फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   Other Sports ›   when sania mirza bring pride in woman tennis for india

जब टेनिस में सानिया मिर्जा ने दुनिया को दिखाया भारतीय महिलाओं का दमखम

Sun, 13 Aug 2017 07:48 PM IST
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र Updated Sun, 13 Aug 2017 07:48 PM IST
विज्ञापन
when sania mirza bring pride in woman tennis for india
सानिया मिर्जा - फोटो : getty
देश में 2000 के दौर में लॉन टेनिस में बेहतरीन खेल दिखाकर सानिया मिर्जा ने दुनिया को भारतीय महिलाओं के दम से परिचित कराया। सानिया ने देश में इस खेल को लेकर महिलाओं में उम्मीद जगाई। यह वह दौर था जब देश में महिला टेनिस का मतलब सिर्फ सानिया था। सानिया को उनकी खेल क्षमता की वजह से 2006 में पद्मश्री दिया गया। यह सम्मान पाने वाली वह देश की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनीं।
विज्ञापन

 

छह वर्ष से टेनिस का सफर हुआ शुरू 

when sania mirza bring pride in woman tennis for india
सानिया मिर्जा - फोटो : Instagram
छह वर्ष से टेनिस का सफर शुरू हुआ। 1999 में पहली बार जूनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। टेनिस का ककहरा सानिया को महेश भूपति के पिता सीके भूपति ने सिखाया। अमेरिका में भी टेनिस सीखा। उनकी टेनिस का असर ‌था कि 2002 के दौर में देश के शीर्ष टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने बुसान एशियाड में 16 साल की सानिया को खेलते देखा और कहा कि वह सानिया के साथ ही डबल्स में खेलेंगे। दोनों ने देश को कांस्य पदक भी दिलाया। सानिया ने 17 साल की उम्र में विंबलडन का जूनियर डबल्स चैंपियनशिप का ‌खिताब जीता। 
विज्ञापन
विज्ञापन

मां-पिता सानिया को स्टेफी ग्राफ बनाना चाहते ‌थे 

when sania mirza bring pride in woman tennis for india
सानिया मिर्जा - फोटो : getty
मां-पिता ने बेटी के टेनिस प्रेम को देखते हुए सानिया को स्टेफी ग्राफ बनाना चाहते थे। सानिया को वैसे भी स्टेफी ग्राफ काफी पसंद थी। उनके लिए इससे और खुशी क्या हो सकती थी। मां ने सानिया को काफी सहारा दिया। उन्हें मानसिक रूप से मजबूती दी। हैदराबाद की सानिया मिर्जा ने जनवरी 2005 में भारतीय टेनिस के इतिहास में एक नया इतिहास लिखा। ऑस्ट्रेलियन ओपन में हंगरी की 84 वीं वरीयता प्राप्त पेत्रा मैंडुला को हराने के साथ ही ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के तीसरे राउंड में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं। सानिया की इस वक्त वरीयता 34 वीं थी।

भारतीय महिला टेनिस का यह गौरवमयी क्षण था। चौथे दौर में सानिया का मुकाबला दबंग सेरेना विलियम्स से था। सानिया सेरेना से मैच हार गईं लेकिन उनके खेल कौशल को मीडिया ने काफी सराहा। वर्ष 2005 में यूएस ओपन में चौथे राउंड में प्रवेश किया। चौथे राउंड में सानिया मारिया शारापोवा से हार गई, परंतु इस स्थान तक पहुंचने वाली वह प्रथम भारतीय महिला खिलाड़ी थी।
विज्ञापन

सचिन के बाद देश में सानिया का नाम था 

when sania mirza bring pride in woman tennis for india
सानिया मिर्जा और शोएब मलिक - फोटो : getty
सानिया ने 2006 में दोहा एशियाड में लिएंडर पेस के साथ मिश्रित युगल का स्वर्ण पदक जीता। महिलाओं के एकल मुकाबले में रजत पदक जीता। सानिया की लोकप्रियता काफी बढ़ गई। लोगों ने उन्हें सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरा सर्वाधिक लोकप्रिय खिलाड़ी का दर्जा दे दिया। अगस्त 2007 में उनकी रैंकिंग एकल में 27 थी जो उनकी सर्वाधिक रैंकिंग थी। लिएंडर पेस 73 रैंकिंग से आगे नहीं बढ़ पाए थे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed