दीपिका का फोकस मानसिक साधना पर: भारतीय महिला तीरंदाज को टोक्यो ओलंपिक में पदक का इंतजार
- दीपिका ने 15 साल की उम्र में राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीता था
- सात बार तीरंदाजी विश्व कप में भाग लिया है और पांच पदक जीते हैं
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अपने तीसरे ओलंपिक खेलों में भाग लेने की तैयारियों में जुटीं भारत की नंबर एक महिला तीरंदाज दीपिका कुमारी इस खेल में ओलंपिक पदक का इंतजार समाप्त करने के लिए अपने खेल के मानसिक पहलू पर भी काम कर रही है। दीपिका ने 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीता था। तीरंदाजी विश्व कप में उन्होंने पांच पदक जीते हैं और इसके अलावा कई अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पदक हासिल किए हैं लेकिन वह अब तक ओलंपिक पदक हासिल करने में नाकाम रही हैं। दीपिका ने ग्वाटेमाला सिटी में विश्व कप के पहले चरण से पूर्व कहा, ‘आगामी ओलंपिक मेरे लिए अलग तरह के होंगे। मैं अपने विचारों पर नियंत्रण रखना सीख रही हूं। इसके साथ ही मैं अच्छा प्रदर्शन भी कर रही हूं।
लंदन और रियो में ले चुकी हैं हिस्सा
दीपिका ने पहली बार लंदन ओलंपिक 2012 में हिस्सा लिया था जहां वह व्यक्तिगत और टीम दोनों स्पर्धाओं में पहले दौर में बाहर हो गई थीं। इसके चार साल बाद रियो में दीपिका व्यक्तिगत वर्ग के अंतिम 16 में पहुंची थी जबकि टीम स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल में रूस से हार गईं थी। इस बार यदि तीरंदाज विश्व कप के तीसरे चरण में टीम कोटा हासिल नहीं कर पाते हैं तो दीपिका भारत से भाग लेने वाली अकेली तीरंदाज होगी।
कोरिया के न खेलने से आसानी
कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर के रद्द होने के बाद विश्व कप चरण एक पहली वैश्विक प्रतियोगिता है। हालांकि प्रतियोगिता में गत विजेता कोरिया की टीम नहीं होगी जिसका ओलंपिक के महिला वर्ग में दबदबा रहता है। दीपिका ने कहा कि यह ठीक है कि कोरिया खेलता तो प्रतियोगिता कड़ी होती लेकिन इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता क्योंकि यह उनका निर्णय है कि वे खेले या न खेलें। दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक के बारे में उन्होंने कहा कि तब मैं कुछ नहीं जानती थी। काफी छोटी थी, बस मैं तो खेलों का लुत्फ उठा रही थी।