मैरीकॉम और मनीषा महिला वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में, सरिता का सफर थमा
वर्ल्ड चैंपियनशिप शुरू होने से पहले एमसी मैरीकॉम (48 किग्रा) ने कहा था कि वह अपने 18 साल के लंबे अनुभव का इस्तेमाल करते हुए हवा में पंच नहीं चलाएंगी। मैरी ने विश्व चैंपियनशिप में अपने सातवें पदक के अभियान में कजाखस्तान की बॉक्सर एइगरिम कास्सायेनेवा के खिलाफ यही किया।
बॉक्सिंग की थोड़ी बहुत समझ रखने वाले को भी यह समझ में आ गया कि मैरी की कोशिश लक्ष्य पर मुक्का जड़ अंक झटकने की है। नतीजा अंत में मैरी के अनुभव की जीत के रूप में आया। उन्होंने 5-0 से जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। दिन का आकर्षण हरियाणा की युवा मनीषा मोन रहीं। एकतरफ मैरी हैं तो दूसरी ओर पहली विश्व चैंपियनशिप में खेल रही 21 वर्षीय मनीषा (54 किग्रा) ने कजाखस्तान की वर्ल्ड चैंपियन दीना जोलामेन को पराजित कर बड़ा उलटफेर कर डाला।
मनीषा ने फिर से दूर से खेलते हुए दाएं-बाएं हाथ के पंच लगाने की अपनी रणनीति कायम रखी जिसका नतीजा फिर उनके हक में रहा। पांचों जज ने उन्हें 30-27, 30-27, 30-27, 29-28, 29-28 अंक दिए। अब पदक दौर में पहुंचने के लिए मनीषा का सामना मंगलवार को शीर्ष वरीय और 2016 विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता स्टोयका पैट्रोवा से होगा।
मैरी के सामने अब होंगी यू वू
पहले दौर में बाई हासिल करने वाली मैरी जिस तरह खेलीं उससे लगा ही नहीं कि वह बहुत ज्यादा प्रयास करने की कोशिश कर रही हैं। यही कारण था कि कोच छोटे लाल यादव बोले कि यह मैरी की फिटनेस का कमाल है। उसने इस बाउट में अपनी ऊर्जा ज्यादा खर्च नहीं की है, लेकिन अगले दौर में चीन की यू वू के खिलाफ उनका खेल देखने वाला होगा। मैरी ने जीत के बाद कहा उन पर दबाव इस बात का है कि लोगों ने उनसे बहुत ज्यादा अपेक्षा कर रखी है, लेकिन अब शुरुआत हो चुकी है। वह अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगी।
पिता से मार खाकर भी मनीषा बनीं बॉक्सर
पहले दौर में अमेरिका की क्रिस्टीना क्रूज और अब वर्ल्ड चैंपियन दीना को रिंग में धोकर कैथल की मनीषा ने अपने पिता का सीना चौड़ा कर दिया। वह पिता जिनकी पिटाई से बचने के लिए मनीषा छुप-छुपकर बॉक्सिंग करती रहीं। जब वह हरियाणा की चैंपियन बनीं तब उनके पिता को उनके बॉक्सर बनने के बारे में पता लगा।
मनीषा ने कहा कि बेटी होने के चलते उनके खेलने पर पाबंदी थी, लेकिन मां के साथ के चलते वह खेला करती थीं। पिता से कई बार खेलने के लिए मार खाई, लेकिन स्कूल में वॉलीबाल खेलना शुरू कर दिया। यहां कोच राजेंदर सिंह और गुरमीत सिंह ने कहा कि बॉक्सिंग करोगी तो यह खेल शुरू कर दिया। मनीषा ने हाल ही में पोलैंड में दीना को हराया था। यह उनकी इस बॉक्सर पर लगातार दूसरी जीत है।
लोवलीना व भाग्यवती अंतिम-16 में
असम की लोवलीना (64 किग्रा) और इसी राज्य की भाग्यवती (81 किग्रा) अपने-अपने मुकाबले जीतकर अंतिम 16 में पहुंचीं। लोवलीना ने पनामा की बॉयलन एथीना को 5-0 से, जबकि असम के कोकराझार इलाके की भाग्यवती ने ईरीना निकोलेटा शानबर्गर को 4-1 से पराजित किया।
सरिता का सफर थमा
सरिता देवी (60 किग्रा) का दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का सपना रविवार को टूट गया। मणिुपर की इस मुक्केबाज को प्री क्वार्टर फाइनल में आयरलैंड की केली हैरिंग्टन के हाथों करीबी मुकाबले में 2-3 से शिकस्त का सामना करना पड़ा। सरिता ने हार के बाद फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि वह इससे खुश नहीं हैं। उनकी नजर में वह जीती हुई हैं लेकिन वह अपील नहीं करेंगी। एक बार उन पर प्रतिबंध लग चुका है और अब वह दोबारा जोखिम नहीं लेना चाहतीं।