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हैप्पी बर्थडेः सिर्फ ड्रेस के लिए कुश्ती को चुना था साक्षी मलिक ने

Sat, 03 Sep 2016 11:21 AM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 03 Sep 2016 11:21 AM IST
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how Sakshi reached to wrestling ring
साक्षी मलिक - फोटो : PTI

भारत के लिए रियो ओलंपिक में पहला ओलंपिक पदक जीतने वाली 23 वर्षीय साक्षी मलिक हरियाणा के रोहतक जिले की रहने वाली हैं। साक्षी के पहलवानी शुरू करने की कहानी बेहद रोचक है, आपको जानकर ताज्जुब होगा कि केवल पहलवानों की ड्रेस पसंद आने के कारण साक्षी ने पहलवानी को खेल के रूप में अपना लिया। साक्षी ने पहलवान बनने का सपना केवल इसलिए देखा क्योंकि उन्हें पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगती थी। 

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ड्रेस के लिए कुश्ती खेलने वाली साक्षी इतनी ऊंचाई तक पहुंचेगी, यह कभी उनके परिवार वालों ने भी नहीं सोचा था। कहीं भी बेटी को पहलवान बनाने में परिवार वाले थोड़ा हिचकते जरूर हैं, लेकिन साक्षी मलिक ने अपनी मां सुदेश के सामने खेलने की इच्छा जताई तो वे उसे लेकर रोहतक के छोटूराम स्टेडियम पहुंच गईं। 3 सितंबर 1992 को जन्मी साक्षी मलिक ने महज 12 साल की उम्र में कुश्ती शुरू कर दी थी। 
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साक्षी मलिक जब बड़ी हो रही थीं तो लोग उनके परिवार को कहते थे कि बेटी को पहलवानी ना सिखाएं क्योंकि उससे उनके कान बड़े हो जाएंगे और फिर शादी नहीं होगी। पहलवानों में कान बड़े हो जाना आम बात है। 
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कुश्ती से पहले जिम्नास्टिक खेलने को कहा गया साक्षी से

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साक्षी मलिक - फोटो : Getty

जब साक्षी की मां उन्हें छोटूराम स्टेडियम लेकर पहुंचीं तो उन्हें वहां जिम्नास्टिक खेलने के लिए कहा गया, लेकिन साक्षी ने साफ इंकार कर दिया। फिर उनकी मां उन्हें दूसरे एथलीट व अन्य कई खेलों के खिलाड़ियों के पास ले गईं, सबसे आखिर में वह साक्षी को रेसलिंग हाल में लेकर पहुंची। वहां साक्षी को पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी तो उसने कुश्ती खेलने की इच्छा जताई।

साक्षी की मां सुदेश बताती हैं कि उस समय साक्षी को पहलवानों की ड्रेस अच्छी लगी थी और उसने कहा था कि यह ड्रेस अच्छी है, इसलिए वह भी कुश्ती लड़ेगी। उस समय उनकी मां को लगा था कि बेटी की इच्छा है तो खेलने देते हैं, जब तक मन होगा खेलती रहेगी।

एक दिन साक्षी से उनकी मां ने कहा कि वह कोई भी काम करे उसे पूरी मेहनत से करे। चाहे पढ़ाई हो या कुश्ती। शायद उस दिन से साक्षी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसके बाद साक्षी ने बहुत छोटी उम्र में सब जूनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता। उस समय परिवार को भी यह महसूस होने लगा कि उनकी बेटी ने सही खेल चुना है। इसके बाद राष्ट्रमंडल खेलों में रजत और अब रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर साक्षी ने इतिहास रच दिया।

रियो में कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी को भारत सरकार ने देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वह हरियाणा की खेल रत्न जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी हैं। उन्हें पीवी सिंधू, दीपा कर्माकर और जीतू राय के साथ संयुक्त रूप से साल 2016 का खेल रत्न पुरस्कार दिया गया है।

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