खेल मंत्रालय की अब नहीं मिली मंजूरी तो कुश्ती संघ निजी क्षेत्र से लगाएगा मदद की गुहार
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नियम-कानून के पेच में कुश्ती के तीन विदेशी कोच का अनुबंध फंस गया है, जिसका सीधा असर टोकियो ओलंपिक की तैयारियों पर पड़ रहा है। तकरीबन एक साल से लटके पड़े अनुबंध का रास्ता देख एक कोच ने तो दूसरे देश का हाथ भी थाम लिया, लेकिन भारतीय कुश्ती संघ और जोखिम उठाने को तैयार नहीं है। उसने साफ कर दिया है कि अगर खेल मंत्रालय ने तीनों विदेशी कोच के अनुबंध को हरी झंडी नहीं दी तो वे मदद के लिए निजी क्षेत्र से गुहार लगाएंगे।
कुश्ती संघ ने गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारियों के लिए ग्रीको रोमन में 1982 के वर्ल्ड चैंपियन जार्जियाई टीमो काजराशविली, महिला टीम के लिए रूस के इबरेक फर्नीव और फ्रीस्टाइल के लिए ईरानी कोच हुसैन करीमी को बिना विज्ञापन के अनुबंधित करने का प्रस्ताव खेल मंत्रालय को दिया। मंत्रालय ने साफ किया बिना विज्ञापन के कोच का अनुबंध नियमों का उल्लंघन है। इस प्रक्रिया को अपनाने के चलते कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेल निकल गए।
नतीजन 10 हजार डॉलर में आने वाले फर्नीव ने दूसरे देश का हाथ थाम लिया। इसके बाद महिला टीम के लिए कुश्ती संघ ने अमेरिकी एंड्रयु कुक का चयन किया। कुश्ती संघ ने मंत्रालय के निर्देश पर विज्ञापन भी निकाला और का नाम उसे भेज दिया।। 21 सितंबर साई के साथ बैठक में इन तीनों कोच के नाम को हरी झंडी भी मिल गई, लेकिन मंत्रालय ने एक बार फिर पूरी प्रक्रिया को नहीं अपनाने पर इन्हें मंजूरी नहीं दी है।
कुश्ती संघ का कहना है कि बैठक के बाद उन्होंने तीनों कोच को आश्वासन दिया था कि उन्हें दो सप्ताह के अंदर अनुबंध मिल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब इन विदेशी कोचेज ने कुश्ती संघ को अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने कहा है कि जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो वे भी दूसरे देशों से बात शुरू कर देंगे।
कुश्ती संघ को डर कि ये कोच गए तो नहीं मिलेंगे दूसरे
कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने मंत्रालय से इस बाबत बात भी की। अब कुश्ती संघ ने फैसला लिया है कि अगर मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिली तो निजी क्षेत्रों के आगे हाथ फैलाएंगे। कुश्ती संघ का मानना है कि अगर अब अनुबंध नहीं हुआ तो उन्हें अच्छे विदेशी कोच नहीं मिलेंगे जिसका सीधा असर ओलंपिक की तैयारियों पर पड़ेगा। ये तीनों कोच बेहद नामी हैं। इनका रिकॉर्ड काफी अच्छा है। वहीं मंत्रालय का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए बिना कोच के अनुबंध को हरी झंडी देना उनके लिए मुसीबत बनेगा।