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एशियन गेम्स 2026: 144 किलो वजन बना तजिंदर तूर की राह का रोड़ा, एशियाड में लगातार तीसरे स्वर्ण का सपना टूटा
सार
तजिंदर पाल सिंह तूर एशियन गेम्स में लगातार तीसरा स्वर्ण जीतने से चूक गए और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। तूर के मुताबिक इस बार उनका वजन 144-145 किलो था, जबकि पिछले दोनों स्वर्ण उन्होंने 140 किलो या उससे कम वजन में जीते थे। चोट के कारण उनकी ट्रेनिंग भी प्रभावित हुई।
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तजिंदर पाल सिंह तूर
- फोटो : फाइल
विस्तार
एशियाड का लगातार तीसरा स्वर्ण जीतने के लिए शॉटपुटर तजिंदर पाल सिंह तूर ने अपने गुरु एमएस ढिल्लों को ऑस्ट्रेलिया से मिन्नतें करके बुलाया था। यह वही ढिल्लों हैं जिन्होंने 2018 के जकार्ता एशियाड में चिल्लाकर कैंसर के चलते अंतिम सांसें गिन रहे पिता करम सिंह का हवाला दिया था। कोच के उन शब्दों ने तूर में ऐसा जज्बा भरा कि वह स्वर्ण जीतकर लौटे। तूर जानते थे कि इस बार भी कोच उन्हें स्वर्ण दिला सकते हैं, लेकिन तूर के हिस्से में रजत आया। तूर ने स्वीकार किया कि शरीर उस तरह नहीं चल रहा था जैसा 2018 और 2023 फाइनल में चला था। उनका वजन 140 किलो या उससे नीचे नहीं आ पाया जिसका उन्होंने लक्ष्य रखा था। तूर ने पिछले दो स्वर्ण भी 140 किलो के वजन पर जीते थे, लेकिन इस बार उनका वजन 144 से 145 किलो था।
139 तक ले आए थे वजन
ढिल्लों ने पहले बताया था कि 11 अप्रैल को दिल्ली में हुई एथलेटिक मीट तक सब कुछ ठीक चल रहा था। इस दिन तूर ने 21.03 मीटर गोला फेंका था और उनका वजन 139 किलो था, लेकिन जून में इंटर स्टेट से पहले रोटेटर कफ में चोट लगी। वह राष्ट्रमंडल खेलों में भी नहीं जाना चाहते थे। वहां से लौटने के बाद चोट पर काम किया पर थोड़े ही दिन बाद फिर चोट उभर आई। फिर उन्होंने ऐसी सभी एक्सरसाइज बंद करा दीं जिससे चोट उभरने का खतरा रहे।
जंप- हर्डल बंद हो गई थी। तूर बताते हैं कि न तो वह जंप लगा रहे थे और न ही हर्डल पार कर रहे थे। जिससे उनका वजन 140 से नीचे नहीं आ पाया।
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139 तक ले आए थे वजन
ढिल्लों ने पहले बताया था कि 11 अप्रैल को दिल्ली में हुई एथलेटिक मीट तक सब कुछ ठीक चल रहा था। इस दिन तूर ने 21.03 मीटर गोला फेंका था और उनका वजन 139 किलो था, लेकिन जून में इंटर स्टेट से पहले रोटेटर कफ में चोट लगी। वह राष्ट्रमंडल खेलों में भी नहीं जाना चाहते थे। वहां से लौटने के बाद चोट पर काम किया पर थोड़े ही दिन बाद फिर चोट उभर आई। फिर उन्होंने ऐसी सभी एक्सरसाइज बंद करा दीं जिससे चोट उभरने का खतरा रहे।
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जंप- हर्डल बंद हो गई थी। तूर बताते हैं कि न तो वह जंप लगा रहे थे और न ही हर्डल पार कर रहे थे। जिससे उनका वजन 140 से नीचे नहीं आ पाया।