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देश को मिलेगा दूसरा ‘मिल्खा सिंह’
संजीव पंगोत्रा/चंडीगढ़
Updated Mon, 11 Feb 2013 02:13 PM IST
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मैराथन का नाम सुनते ही जहां बड़े-बड़े खिलाड़ियों के पसीने छूटने लगते हैं, वहीं नौ वर्षीय कर्णवीर बिना रुके और थके इस बाधा को आसानी से पार कर लेता है। उसे देखकर बड़े-बड़े एथलीट कोच भी यह कहे बिना नहीं रुकते कि देश को एक और मिल्खा सिंह मिलेगा, जो ओलंपिक में देश का नाम रोशन करेगा।
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कर्ण की प्रतिभा का यही जलवा रविवार को सुखना लेक पर सुबह आठ बजे हुई मैराथन में भी देखने को मिला। कर्ण ने यहां सैकड़ों प्रतिभागियों को पछाड़कर अंडर 15 वर्ग में पहला स्थान हासिल किया। आयोजक रयात बहारा ग्रुप की ओर से उसे 11 सौ रुपये नगद और बैग देकर सम्मानित किया गया। आयोजक कर्ण की प्रतिभा के इतने कायल हुए कि उन्होंने उसे हर इवेंट में उसे बुलाने का फैसला लिया है।
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हिमाचल के ऊना निवासी ड्राइवर रणजोत का बेटा कर्णवीर अभी चौथी कक्षा में ही है, लेकिन एथलीट में उसकी प्रतिभा का लोहा बड़े-बड़े मान रहे हैं। रणजोत खुद भी एक एथलीट रह चुके हैं और अब अपने बेटे को ‘मिल्खा सिंह’ की तरह अंतरराष्ट्रीय एथलीट बनाना चाहते हैं। पिछले 6 महीने से वे इसे ट्रेनिंग दे रहे हैं। वह अपने बेटे को रोजाना दस किलोमीटर रनिंग का अभ्यास कराते हैं।
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दूसरे हांफे, लेकिन कर्णवीर को नहीं कोई थकान
सुखना झील से शुरू हुई यह मैराथन सेक्टर 17 मटका चौक से होते हुए करीब 10 किलोमीटर का सफर तय करके वापिस झील पर ही समाप्त हुई। मैराथन के दौरान जहां कई स्टूडेंट आधा रास्ता भी तय नहीं कर पाए, वहीं कर्णवीर ने बिना रुके और थके इसे पूरा कर लिया।