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एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: विश्व चैंपियन बनने के बाद पीवी सिंधु ने खोले कई राज, ये है 'फ्यूचर प्लानिंग'

Wed, 28 Aug 2019 01:07 PM IST
Nilesh Kumar हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Wed, 28 Aug 2019 01:07 PM IST
सार

  • विशेष बातचीत में बोलीं सिंधु- विश्व चैंपियनशिप जीतना सपना पूरा होने के समान
  • पूर्व वर्ल्ड नंबर एक ताई जू यिंग को क्वार्टर फाइनल में हराना बताया निर्णायक क्षण
  • किदांबी श्रीकांत, एचएस प्रणय के साथ गोपी अकादमी में प्रैक्टिस का मिला फायदा
  • रोजाना लंबा सफर तय कर फिटनेस सुधारना आया काम, अभी तो बहुत कुछ बाकी है

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PV sindhu exclusive interview after world champion of badminton,  now eyes on gold in Olympics
पीएम मोदी के साथ सिंधु - फोटो : एएनआई

विस्तार

विश्व चैंपियन बनने के बाद पीवी सिंधु मंगलवार को दिल्ली में थीं। बैडमिंटन में देश की पहली विश्व चैंपियन की इस सफलता पर न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीठ ठोकी बल्कि खेल मंत्री किरन रिजीजू ने उन्हें आवास पर आमंत्रित कर 10 लाख का कैश अवार्ड दिया। इस दौरान उनके साथ उनके पिता पीवी रमन्ना, कोच गोपीचंद, किम जी ह्यून भी मौजूद रहीं। सिंधु ने इससे पहले अमर उजाला से उनके विश्व चैंपियन बनने के सफर पर बातचीत भी की।

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आपने विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में 358 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से स्मैश लगाया। चैंपियनशिप में आपके प्रदर्शन के मुख्य पहलू क्या रहे?

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मैं इस टूर्नामेंट के लिए बहुत ज्यादा तैयारी करके गई थी। मैं बहुत खुश हैं कि इस चैंपियनशिप में मैंने अपना पहले से ज्यादा आक्रामक खेल दिखाया। यहां पहले दौर में मिली जीत से मुझमें विश्वास आया है कि मैं कुछ कर सकती हूं। पूर्व विश्व नंबर एक चीनी ताईपे की ताई जू यिंग के साथ क्वार्टर फाइनल मुकाबला मेरे लिए निर्णायक था। यह पूरे टूर्नामेंट का मेरा सबसे कठिन मैच था। यह मैच बहुत लंबा चला जो बेहद महत्वपूर्ण था।

 

एक तो यह क्वार्टर फाइनल था और दूसरा यहां जीतने पर एक और विश्व चैंपियनशिप का पदक पक्का होना था। एक बार सेमीफाइनल में पहुंच गए वह भी ताई जैसी खिलाड़ी को हराकर तो सेमीफाइनल से चैंपियन होने की राह खुल जाती है। फिर ताई बैडमिंटन की बहुत बड़ी खिलाड़ी हैं। उनके स्ट्रोक बेहद घातक हैं। सही मायनों में मैं इस चैंपियनशिप का हर मुकाबला बहुत ज्यादा फोकस करके खेली, क्यों कि विश्व चैंपियनशिप में हर खिलाड़ी खास तैयारी करके आता है।

ताई जू यिंग पिछले कुछ समय से लगातार अजेय चल रही थीं। उन्हें खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। आपने उनके दबदबे को कैसे तोड़ा?

ताई के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में पहला सेट हारने के बाद दूसरे सेट में मैंने हौसला नहीं छोड़ा। अपने को इस सेट में यही समझाती रही कि मैं कर सकती हूं। यह बात मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण रही। यह बातें अनुभव से आती हैं। दूसरा सेट बहुत लंबा चला और मैं ड्यूस में 23-21 से जीती। यह सेट जीतना मेरे लिए निर्णायक रहा। हालांकि तीसरे सेट में भी जबरदस्त संघर्ष हुआ। मैं हार मानने को तैयार नहीं थीं, लेकिन मैंने भी सोच रखा था कि मुकाबला नहीं छोडूंगी।

 

तीसरे सेट की शुरूआत में मैं लगातार पिछड़ रही थी 11-13 का स्कोर था। यहां से मैंने ताई को लंबी रैलियों में उलझाया। काफी लंबी रैलियां चलीं। यह कदम मेरे पक्ष में गया। ताई के खिलाफ उतरने से पहले मैंने अपने को मानसिक रूप से बेहद मजबूत किया। मैं हर वक्त खुद से कह रही थी कि मुझे इस मैच में 100 प्रतिशत देना है और लगातार अच्छा खेलना है। खुद को प्रेरित करना मेरे लिए काम कर गया।  

आपका विश्व चैंपियन बनने का सपना पूरा हो गया। अब ओलंपिक का गोल्ड का सपना कैसे पूरा करेंगी?

