भारतीय पहलवानों के आगे पहाड़ सी चुनौती, गोल्ड के रास्ते में खड़े ईरान-चीन-जापान के सूरमा
एशियाई खेलों का आधिकारिक आगाज हो चुका है और पहले दिन ही देश के दिग्गज पहलवानों के सामने गोल्ड जीतने के लिए पहाड़ सी चुनौती सामने आ खड़ी हुई है। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार रियो ओलंपिक में कांस्य जीतने वाली साक्षी मलिक और कॉमनवेल्थ खेलों की स्वर्ण पदक विजेता विनेश को फाइनल में पहुंचने के लिए ईरान, चीन और जापान जैसे पहलवानों से पार पाना होगा। वहीं 65 किलो में बजरंग अगर उज्बेकिस्तान के पहलवान को हरा देते हैं तो फाइनल में तक की उनकी राह बिलकुल आसान है।
चारों दिग्गजों ने कभी नहीं जीता एशियाड गोल्ड
सुशील हों या फिर साक्षी या विनेश, बजरंग इन चारों ने ही एशियाई खेलों में कभी भी स्वर्ण पदक नहीं जीता है। सुशील 12 साल बाद एशियाई खेलों में उतरने जा रहे हैं। उनका पहला मुकाबला बहरीन के आदम बातीरोव के साथ है, लेकिन अगली बाउट उन्हें मोस्तफा होसैनखानी के साथ खेलनी है। उनके हॉफ जापान के यूपी फूजीनामी और चीनी, मंगोलियाई पहलवान भी हैं। वहीं 50 किलो में विनेश को शुरूआती मुकाबलों में चीनी सुन यान से खेलना है।
यह वही सुन यान हैं जिन्होंने रियो ओलंपिक में विनेश का पैर तोड़ा था। उन्हें प्रो रेसलिंग लीग में इस पहलवान के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। भारतीय कुश्ती टीम के कोच जगमिंदर का कहना है कि यह मिला जुला ड्रा है। बजरंग के लिए अच्छा है, लेकिन सुशील के सामने कड़ी चुनौती है।
हालांकि उनके पास इतना अनुभव है वह अपने दिन किसी को भी हरा सकते हैं। 57 किलो में संदीप तोमर को भी मिला जुला ड्रा मिला है। महिला टीम के कोच कुलदीप सिंह को उम्मीद है कि तीन या उससे अधिक पदक देश की झोली में उनकी पहलवान ला सकती हैं।