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Rambai: 105 साल की रामबाई ने लगाई उम्र से आगे की दौड़, वडोदरा में 100 मीटर और 200 मीटर की रेस में जीते दो स्वर्ण

Tue, 21 Jun 2022 09:26 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, वडोदरा
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, वडोदरा Published by: स्वप्निल शशांक Updated Tue, 21 Jun 2022 09:26 PM IST
सार

वडोदरा में जब दौड़ शुरू हुई तो दर्शक उनके हौसले को देखकर खुश थे। उन्होंने जैसे ही 100 मीटर की दौड़ 45.40 सेकंड में पूरी की, वैसे ही एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 2017 में 101 साल की मान कौर के नाम था, जिन्होंने 74 सेकंड में रेस पूरी की थी।

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Rambai: 105 year old Ramabai raced ahead of age, won two gold in 100 meters and 200 meters race in Vadodara
रमाबाई (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कहते हैं सपने को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती। गुजरात के वडोदरा में आयोजित राष्ट्रीय ओपन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जब हरियाणा के चरखी दादरी जिले की 105 साल की रामबाई ने दौड़ लगाई तो वहां मौजूद दर्शकों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं। ग्रैंड ओल्ड लेडी रामबाई ने लोगों को निराश भी नहीं किया और अपने हौसले और जुनून की बदौलत 100 मीटर और 200 मीटर स्प्रिंग दौड़ में दो स्वर्ण पदक जीते।
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मान कौर का रिकॉर्ड तोड़ा
वडोदरा में जब दौड़ शुरू हुई तो दर्शक उनके हौसले को देखकर खुश थे। उन्होंने जैसे ही 100 मीटर की दौड़ 45.40 सेकंड में पूरी की, वैसे ही एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 2017 में 101 साल की मान कौर के नाम था, जिन्होंने 74 सेकंड में रेस पूरी की थी। रविवार को 200 मीटर की दौड़ को उन्होंने 1 मिनट, 52.17 सेकंड में पूरी की।

105-year-old 'Super Naani' sprints 100m, wins gold, sets new record: Watch
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रोज सुबह करती हूं जॉगिंग
105 साल की उम्र में खुद को फिट रहने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मैं हर सुबह जल्दी उठती हूं और जॉगिंग करती हूं। मैं अपने घर के सारे काम खुद करती हूं। मैं खेतों में भी रोज काम करती हूं। वहीं कहती हैं कि अभी मुझे कोई नहीं रोक सकता। मुझे हमेशा से खुद पर भरोसा रहा है। मैं अब विदेश यात्रा करना चाहती हूं।
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जब जन्म हुआ था, तब विश्व युद्ध प्रथम चरम पर था
रामबाई का जन्म 1917 में हुआ था, तब विश्व युद्ध प्रथम अपने चरम पर था। वहीं भारत में जॉर्ज पंचम (रानी एलिजाबेथ द्वितीय के दादा) का शासन था। उस समय भी संयुक्त राष्ट्र में पहली बार पुलित्जर पुरस्कार दिया गया था। रामबाई ने जीत के बाद कहा कि यह एक अच्छा एहसास है और मैं फिर से दौड़ना चाहती हूं। 
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