जी हां, यह बहुत बड़ा सपना था जो पूरा हुआ है। अंतिम दो बार मैं यहां फाइनल में पहुंच कर हार रही थी। इससे पहले दो बार कांस्य आया। वाकई यह स्वर्ण पदक अपेक्षित और जरूरी था। मैं अभी ओलंपिक गोल्ड के बारे में नहीं सोच रही हूं। अभी सुपर सीरीज टूर्नामेंट खेलने हैं। उनमें अच्छा करना है। फिलहाल यही लक्ष्य है और हां, सबसे बड़ी बात ओलंपिक क्वालिफिकेशन साल चल रहा है। पहले तो अच्छी रैंकिंग के साथ टोकियो ओलंपिक केलिए क्वालिफाई भी करना है।

विश्व चैंपियन बनकर कितनी राहत और उत्साह महसूस कर रही हैं?

बहुत ज्यादा राहत महसूस कर रही हूं और उससे भी ज्यादा उत्साहित हूं। वाकई यह सपना पूरा हुआ है। कई सालों से यह खिताब हाथ से निकल रहा था। यह मेरे  जीवन की बहुत बड़ी जीत है, लेकिन अभी बहुत कुछ बाकी है।

PV sindhu exclusive interview after world champion of badminton,  now eyes on gold in Olympics
पीवी सिंधु - फोटो : social media

क्या यह जीत उनके जीवन की सबसे बड़ी जीत है? ओलंपिक रजत और विश्व चैंपियन बनना कौन सा बड़ा क्षण है?

मेरे लिए हर टूर्नामेंट में हासिल की गई जीत बेहद खास है। मैं किसी जीत की तुलना नहीं करना चाहती हूं। हां, लेकिन यह जीत बेहद खास है।

कोरियाई कोच किम जी ह्यून के आने के बाद आपके खेल में अलग निखार आया है। किम का साथ किस तरह खास रहा है?

पिछले कुछ माह से मैं मिस किम के साथ ट्रेनिंग कर रही हूं। हर एक कोच अपना अलग एक माइंडसेट होता है। उन्होंने मेरे खेल में कुछ परिवर्तन किए हैं। इन परिवर्तनों पर मैंने काफी मेहनत की है। खासतौर पर किम ने उनकी स्किल पर काम किया है। किम के साथ के बाद उनमें काफी सुधार आया है।

हाल की विफलताओं के बाद मानसिक रूप से मजबूती के लिए किसी पक्ष पर भी काम किया है?

किसी भी खिलाड़ी के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से फिट होना बेहद महत्वपूर्ण है। हां पिछले कुछ परिणामों के बाद मैंने सकारात्मक रहने की रणनीति अपनाई है। मैं अपने मन में कभी कोई नकारात्मक ख्याल नहीं लाती हूं।  इसका मुझे बहुत ज्यादा फायदा हुआ है। यहां तक मैच में भी जब मैं अंक हार जाती थी तब सकारात्मक रहकर मैंने वापसी की। 

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पीवी सिंधु - फोटो : PTI

आपने गोपी अकादमी से अलग हटकर फिजिकल ट्रेनर श्रीकांत के साथ काम करना शुरू किया है। आपने उन्हें विश्व चैंपियनशिप में अपने साथ ले जाने को भी कहा था। फिटनेस में उनके साथ जुड़कर कितना फायदा हुआ?

ऑन कोर्ट और ऑफ कोर्ट फिट रहना मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मैं फिट रहने केलिए श्रीकांत के पास गोपी अकादमी से काफी दूर यात्रा कर सुचित्रा अकादमी तक जाती हूं। उनके साथ मैं पिछले दो सालों से काम कर रही हूं। उन्होंने मेरी फिटनेस में काफी सुधार किया है। कई पक्षों पर उन्होंने काम कराया है। फिट रहना ही मेरे  अच्छे प्रदर्शन का बड़ा मंत्र है। श्रीकांत को मैं आगे के टूर्नामेंट में अपने साथ ले जाने की कोशिश करेंगी जिससे मुझे टूर्नामेंट के दौरान फिटनेस के पक्ष पर कोई दिक्कत नहीं आए।

गोपी अकादमी में पुरुषों के साथ प्रैक्टिस करना कितना फायदेमंद रहा है?

अकादमी में कई पुरुष खिलाड़ी हैं। इंडोनेशियाई स्पारिंग पार्टनर सेतियावान हैं। फिर किदांबी श्रीकांत, एचएस प्रणय और साई परणीत के साथ भी मैं काफी खेलती हूं। हालांकि मैच नहीं कराए जाते हैं, लेकिन रैलियों, स्मैश और अन्य पक्षों को लेकर प्रैक्टिस होती है जिसका मुझे काफी फायदा मिलता है।  

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