फ्लैशबैक: एशियन गेम्स में प्रद्युम्न ने बढ़ाई थी तिरंगे की शान, 2 खेलों में गोल्ड जीत रचा था इतिहास
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दूसरा एशियाई खेल मनीला में 01 से 09 मई 1954 में खेला गया। जहां 8 देशों के 970 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। कुल 8 खेलों में 77 स्पर्धाएं हुई। इस एशियाई खेल में भारत के प्रद्युम्न सिंह ने तिरंगे की शान बढ़ाई थी।
भारतीयों एथलीटों ने दूसरे एशियाई खेलों में भी अपना स्वप्निल प्रदर्शन जारी रखा। प्रद्युमन सिंह बरार ने शॉटपुट (14.14 मीटर) में खेलों के रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतने के बाद डिस्कस थ्रो (43.37 मीटर) में भी गेम्स रिकॉर्ड के साथ सुनहरी सफलता हासिल की और तिरंगे की शान बढ़ा दी।
वह इन दोनों खेलों में पीला तमगा हासिल करने वाले पहले खिलाड़ी बने। खास बात यह रही कि भारतीय एथलीटों ने 5 स्वर्ण पदक जीते और सभी में नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। इसके अलावा 3 रजत और 6 कांस्य भी जीते।
पहली और आखिरी बार अंक प्रणाली
इन खेलों में पहली और आखिरी बार खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आंकलन अंकों के आधार पर किया गया। यह नियम सिर्फ तैराकी और एथलेटिक्स में ही लागू किया गया था। इसके बाद से इसे कभी लागू नहीं किया हया।
98 पदकों के (38 स्वर्ण, 36 रजत, 24 कांस्य) साथ तालिका में शीर्ष पर बना रहा जापान
17 पदक (5 स्वर्ण, 4 रजत, 8 कांस्य) लेकर तालिका में पांचवें स्थान पर रहा भारत