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विंबलडन में दोहरे खिताब की ओर भारत, सानिया और पेस फाइनल में

Sat, 11 Jul 2015 08:17 PM IST
Updated Sat, 11 Jul 2015 08:17 PM IST
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Sania-Hingis in Wimbledon final

भारत की सानिया मिर्जा ने महिला डबल्स में अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने की उम्मीद जगा दी है। शुक्रवार को भारतीय महिला खिलाड़ी स्विट्जरलैंड की मार्टिना हिंगिस के साथ मिलकर विंबलडन टेनिस के महिला युगल फाइनल में पहुंच गई हैं।

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जबकि मिक्सड डबल्स में सदाबहार लिएंडर पेस भी इसी स्विस जोड़ीदार हिंगिस के साथ खिताब की दहलीज पर पहुंच गए। लिएंडर पेस अपने 16वें ग्रैंड स्लैम युगल खिताब से बस एक जीत दूर हैं। पेस पुरुष युगल में आठ और मिक्सड डबल्स में सात ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुके हैं।
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स्विट्जरलैंड की मार्टिना हिंगिस ने पहले सानिया मिर्जा के साथ मिलकर अमेरिका की रेगुएल कोप्स जोन्स और एबिगेल स्पीयर्स की जोड़ी को सेमीफाइनल में सीधे सेटों में 6-1, 6-2 से हराया।
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उसके बाद लिएंडर पेस के साथ मिलकर मिक्सड डबल्स सेमीफाइनल में अमेरिका के माइक ब्रायन और बेथानी माथेक सेंडस की टॉप सीड जोड़ी को आसानी से 6-3, 6-4 से पराजित किया।

भारत के पास पहला महिला डबल्स ग्रैंड स्लैम जीतने का मौका

Sania-Hingis in Wimbledon final

इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन जीत चुके पेस-हिंगिस ने छह में से पांच ब्रेक प्वाइंट बचाए और अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ तीन ब्रेकप्वाइंट अर्जित किए। मिक्सड डबल्स सेमीफाइनल एक घंटा 12 मिनट चला।

इससे पहले सानिया और हिंगिस ने महिला युगल सेमीफाइनल में महज 56 मिनट में जीत दर्ज की। दोनों सेट में दो-दो ब्रेकप्वाइंट हासिल किए और तीन ब्रेकप्वाइंट बचाए। जबकि प्रतिद्वंद्वी अमेरिकी जोड़ी को सर्विस में काफी दिक्कतें आई। इस जोड़ी ने छह डबल फाल्ट किए।

विंबलडन फाइनल तक के सफर में सानिया और हिंगिस की भारत और स्विस जोड़ी ने पांचों मुकाबले सीधे सेटों में जीते हैं।  फाइनल में उनका मुकाबला इलेना वेसनीना और कैटरीना मकारोवा की रूसी जोड़ी से होगा जिन्होंने हंगरी की टाइमा बाबोस व फ्रांस की क्रिस्टीना मलेदनोविक को 6-3, 4-6, 6-4 से पराजित किया।

सानिया के पास महिला युगल का पहला खिताब जीतने का बेहतरीन मौका है। इससे पहले वह मिक्सड डबल्स में तीन ग्रैंडस्लैम खिताब हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने 2009 में ऑस्ट्रेलियन ओपन और 2012 में फ्रेंच ओपन महेश भूपति के साथ जबकि पिछले साल यूएस ओपन में मिक्सड डबल्स का खिताब ब्राजील के ब्रूनो सुआरेस के साथ मिलकर जीता है।

यह करियर में दूसरा मौका है जब सानिया किसी ग्रैंड स्लैम के महिला डबल्स के फाइनल में पहुंची हैं। 2011 में वह रूसी जोड़ीदार इलेना वेसनीना के साथ फ्रेंच ओपन में उपविजेता रहीं थीं। तब चेक गणराज्य की जोड़ी आंद्रिया हलाकोव और लूसी हराडेक ने उन्हें फाइनल में हरा दिया था।

सानिया की ग्रैंड स्लैम सफलता
2009 : ऑस्ट्रेलियन ओपन
2012 : फ्रेंच ओपन
2014 : यूएस ओपन
03: ग्रैंडस्लैम खिताब जीत चुकी हैं सानिया मिर्जा मिक्सड डबल्स वर्ग में।
15 : ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुके हैं अब तक भारत के लिएंडर पेस। 

सुमित जूनियर डबल्स सेमीफाइनल में
विंबलडन के जूनियर मुकाबलों में भी भारत का प्रदर्शन अच्छा चल रहा है। सुमित नागल बालक युगल वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंच गए हैं। भारतीय खिलाड़ी ने विएतनाम के नेम होंग ली के साथ जोड़ी बनाते हुए जापान की ताकाहाशी और यामासाकी को सीधे सेटों में 6-2, 6-3 से हराया।

गास्केट को हराकर नंबर वन जोकोविच फाइनल में

Sania-Hingis in Wimbledon final

विंबलडन टेनिस में पुरुष एकल का फाइनल दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी सर्बिया के नोवाक जोकोविच और सात बार के चैंपियन स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर के बीच खेला जाएगा।

सेमीफाइनल मुकाबलों में जोकोविच ने फ्रांस के रिचर्ड गास्केट को एकतरफा मुकाबले में 7-6, 6-4, 6-4 से हराया। जबकि फेडरर ने ब्रिटेन के एंडी मरे की चुनौती को 7-5, 7-5, 6-4 से तोड़ा। 33 वर्षीय फेडरर अपने 18वें ग्रैंड स्लैम खिताब की दहलीज पर हैं।

शुक्रवार को वह अपने करियर के 26वें ग्रैंड स्लैम फाइनल में पहुंचे। उधर फ्रेंच ओपन में उपविजेता रहे जोकोविच के पास नौंवें ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने का मौका है।

'बुजुर्ग' फेडरर ने एंडी मरे को दी शिकस्त

Sania-Hingis in Wimbledon final

शीर्ष वरीय नोवाक जोकोविच को सेमीफाइनल में फ्रांसीसी खिलाड़ी गास्केट ने पहले सेट में कडृी चुनौती दी, पर टाईब्रेकर में सर्बियाई खिलाड़ी जीतने में सफल रहा।

शानदार सर्विस कर रहे नोवाक ने पहले सेट में पांच ऐस लगाए लेकिन उन्होंने कई बेजा गलतियां की। पहले सेट में जोकोविच ने गास्केट के 39 के मुकाबले 44 अंक हासिल किए।

दूसरे सेट में जोकोविच ने ब्रेकप्वाइंट हासिल करते हुए 6-4 से बाजी अपने नाम कर ली। तीसरे सेट में फिर गास्केट ने वापसी की कोशिश की लेकिन दो डबल फाल्ट करने और एक ब्रेकप्वाइंट गंवाने के कारण फ्रांसीसी खिलाड़ी को हार का सामना करना पड़ा।

इससे पहले गास्केट 2007 में भी विंबलडन सेमीफाइनल में पहुंचे थे और तब उन्हें स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर के खिलाफ शिकस्त झेलनी पड़ी थी।फेडरर विंबलडन के एकल फाइनल में पहुंचने वाले सबसे बुजुर्ग टेनिस ‌खिलाड़ी भी बन गए हैं।

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