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टोक्यो पैरालंपिक: गोल्ड मेडलिस्ट प्रमोद भगत ने सचिन को दिया सफलता का श्रेय, बोले- उनकी खेल भावना ने मुझे काफी प्रभावित किया

Sun, 12 Sep 2021 04:55 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sun, 12 Sep 2021 04:55 PM IST
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Pramod Bhagat says I learnt to stay calm under pressure from sachin tendulkar
प्रमोद भगत, सचिन तेंदुलकर - फोटो : social media

टोक्यो पैरालंपिक में गोल्ड जीतने वाले बैडमिंटन खिलाड़ी प्रमोद भगत ने कहा है कि टीम इंडिया के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की खेल भावना ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। उन्होंने खेल के दौरान अपने शांत और एकाग्र व्यवहार का श्रेय सचिन तेंदुलकर को देते हुए कहा कि उन्हें इस दिग्गज क्रिकेटर की खेल भावना और शानदार व्यवहार से प्रेरणा मिली। भगत ने पिछले सप्ताह टोक्यो पैरालंपिक के एसएल 3 वर्ग के फाइनल में ब्रिटेन के डेनियल बेथेल पर सीधे गेम में जीत के साथ भारत का बैडमिंटन में पहला पैरालंपिक गोल्ड मेडल जीता। 

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चार साल की उम्र में पोलियो से ग्रसित होने वाले 33 साल के इस भारतीय ने फाइनल के दूसरे सेट में आठ अंक से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की थी। भगत ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में बताया, 'मैं बचपन में क्रिकेट खेला करता था। उस दौरान हम दूरदर्शन पर क्रिकेट देखते थे और मैं हमेशा सचिन तेंदुलकर के शांत और एकाग्र व्यवहार से प्रभावित होता था। परिस्थितियों से निपटने के उनके तरीके का मुझ पर बहुत प्रभाव पड़ा।' उन्होंने कहा, 'मैं उनका अनुसरण करने लगा। उनकी खेल भावना ने मुझे बहुत प्रभावित किया। इसलिए जब मैंने खेलना शुरू किया, तो मैंने उसी विचार प्रक्रिया का पालन किया और इससे मुझे विश्व चैंपियनशिप सहित कई मैचों में यादगार वापसी करने में मदद मिली।'
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बात दें कि बीते दिनों आठ सितंबर को प्रमोद भगत ने स्वदेश लौटने के बाद टीम इंडिया के महान क्रिकेट सचिन तेंदुलकर से मुलाकात की थी। उन्होंने सचिन को पैरालंपिक फाइनल में इस्तेमाल किए गए अपने रैकेट को उपहार में दिया। तेंदुलकर ने उन्हें एक ऑटोग्राफ वाली टी-शर्ट और अपनी आत्मकथा की किताब दी। उन्होंने कहा, 'मैं बचपन से ही सचिन से प्रेरित रहा हूं, इसलिए जब मैं उनसे मिला तो यह मेरे लिए एक बड़ा क्षण था। उन्होंने मुझे जीवन और खेल के संतुलन के बारे में बताया। यह एक सपने के सच होने का क्षण था।'
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