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Ravi Dahiya: ओलंपिक पदक विजेता रवि दहिया और शरद ने खटखटाया कैट का दरवाजा, सरकारी नौकरी को लेकर की ये मांग
Mon, 25 May 2026 06:11 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Mon, 25 May 2026 06:11 PM IST
सार
भारत के अनुभवी पहलवान रवि दहिया और पैरा एथलीट शरद कुमार ने दिल्ली सरकार में अपनी सेवाओं का नियमितीकरण की मांग की है। इस मामले को लेकर इन दोनों ने केंद्रीय प्रशासनिक पंचाट (कैट) का दरवाजा खटखटाया है।
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रवि कुमार दहिया
- फोटो : X
विस्तार
टोक्यो ओलंपिक के रजत पदक विजेता पहलवान रवि कुमार दहिया और ऊंची कूद में पैरालंपियन शरद कुमार ने केंद्रीय प्रशासनिक पंचाट (कैट) से संपर्क किया है। इन्होंने दिल्ली सरकार में सहायक शिक्षा निदेशक (खेल) के तौर पर अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि वर्षों से नियमित प्रशासनिक काम करने के बावजूद उन्हें बार-बार अस्थायी विस्तार दिया जा रहा है।
अलग-अलग लेकिन एक जैसी भाषा वाली याचिकाओं में दोनों खिलाड़ियों ने तर्क दिया कि उन्होंने अपनी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की पहचान के तौर पर ग्रुप ए पदों की पेशकश मिलने के बाद और अंततः अपनी नौकरी पक्की होने की उम्मीद में सुरक्षित सरकारी नौकरियां छोड़कर दिल्ली सरकार से जुड़ गए। टोक्यो पैरालंपिक के कांस्य और पेरिस पैरालंपिक के रजत पदक विजेता शरद ने बताया कि उन्होंने 2022 में दिल्ली सरकार में शामिल होने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में अपनी स्थायी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था जहां वह एथलेटिक्स (पैरा) कोच के तौर पर काम कर रहे थे।
याचिका में क्या दिया तर्क?
याचिकाओं में यह तर्क दिया गया कि हालांकि नियुक्तियों को शुरू में छह महीने के लिए या नियमित नियुक्ति होने तक तदर्थ बताया गया था, लेकिन ज्ञापन में दो साल की परिवीक्षा अवधि का प्रावधान भी शामिल था जिससे यह वैध उम्मीद जगी थी कि खिलाड़ियों की सेवाएं अंततः नियमित कर दी जाएंगी। दोनों खिलाड़ियों ने कहा कि वे खेल विभाग में लगातार सरकारी काम करते आ रहे हैं जिसमें चयन ट्रायल की देखरेख, स्टेडियम और खेल केंद्र का निरीक्षण, कोच का मूल्यांकन और खेलो इंडिया कार्यक्रम से जुड़े काम शामिल हैं। इन याचिकाओं में दिल्ली के उपराज्यपाल के 2023 के एक निर्देश का भी जिक्र किया गया है जिसमें कहा गया था कि तदर्थ आधार पर नियुक्त पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से सलाह लेकर जल्द से जल्द स्थाई किया जाना चाहिए।
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अलग-अलग लेकिन एक जैसी भाषा वाली याचिकाओं में दोनों खिलाड़ियों ने तर्क दिया कि उन्होंने अपनी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों की पहचान के तौर पर ग्रुप ए पदों की पेशकश मिलने के बाद और अंततः अपनी नौकरी पक्की होने की उम्मीद में सुरक्षित सरकारी नौकरियां छोड़कर दिल्ली सरकार से जुड़ गए। टोक्यो पैरालंपिक के कांस्य और पेरिस पैरालंपिक के रजत पदक विजेता शरद ने बताया कि उन्होंने 2022 में दिल्ली सरकार में शामिल होने के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में अपनी स्थायी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था जहां वह एथलेटिक्स (पैरा) कोच के तौर पर काम कर रहे थे।
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याचिका में क्या दिया तर्क?
याचिकाओं में यह तर्क दिया गया कि हालांकि नियुक्तियों को शुरू में छह महीने के लिए या नियमित नियुक्ति होने तक तदर्थ बताया गया था, लेकिन ज्ञापन में दो साल की परिवीक्षा अवधि का प्रावधान भी शामिल था जिससे यह वैध उम्मीद जगी थी कि खिलाड़ियों की सेवाएं अंततः नियमित कर दी जाएंगी। दोनों खिलाड़ियों ने कहा कि वे खेल विभाग में लगातार सरकारी काम करते आ रहे हैं जिसमें चयन ट्रायल की देखरेख, स्टेडियम और खेल केंद्र का निरीक्षण, कोच का मूल्यांकन और खेलो इंडिया कार्यक्रम से जुड़े काम शामिल हैं। इन याचिकाओं में दिल्ली के उपराज्यपाल के 2023 के एक निर्देश का भी जिक्र किया गया है जिसमें कहा गया था कि तदर्थ आधार पर नियुक्त पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से सलाह लेकर जल्द से जल्द स्थाई किया जाना चाहिए।
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