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अवॉर्ड नहीं मिलने से नाराज तीरंदाजी कोच ने छोड़ा देश

Tue, 13 Aug 2019 09:54 PM IST
Rohit Ojha हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली Published by: Rohit Ojha Updated Tue, 13 Aug 2019 09:54 PM IST
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Angry Indian Archery coach JeevanJot Singh left the country due to non-award
भारतीय तीरंदाजी - फोटो : social media

द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए चुने जाने के बाद खेल मंत्रालय की ओर से नाम काटे जाने से नाराज भारतीय तीरंदाजी टीम के चीफ कोच जीवनजोत सिंह ने देश छोड़ दिया है।

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जीवनजोत ने अमर उजाला से कहा कि, 

उनके साथ न सिर्फ नाइंसाइफी हुई है बल्कि सार्वजनिक रूप से अपमान भी किया गया है। वह अब वापस नहीं आएंगे और कनाडा में रहकर तीरंदाजों को तैयार करेंगे।

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पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में कार्यरत जीवनजोत 2014 और 2018 के एशियाई खेलों में भारतीय तीरंदाजी टीम के कोच थे। उनकी अगुआई में कंपाउंड पुरुष तीरंदाजों ने स्वर्ण, महिलाओं ने रजत और अभिषेक वर्मा ने व्यक्तिगत में रजत पदक जीता था।

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इसके अलावा विश्व चैंपियनशिप में भी उनके संरक्षण में पदक जीते। इस प्रदर्शन के आधार पर जीवनजोत ने बीते वर्ष द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए आवेदन किया था। उनका चयन भी कर लिया गया, लेकिन कुछ दिन बाद मंत्रालय ने उनका नाम काट दिया।

दरअसल कुछ वर्ष पूर्व विश्व यूनिवर्सियाड में कांस्य पदक मैच के दौरान भारतीय टीम मुकाबला खेलने ही नहीं पहुंच पाई, जिसकी सारी जिम्मेदारी उनपर डाल दी गई। इसी आधार पर बनाकर उनका नाम काटा गया।

एक गलती की दो सजा क्यों

जीवनजोत का कहना है कि, विश्व यूनिवर्सियाड में हुए वाक्ये की सजा उन्हें तीरंदाजी संघ और एआईयू से मिल गई थी। उसके बाद भी वह लंबे समय तक टीम से जुड़े रहे और देश को पदक दिलाए। फिर एक गलती की दो सजा कैसे दी जा सकती है? वह किसी भी कीमत पर देश छोड़कर नहीं जाना चाहते थे। लेकिन इस घटना ने उन्हें मजबूर कर दिया और अंत में उन्हें कनाडा में शरण मिल गई।

वह कुछ दिन में पंजाबी यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दे देंगे। ब्रेंप्टन (कनाडा) में सिख गुरद्वारा कमेटी ने उन्हें जमीन दे दी है। यहां भारतीय मूल के कई बच्चे उनके पास ट्रेनिंग के लिए आ चुके हैं। वह अपने साथ रिकर्व और कंपाउंड उपकरण लाए हैं। इन्हीं के जरिए वह इन तीरंदाजों को तैयार करेंगे।

कैश अवॉर्ड तो दे दो - जीवनजोत कहते हैं कि वह अब कभी द्रोणाचार्य के लिए आवेदन नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने मंत्रालय से उनका कैश अवॉर्ड देने की गुहार लगाई है। मंत्रालय की ओर से पदक विजेताओं के साथ कोच को भी कैश अवॉर्ड दिया जाता है जो उन्हें नहीं मिला है। 
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