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Paris Olympics 2024: निजी और राष्ट्रीय कोच की भूमिका को लेकर छिड़ी बहस, ओलंपिक पदक विजेता ने भी रखी राय, जानें
Tue, 23 Jul 2024 04:44 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Tue, 23 Jul 2024 04:44 PM IST
सार
निशानेबाजी में भारत की पदक उम्मीद पिस्टल निशानेबाज मनु भाकर ने महान पिस्टल निशानेबाज जसपाल राणा को चुना जबकि राइफल निशानेबाज ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर पूर्व ओलंपियन जॉयदीप करमाकर के साथ अभ्यास करते हैं।
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विजय कुमार
- फोटो : ओलंपिक
विस्तार
पेरिस ओलंपिक से पहले निजी और राष्ट्रीय कोच की भूमिका को लेकर बहस गर्मा गई है। इस बीच ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज विजय कुमार का मानना है कि खिलाड़ी के विकास के लिए निजी और राष्ट्रीय कोच दोनों की भूमिका अहम होती है। दरअसल, कई भारतीय खिलाड़ी पेरिस ओलंपिक में निजी कोच लेकर गए हैं और विजय का मानना है कि इसमें कोई बुराई नहीं है।
निशानेबाजी में भारत की पदक उम्मीद पिस्टल निशानेबाज मनु भाकर ने महान पिस्टल निशानेबाज जसपाल राणा को चुना जबकि राइफल निशानेबाज ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर पूर्व ओलंपियन जॉयदीप करमाकर के साथ अभ्यास करते हैं, हालांकि जॉयदीप उनके साथ पेरिस नहीं गए हैं। दूसरे खेलों में भी कई खिलाड़ियों ने निजी कोचों को तरजीह दी है।
लंदन ओलंपिक 2012 में रैपिड फायर पिस्टल में रजत पदक जीतने वाले विजय ने कहा, "यह पेचीदा मसला है। निजी कोचों को भी अहमियत मिलनी चाहिए। मानों अगर मैं राष्ट्रीय कोच बन जाता हूं और मेरे पास जो निशानेबाज आते हैं, वे अब तक तो निजी कोच के साथ ही अभ्यास करते आये होंगे इसलिये दोनों कोचों का योगदान अहम है। राष्ट्रीय कोच अतिरिक्त पुश देते हैं और दबाव का सामना करना सिखाते हैं।"
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विजय ने कहा, "महासंघ को भी ऐसे ही कोच नियुक्त करने चाहिये जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हों ताकि वे इन हालात में अच्छा खेलने के बारे में सिखा सकें। उस समय उनके दिमाग में क्या चल रहा था या कौन सी तकनीक अपनानी चाहिए।"
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निशानेबाजी में भारत की पदक उम्मीद पिस्टल निशानेबाज मनु भाकर ने महान पिस्टल निशानेबाज जसपाल राणा को चुना जबकि राइफल निशानेबाज ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर पूर्व ओलंपियन जॉयदीप करमाकर के साथ अभ्यास करते हैं, हालांकि जॉयदीप उनके साथ पेरिस नहीं गए हैं। दूसरे खेलों में भी कई खिलाड़ियों ने निजी कोचों को तरजीह दी है।
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लंदन ओलंपिक 2012 में रैपिड फायर पिस्टल में रजत पदक जीतने वाले विजय ने कहा, "यह पेचीदा मसला है। निजी कोचों को भी अहमियत मिलनी चाहिए। मानों अगर मैं राष्ट्रीय कोच बन जाता हूं और मेरे पास जो निशानेबाज आते हैं, वे अब तक तो निजी कोच के साथ ही अभ्यास करते आये होंगे इसलिये दोनों कोचों का योगदान अहम है। राष्ट्रीय कोच अतिरिक्त पुश देते हैं और दबाव का सामना करना सिखाते हैं।"
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विजय ने कहा, "महासंघ को भी ऐसे ही कोच नियुक्त करने चाहिये जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हों ताकि वे इन हालात में अच्छा खेलने के बारे में सिखा सकें। उस समय उनके दिमाग में क्या चल रहा था या कौन सी तकनीक अपनानी चाहिए।"