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तीरंदाजी कोच ने द्रोणाचार्य अवॉर्ड नहीं मिलने पर दिया था इस्तीफा, अब होगी सख्त कार्रवाई

Mon, 12 Nov 2018 08:24 AM IST
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 12 Nov 2018 08:24 AM IST
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strict action will be taken against archery coach jeevanjot singh teja
जीवनजोत सिंह तेजा

अवॉर्ड कमेटी की ओर से द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए सिफारिश के बाद खेल मंत्रालय से नाम कटने पर अभियान चलाने वाले तीरंदाजी कोच जीवनजोत सिंह तेजा के खिलाफ अनुशासनहीनता  के लिए कार्रवाई होने जा रही है। 

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अवॉर्ड नहीं दिए जाने पर जीवनजोत ने न सिर्फ भारतीय टीम के कोच पद से इस्तीफा दे दिया था बल्कि विश्व कप फाइनल्स में टीम के साथ तुर्की भी नहीं गए थे। तुर्की जाने के लिए उनकी हवाई यात्रा का टिकट भी बुक कराया जा चुका था। आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रशासक और साई ने इसे अनुशासनहीनता माना है। उनसे न सिर्फ हवाई यात्रा का पैसा वसूला जाएगा बल्कि कार्रवाई की भी तैयारी कर ली गई है।
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सितंबर माह में तुर्की में हुए विश्व कप फाइनल्स के लिए दीपिका कुमारी, ज्योति सुरेखा और अभिषेक वर्मा ने क्वालिफाई किया था। इनके साथ बतौर कोच जीवनजोत को जाना था, लेकिन वह द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए नाम काटे जाने पर टीम के कोच पद से इस्तीफा दे चुके थे। हालांकि, उनके जाने की सारी औपचारिकताएं साई की ओर से पूरी कर ली गई थीं। 
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एएआई ने जीवनजोत को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनके टीम के साथ नहीं जाने का कारण भी पूछा है। अब साई भी इस मामले को अनुशासनहीनता मान रही है। उसने हवाई यात्रा का टिकट वसूलने के अलावा एएआई को जीवनजोत के खिलाफ उचित कार्रवाई के लिए लिखा है। 

अवॉर्ड के लिए अभियान चलाने का भुगता खामियजा

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jeevanjot singh teja

एएआई भी उनके खिलाफ कार्रवाई का मन बनाकर बैठी है। जीवनजोत का कहना है कि उन्हें तुर्की जाने का टिकट सुबह भेजा गया जबकि शाम को फ्लाइट थी। उस वक्त वह पटियाला में थे। फिर उनका वीजा भी नहीं लगा था। वह पहले ही विरोध में इस्तीफा दे चुके थे तो कैसे जा सकते थे। 

सच्चाई यह है कि द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए नाम कटने पर जीवनजोत ने खेल मंत्रालय के खिलाफ खुलेआम अभियान छेड़ दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान जारी किए और कोच पद से इस्तीफा दे दिया। 

जीवनजोत के खिलाफ पहले भी वर्ल्ड यूनिवर्सियाड के दौरान लापरवाही के आरोप लग चुके हैं। इन खेलों में भारतीय टीम अपना कांस्य पदक मुकाबला ही खेलने के लिए नहीं पहुंची थी। उन पर आरोप था कि मुकाबले के दौरान टीम स्टेडियम में ही नहीं थी। इसी को आधार बना मंत्रालय ने उनका नाम अवॉर्ड के लिए काटा था।

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