अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस: जानें इस खास दिन के महत्व और इतिहास समेत हर जरूरी जानकारी
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दुनियाभर के खिलाड़ियों को एक मंच पर इकठ्ठा कर विभिन्न खेलों में विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा करवाने वाले खेलों के महाकुंभ ओलंपिक के लिए आज का दिन बेहद खास है। आज 23 जून को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस मनाया जा रहा है। ओलंपिक दिवस खेल, स्वास्थ्य, और सबसे अच्छा होने का एक उत्सव है जिसमें दुनियाभर से लोग शामिल होते हैं।
इस खास दिन पर विश्व के अलग-अलग हिस्सों में कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिसमें हर वर्ग के लोग या खिलाड़ी शामिल होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनियाभर में आज के ही दिन ओलंपिक दिवस क्यों मनाया जाता है और इसका इतिहास क्या है? आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी के बारे में।
#OlympicDay is going to be fun!
Here is your schedule for our workouts on Tuesday - where in the world will you be joining us from?🗺️#StayActive pic.twitter.com/ZCgG1egHo9विज्ञापन विज्ञापन— Olympic Channel (@olympicchannel) June 20, 2020
क्या होता है ओलंपिक दिवस
आज ही के दिन 1894 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की स्थापना हुई थी, यह दिन खेल, स्वास्थ्य और खुद को बेहतर बनाने का दिन है। इसमें दुनियाभर से कोई भी भाग ले सकता है।
कब होता है ओलंपिक दिवस
ओलंपिक दिवस प्रत्येक वर्ष 23 जून को होता है, जिसे एक उत्सव की तरह दुनियाभर में लोग सक्रिय होकर मनाते हैं। इसमें कोई भी कहीं से भी शामिल हो सकता है।
ओलंपिक दिवस का इतिहास
चेक आईओसी के सदस्य डॉक्टर ग्रस ने स्टॉकहोम में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के 41वें सत्र में विश्व ओलंपिक दिवस का विचार प्रस्तुत किया, जिसमें ओलंपिक के संदेशों और मूल उद्देश्य को मनाने के लिए एक दिन निर्धारित करने के लिए कहा गया। कुछ महीनों बाद जनवरी 1948 में सेंट मोरित्ज में आईओसी के 42वें सत्र में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों को इस कार्यक्रम के आयोजन का प्रभारी बनाया गया, उसके बाद से यह तारीख आईओसी के इतिहास में एक विशेष पल का हिस्सा बन गई।
गौरतलब है कि इससे पहले अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की स्थापना 23 जून, 1894 को सोरबोन, पेरिस में की गई थी, जहां पियरे डे कोबेर्टिन ने ओलंपिक खेलों के पुनरुद्धार के लिए एक रैली की थी।
पहली बार कब मनाया गया था?
ओलंपिक दिवस 23 जून 1948 को पहली बार मनाया गया था। उस समय पुर्तगाल, ग्रीस, ऑस्ट्रिया, कनाडा, स्विट्जरलैंड, ग्रेट ब्रिटेन, उरुग्वे, वेनेजुएला और बेल्जियम ने अपने-अपने देशों में ओलंपिक दिवस का आयोजन किया और उस समय के आईओसी के अध्यक्ष सिगफ्रीड एडस्ट्रॉम ने दुनिया के युवाओं को एक संदेश दिया।
इस बार क्या खास होगा?
कोरोना महामारी के इस दौर में जब सब कुछ लॉक है और खेलों पर भी इसका साया पड़ा है, तब ऐसे वक्त में इस दिन को डिजिटल माध्यम से खास बनाने की तैयारी है। 23 जून को ओलंपिक दिवस के दिन दुनिया का सबसे बड़ा 24 घंटे के पहले डिजिटल-ओलंपिक वर्कआउट का आयोजन होगा।
ओलंपिक दिवस में कौन हिस्सा ले सकता है?
इसमें शामिल होने के लिए ओलंपियन होने की जरूरत नहीं है। इस बार इसमें खिलाड़ियों और ओलंपिक के इंस्टाग्राम पेज से जुड़ा जा सकता है। आज दुनियाभर के स्टार और दिग्गज खिलाड़ी अपने-अपने घर से ऑनलाइन वर्कऑउट करेंगे और उनके साथ कोई भी जुड़कर खुद भी वर्कआउट कर सकता है और अपने पसंदीदा खिलाड़ियों से प्रेरणा ले सकता है।
ओलंपिक दिवस के दिन लोग क्या करते हैं?
ओलंपिक दिवस अब एक छोटी सी दौड़ या एकल खेल आयोजन की तुलना में बहुत बड़ा आयोजन बन चुका है। इस दिन दुनियाभर की राष्ट्रीय ओलंपिक समितियां, 'आगे बढ़ो', 'सीखो' और 'खोजो' के तीन स्तंभों के आधार पर उम्र, लिंग, सामाजिक पृष्ठभूमि या खेल क्षमता की परवाह किए बिना अलग-अलग तरह की पहल करती हैं। कुछ देशों ने इस घटना को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया है। ऐसे में हर कोई ओलंपिक दिवस का हिस्सा हो सकता है।
इस बार कौन-कौन से भारतीय एथलिट शामिल होंगे?
ओलंपिक 2016 की महिला बैडमिंटन एकल की रजत पदक विजेता और देश की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधू इस बार इस आयोजन का हिस्सा बनेंगी और ऑनलाइन अपना वर्कऑउट शेयर करेंगी।