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अमित पंघाल: भारतीय मुक्केबाजी का नया पोस्टर ब्वॉय

Mon, 23 Sep 2019 11:14 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: अंशुल तलमले Updated Mon, 23 Sep 2019 11:14 AM IST
सार

  • विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीत भारतीय मुक्केबाजी को दिलाई नई पहचान
  • 10 साल पहले विजेंदर कुमार ने कांसा जीत की थी शुरुआत
  • अमित पंघाल ने भारतीय मुक्केबाजी को पहुंचाया बुलंदियों पर

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Amit Panghal: New Poster boy of India Boxing, after Vijender Singh
अमित पंघाल - फोटो : ट्विटर

विस्तार

दिग्गज विजेंदर सिंह के बाद भारतीय पुरुष मुक्केबाजी को जिस चेहरे की तलाश थी वह अमित पंघाल के रूप में पूरी हो गई। हरियाणा के 23 वर्षीय पंघाल भले ही विश्व चैंपियन बनने से चूक गए, लेकिन 45 साल के इतिहास में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचकर उन्होंने नई इबारत लिख डाली।

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विजेंदर ने 10 साल पहले कांसा जीतकर जो शुरुआत की थी, अमित ने उससे एक कदम आगे जाकर भारतीय मुक्केबाजी को फिर नई उड़ान दे दी। 2017 एशियाई चैंपियनशिप में 49 किग्रा वर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक के रूप में अपना पहला पदक जीतने वाले अमित दो साल में ही भारतीय मुक्केबाजी के नए पोस्टर ब्वॉय बन गए।
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एशियाई खेलों और एशियाई चैंपियन अमित अब टोक्यो ओलंपिक में देश की पदक की सबसे बड़ी उम्मीद बन गए हैं। विजेंदर 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांसा जीतने वाले देश के एकमात्र पुरुष मुक्केबाज हैं। अब अमित से ओलंपिक में भी विजेंदर से आगे जाने की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने मात्र आठ माह में अपने नए 52 किग्रा भार वर्ग में यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली।
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अमित के इस प्रदर्शन से भारत ओवर ऑल प्रदर्शन में कनाडा को पीछे छोड़कर 40वें नबर पर पहुंच गया। भारत के विश्व चैंपियनशिप में एक रजत और पांच कांस्य सहित कुल छह पदक हो गए हैं।

मेरी जगह कोच को पुरस्कृत करें

Amit Panghal: New Poster boy of India Boxing, after Vijender Singh
अमित पंघाल - फोटो : ट्विटर

अमित पंघाल (52 किग्रा) का कहना है कि उन्हें व्यक्तिगत सम्मान नहीं चाहिए, लेकिन वह चाहते हैं कि उनके पूर्व कोच अनिल धनकड़ को सम्मानित किया जाए। अर्जुन पुरस्कार के लिए उनके नाम की अनदेखी की गई क्योंकि 2012 में चिकन पाक्स के उपचार के लिए ली गई दवाई से वह डोपिंग उल्लंघन कर बैठे थे। डोपिंग परीक्षण में विफल होने के कारण उन पर एक साल का प्रतिबंध भी लगा था।

उन्होंने कहा, ‘मैं पुरस्कारों की परवाह नहीं करता लेकिन मुझे खुशी होगी अगर मेरे पूर्व कोच धनकड़ के नाम पर द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए विचार किया जाए। मैंने 2008 में मुक्केबाजी शुरू की थी और धनकड़ सर तब से मेरे लिए अहम बने रहे हैं। उन्हें पुरस्कार मिलने का मतलब मुझे पुरस्कार मिलना होगा। बल्कि मुझे ज्यादा खुशी होगी।’

अब ओलंपिक टिकट का लक्ष्य

Amit Panghal: New Poster boy of India Boxing, after Vijender Singh
अमित पंघाल - फोटो : social media

भारतीय सेना के नायब सूबेदार पंघाल पिछले दो वर्षों से शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने 49 किग्रा से 52 किग्रा में वजन वर्ग में खेलने का फैसला किया लेकिन इस बदलाव के बावजूद उनके प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ा। अब वह अगले साल फरवरी में चीन में होने वाले एशियाई ओलंपिक क्वालिफाइंग टूर्नामेंट में भाग लेंगे। उन्होंने कहा, ‘यह एक और चुनौती है और मैं इसमें बेहतर करने की कोशिश करूंगा।’

राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता रहे हैं धनकड़

45 वर्षीय धनकड़ कभी भी किसी राष्ट्रीय टीम से नहीं जुड़े हैं लेकिन जब वह मुक्केबाज थे तो राष्ट्रीय स्तर के पदकधारी थे। उन्होंने अपने शिष्य के इस लगाव के बारे में कहा, ‘मैं 2005 से उसे जानता हूं। मेरे लिए वह परिवार की तरह है। मैं उसके परिवार वालों से काफी करीब हूं और वह मेरे बच्चे की तरह ही है।’

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