मुझे कोई प्रतिद्वंद्वी या कुछ और नहीं दिख रहा था। मैंने बस अपने कोच को देखा, फिर मुझे बैटन मिला और मैंने रेस दौड़ी। मैंने फिनिश लाइन तक पूरी जान लगा दी, बस यही किया।

रेस के दौरान गिरने और क्या इससे उन पर कोई असर पड़ा, इस बारे में पूछे जाने पर वित्या ने कहा कि उन्होंने बस अपने कोच की सलाह मानी और अपना लेग पूरा करने पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा, मेरे कोच ने कहा कि बस अपना लेग दौड़ो, तुम्हें बैटन मिलेगा। बस रेस दौड़ो और कुछ नहीं। इसलिए मैंने बस यही सोचा कि आगे बढ़ना है, फिनिश लाइन तक पहुंचना है। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया।
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चार गुणा 400 रिले में लगातार तीसरा पदक जीता
भारत के इस रजत पदक ने एशियन गेम्स में मिक्स्ड 4x400 मीट रिले में देश के शानदार रिकॉर्ड को और बेहतर बनाया है। जकार्ता 2018 में गोल्ड और हांग्झू 2023 में सिल्वर के बाद, देश ने लगातार तीन बार इस इवेंट में मेडल जीता है। भारतीय टीम ने वियतनाम को सिर्फ 0.08 सेकेंड से पीछे छोड़कर सिल्वर मेडल जीता, जिसमें मनु ने रेस के शुरुआती चरणों में अहम भूमिका निभाई।
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