माह के अंत से शुरू हो सकते हैं राष्ट्रीय शिविर, ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुके खिलाड़ियों को ही मिलेगी छूट
- ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुके खिलाड़ियों को ही मिलेगी छूट
- अन्य को सितंबर तक करना होगा इंतजार
विस्तार
खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुके खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय शिविर इस माह के अंत से चरणबद्ध तरीके से फिर से शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि अन्य खिलाड़ियों को इसके लिए सितंबर तक का इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण उनका मंत्रालय भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के केंद्रों में ट्रेनिंग शिविर शुरू नहीं कर पाया।
रिजिजू ने फिक्की के वेबिनार कोराना एवं खेल द चैंपियंस स्पीक में कहा, शिविर चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगे। पहले हम एनआईएस पटियाला और बंगलूरू के साई केंद्र में ट्रेनिंग शुरू करेंगे, जहां इस समय एथलीट ठहरे हुए हैं। इस माह के अंत में बंगलूरू और पटियाला में ट्रेनिंग शुरू करने की उम्मीद है। शिविर उन खेलों के लिए होंगे, जिसमें हमने ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया है या जिन खेलों केभविष्य में ओलंपिक क्वालिफिकेशन हैं। राष्ट्रीय शिविर मार्च के मध्य में निलंबित कर दिए थे।
तो आज से शुरू हो जाते शिविर :
खेलमंत्री ने कहा कि मैंने तीन मई से साई केंद्रों में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग शुरू करने के बारे में सोचा था लेकिन अब हमें (लॉकडाउन बढ़ने से) इसे इस महीने के अंत से चरणबद्ध तरीके से शुरू करना होगा। आपदा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत खेल प्रतियोगिताओं को कोई छूट नहीं दी जाती। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो जो एथलीट ओलंपिक क्वालिफिकेशन करने की दौड़ में नहीं हैं, उन्हें ट्रेनिंग शुरू करने के लिए सितंबर तक का इंतजार करना होगा।
धावकों के ट्रायल का फैसला दबाव में लिया
रिजिजू ने स्वीकार किया कि भैंसों के साथ दौड़कर (कंबाला) सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने वाले धावकों को तुरंत ट्रायल के लिए बुलाने का फैसला दबाव में किया गया, जिससे कि लगे कि वह अपने काम को लेकर तत्पर हैं। कर्नाटक के कंबाला धावक श्रीनिवास गौड़ा और मध्य प्रदेश के रामेश्वर गुर्जर ने पिछले साल प्रतिकूल हालात में दौड़ लगाकर सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरी थी। माना जा रहा था कि इन्होंने 11 सेकंड में 100 मीटर दौड़ पूरी की थी और लोग उन्हें अगला उसैन बोल्ट कहने लगे थे।
उन्होंने कहा, ‘मध्य प्रदेश में किसी ने गांव के एक लड़के का दौड़ते हुए वीडियो बनाया और इसे सोशल मीडिया पर डाल दिया। साथ में टिप्पणी की कि वह बोल्ट से तेज दौड़ रहा है। जब यह वायरल हो गया तो मैं इसकी अनदेखी कर सकता था लेकिन मान लीजिए कि मैं समय पर प्रतिक्रिया नहीं देता तो लोग कहते कि खेलमंत्री चुप बैठे हैं। वह इसका संज्ञान नहीं ले रहे।’ रामेश्वर ट्रायल में 100 मीटर की दूरी बामुश्किल 12.9 सेकंड में पूरी कर पाए।
उन्होंने कहा, ‘शिवराज सिंह चौहान ने भी मुझे इस मामले को देखने को कहा इसलिए मैंने साई की टीम को उसे परखने के लिए भोपाल भेजा। मुझे उसकी क्षमता पता थी लेकिन देश को नहीं पता कि खेल की प्रकृति क्या है। लोगों ने बस यह कहना शुरू कर दिया कि वह बोल्ट से तेज दौड़ा और ऐसा जागरूकता की कमी के कारण हुआ।’
खेल मंत्री ने कहा, ‘इसके चार-पांच महीने के बाद खबर आई कि किसी ने कर्नाटक में भैंसा दौड़ में बोल्ट का रिकॉर्ड तोड़ दिया। यहां तक कि पेशेवर लोगों, कुछ व्यवसायियों, भारत के कुछ जाने-माने लोगों ने भी कहा कि यह व्यक्ति 100 मीटर में ओलंपिक स्वर्ण पदक लाएगा। समस्या यह है कि लोगों को जानकारी और समझ नहीं है। अगर मैं जवाब नहीं दूंगा तो वे कहेंगे कि खेल मंत्री चुपचाप बैठे हैं। लोग सोच रहे होंगे कि खेलमंत्री क्या कर रहे हैं। वह इस तरह की अपरिपक्व बातों पर प्रतिक्रिया दे रहा है लेकिन खेल की जानकारी नहीं रखने वाले वर्गों को मुझे दिखाना होगा कि मैं भारतीय खेलों को लेकर तत्पर हूं और मैं खिलाड़ियों के लिए मौजूद हूं। क्षमतावान खिलाड़ियों को मैं सभी तरह के मौके दूंगा इसलिए मुझे यह दिखाना था।’