सुमित नागल का लक्ष्य तीन माह में टॉप 100 में शामिल होना, ओलंपिक पर है नजर
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रोजर फेडरर जैसे दिग्गज के खिलाफ यूएस ओपन में सेट जीतकर कड़ी चुनौती देने के कारनामे ने सुमित नागल के अंदर अनोखा विश्वास भरा है। जिसके चलते उन्हें टोक्यो ओलंपिक में खेलने का सपना उन्हें दूर नहीं दिखाई पड़ता है। नागल की मानें तो 2016 में वह ओलंपिक खेलने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, लेकिन आज हालात ऐसे नहीं है। नागल के मुताबिक वह ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर सकते हैं। यही वजह है कि उन्होंने अगले तीन माह में अपने लिए टॉप 100 में आने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसके लिए उन्हें पेशेवर विशेषज्ञों की टीम की जरूरत है। विराट कोहली फाउंडेशन और इंडियन ऑयल की मदद से सुमित अपने साथ सिर्फ कोच साशा नेंसल को ले जा पाते हैं।
कम से कम दो पेशेवर विशेषज्ञ साथ ले जाना चुनौती
सुमित के पास कोच साशा के अलावा ट्रेनर मिलोस गलेशिच हैं, लेकिन कम पैसा होने के चलते वह दोनों को अपने साथ टूर्नामेंट में नहीं रख सकते हैं। सुमित के मुताबिक उनके समक्ष पहली चुनौती दोनों को साथ ले जाना है। इसके बाद वह अपने साथ एक फीजियो जोडना चाहते हैं। प्रायोजक मिलेंगे तो वह फीजियो को अनुबंधित करेंगे।
ओलंपिक के लिए टॉप 80 में आना होगा
उनकी पहली कोशिश टॉप 100 ब्रेक करना है। उसके बाद ओलंपिक के लिए टॉप 80 में आना पड़ेगा। उनकी वर्तमान रैंकिंग 131 है। अभी भी इस लक्ष्य में 200 से 250 अंक का अंतर है। अच्छी बात यह है कि वह इससे बहुत ज्यादा दूर नहीं हैं। यह सब काम इस साल जून तक करना है। फिल्हाल वह पुणे में महाराष्ट्र ओपन खेलने जा रहे हैं। उन्हें बंगलूरू में भी चैलेंजर खेलना है।
ऑस्ट्रेलियन ओपन से पहले हो गए थे बीमार
सुमित को ऑस्ट्रेलियन ओपन के क्वालिफायर में ही हार का सामना करना पड़ा। सुमित के मुताबिक वह दिसंबर के अंत में बीमार पड़ गए थे। जिसके चलते कुछ दिनों तक प्रैक्टिस नहीं कर पाए और आठ-नौ सप्ताह तक कोई टूर्नामेंट नहीं खेले। बीमारी के चलते उन्हें ऑस्ट्रेलियन ओपन से पहले एक चैलेंजर टूर्नामेंट से नाम वापस लेना पड़ा। अब वह ठीक महसूस कर रहे हैं। साशा के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं और ट्रेनर मिलोस भी उनके साथ हैं।
ग्रैंड स्लैम पहले दौर की बाधा तोडना चुनौती
सुमित स्वीकार करते हैं कि पिछले चार-पांच साल में ग्रैंड स्लैम में भारतीयों के लिए सिंगल्स में अच्छे परिणाम नहीं आए हैं, लेकिन सोमदेव, सानिया मिर्जा, लिएंडर पेस, विजय अमृतराज, रमेश कृष्णन ग्रैंड स्लैम में आगे बढ़ते रहे हैं। सुमित कहते हैं कि ग्रैंड स्लैम इतना आसान नहीं है। उन्होंने अपना पहला स्लैम मैच फेडरर के खिलाफ खेला। भारतीय खिलाड़ी चैलेंजर से ग्रैंड स्लैम खेल रहे हैं। फिर यहां पहले दौर में बड़े खिलाड़ी से सामना हो जाए तो उसे हराना आसान नहीं होता है। स्लैम में अच्छे प्रदर्शन के लिए खिलाड़ी का साल भर टॉप 100 में रहना जरूरी है, जो सोमदेव ने किया। उनकी भी यही कोरै रहेगी। मुझ लगता है कि मैं यह कर सकता हूं और मैं इसकेबारे में बेहद सकारात्मक हूं।