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3डी तकनीक से पहले की प्रैक्टिस, फिर किया तीरंदाज शिवांगिनी का ऑपरेशन
Fri, 10 Jan 2020 09:53 PM IST
Rohit Ojha
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: Rohit Ojha
Updated Fri, 10 Jan 2020 09:53 PM IST
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शिवांगिनी गोहेन
- फोटो : social media
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असम के डिब्रूगढ़ निवासी घायल तीरंदाज शिवांगिनी की हालत खतरे से बाहर है। बेदह जटिल ऑपरेशन के बाद उनकी गर्दन में फंसे तीर को निकाल लिया गया। शुक्रवार को दिल्ली एम्स में चार घंटे चले ऑपरेशन के बाद वह अब आईसीयू में भर्ती हैं।
सिर से जुड़े जग्गा-बलिया को अलग करने वाले न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक गुप्ता और उनकी टीम ने ऑपरेशन किया है। तीर शिवांगिनी के गले में करीब 15 सेंटीमीटर अंदर घुसा था। करीब 0.5 सेंटीमीटर ही रीढ़ की हड्डी दूर रह गई थी। इस जटिल ऑपरेशन को करने से पहले डॉक्टरों ने बीती रात 3डी तकनीक पर पहले प्रैक्टिस की थी।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि बीती रात करीब आठ बजे मरीज को एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती किया गया। इसके बाद एमआरआई और सीटी स्कैन के जरिए तीर की लोकेशन का पता लगाया गया। फिर 3डी स्कैन की मदद से प्रैक्टिस की गई। इसके बाद एंजियोग्राफी के जरिए धमनियों में ब्लॉकेज का पता लगाया। तीर कंधे की हड्डी से होते हुए अंदर पहुंचा था। इससे गर्दन, बायां फेफड़ा और रीढ़ की हड्डी के नजदीक से जाने वाली रक्त धमनी प्रभावित हो चुकी थी। इसी धमनी से होते हुए रक्त का संचार मस्तिष्क तक होता है।
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फिर से मैदान में होगी जांबाज शिवांगिनी
डॉक्टरों का कहना है कि ऑपरेशन काफी जटिल था। इससे पहले उन्होंने कभी ऐसी सर्जरी नहीं की। डॉक्टरों का कहना है कि करीब 2 महीने उन्हें रिकवरी में लगेंगे। इसके बाद वह पहले की तरह खेल सकेंगी।
अभ्यास के दौरान लगा था तीर
12 साल की तीरंदाज शिवांगिनी भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की कम एंड प्ले स्कीम के तहत डिब्रूगढ़ सेंटर में अभ्यास करती हैं। बृहस्पतिवार को अभ्यास के दौरान शिवांगिनी को तीर लग गया था। घायल खिलाड़ी को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां ऑपरेशन असफल रहा और डॉक्टर तीर को बाहर नहीं निकाल पाए। इसके बाद शिवांगिनी को एयरलिफ्ट कर दिल्ली एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया।
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सिर से जुड़े जग्गा-बलिया को अलग करने वाले न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक गुप्ता और उनकी टीम ने ऑपरेशन किया है। तीर शिवांगिनी के गले में करीब 15 सेंटीमीटर अंदर घुसा था। करीब 0.5 सेंटीमीटर ही रीढ़ की हड्डी दूर रह गई थी। इस जटिल ऑपरेशन को करने से पहले डॉक्टरों ने बीती रात 3डी तकनीक पर पहले प्रैक्टिस की थी।
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डॉ. गुप्ता ने बताया कि बीती रात करीब आठ बजे मरीज को एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती किया गया। इसके बाद एमआरआई और सीटी स्कैन के जरिए तीर की लोकेशन का पता लगाया गया। फिर 3डी स्कैन की मदद से प्रैक्टिस की गई। इसके बाद एंजियोग्राफी के जरिए धमनियों में ब्लॉकेज का पता लगाया। तीर कंधे की हड्डी से होते हुए अंदर पहुंचा था। इससे गर्दन, बायां फेफड़ा और रीढ़ की हड्डी के नजदीक से जाने वाली रक्त धमनी प्रभावित हो चुकी थी। इसी धमनी से होते हुए रक्त का संचार मस्तिष्क तक होता है।
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डॉक्टरों का कहना है कि ऑपरेशन काफी जटिल था। इससे पहले उन्होंने कभी ऐसी सर्जरी नहीं की। डॉक्टरों का कहना है कि करीब 2 महीने उन्हें रिकवरी में लगेंगे। इसके बाद वह पहले की तरह खेल सकेंगी।
अभ्यास के दौरान लगा था तीर
12 साल की तीरंदाज शिवांगिनी भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की कम एंड प्ले स्कीम के तहत डिब्रूगढ़ सेंटर में अभ्यास करती हैं। बृहस्पतिवार को अभ्यास के दौरान शिवांगिनी को तीर लग गया था। घायल खिलाड़ी को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां ऑपरेशन असफल रहा और डॉक्टर तीर को बाहर नहीं निकाल पाए। इसके बाद शिवांगिनी को एयरलिफ्ट कर दिल्ली एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया।