अमित पंघाल ने कहा- मुझे अवॉर्ड नहीं चाहिए, बस मेरे कोच को सम्मानित कीजिए
विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में शनिवार को सिल्वर मेडल जीत कर इतिहास रचने वाले भारतीय मुक्केबाज अमित पंघाल ने कहा है कि, मुझे कोई भी अवॉर्ड नहीं चाहिए, मैं बस यही चाहता हूं कि मेरे कोच अनिल धनकड़ को द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया जाए। उन्होंने ही मुझे तैयार किया। उनका सम्मान किया जाए।
उन्होंने कहा कि, मैं पुरस्कारों की परवाह नहीं करता लेकिन मुझे खुशी होगी अगर मेरे पूर्व कोच अनिल धनकड़ के नाम पर द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिये विचार किया जाए। उन्होंने शुरूआती वर्षों में मुझे ट्रेनिंग दी और अगर वह नहीं होते तो मैं आज ऐसा मुक्केबाज नहीं होता।
पंघाल ने कहा कि मैंने 2008 में मुक्केबाजी शुरू की थी और धनकड़ सर तब से मेरे लिये अहम बने रहे हैं। अब भी जब मुझे किसी मामले में मार्गदर्शन की जरूरत होती है तो मैं धनकड़ सर के पास जाता हूं। उन्हें पुरस्कार मिलने का मतलब मुझे पुरस्कार मिलना होगा। बल्कि मुझे ज्यादा खुशी होगी।
पैंतालीस वर्षीय धनकड़ कभी भी किसी राष्ट्रीय टीम से नहीं जुड़े हैं, लेकिन जब वह मुक्केबाज थे तो राष्ट्रीय स्तर के पदकधारी थे। उन्होंने अपने शिष्य के इस लगाव के बारे में कहा कि मैं 2005 से उसे जानता हूं। मेरे लिए वह परिवार की तरह है। मैं उसके परिवार वालों से काफी करीब हूं और वह मेरे बच्चे की तरह ही है।
भारतीय सेना के 23 वर्षीय नायब सूबेदार पंघाल पिछले दो वर्षों से शानदार फार्म में हैं। उन्होंने 49 किग्रा से 52 किग्रा में वजन वर्ग में खेलने का फैसला किया लेकिन इस बदलाव के बावजूद उनके प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ा।
उम्मीद तो स्वर्ण की लेकर आए थे
अमित पंघाल का पुरुष विश्व चैंपियनशिप में शानदार सफर रजत पदक के साथ समाप्त हुआ जिन्हें शनिवार को 52 किग्रा वर्ग के फाइनल में ओलंपिक चैंपियन उज्बेकिस्तान के शाखोबिदिन जोइरोव से 0-5 से हार मिली। रजत पदक प्राप्त करने के बाद अमित पंघाल ने कहा कि उन्हें पुरस्कार से नहीं बल्कि पदकों से प्यार है। अमित शनिवार को यहां जारी विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप के 52 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में हार कर रजत पदक तक ही सीमित रह गए।
विश्व चैंपियनशिप में यह किसी भी भारतीय पुरुष मुक्केबाजों का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। अमित से पहले कोई भी भारतीय पुरुष मुक्केबाज फाइनल तक भी नहीं पहुंच सका था। पंघाल को इस साल अर्जुन अवॉर्ड के लिए नहीं चुना गया था। पंघाल ने पदक जीतने के बाद अपने टि्वटर अकाउंट पर एक विडियो पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने कहा,
उम्मीद तो स्वर्ण की लेकर आए थे, लेकिन कुछ कमियां रहीं हैं जो मुकाबले में दिखीं, आगे के लिए उन पर काम करेंगे। उज्बेकिस्तान के इस मुक्केबाज को हम ओलिंपिक में अच्छी टक्कर देंगे। अवॉर्ड से ज्यादा मेरे लिए देश के लिए पदक जीतना ज्यादा जरूरी है। मुझे देश के लिए पदकों से प्यार है न कि अवॉर्ड से। अवॉर्ड मुझे दिए जाएं या ना दिए जाएं, इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता। मैं अपने देश के लिए पदक जीतता आया हूं और जीतता रहूंगा।
#SilverMedal #AIBAWorldBoxingChampionships #yekatrinburg #Russia देश वासियों के प्यार बना रहे।🇮🇳🇮🇳🇮🇳 जय हिंद। pic.twitter.com/W0KMtOS5P8
— Amit Panghal (@Boxerpanghal) September 21, 2019