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ध्यानचंद की इस मांग पर हैरान रह गए थे रेफरी

Thu, 31 Aug 2017 04:37 PM IST
amarujal.com, Presented By: आसिफ़ इक़बाल
amarujal.com, Presented By: आसिफ़ इक़बाल Updated Thu, 31 Aug 2017 04:37 PM IST
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NATIONAL SPORTS DAY SPECIAL_WHILE REFEREE WAS was surprised at the demand of major dhyanchand
मेजर ध्यानचंद
आज राष्ट्रीय खेल दिवस है, यानी आज के ही दिन 29 अगस्त 1905 को हॉकी के महान जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्म हुआ था। अपने कदमों की रफ्तार और हॉकी की तेजी से उन्होंने दुनिया भर के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ा।
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उनके खेल की दीवानगी भारत में ही नहीं, बल्कि विश्वभर में छाई रही। क्रिकेट में सर डॉन ब्रैडमैन और फुटबॉल में पेले को जो मुकाम हासिल है, हॉकी में ध्यानचंद का वही स्थान है। अंतरराष्ट्रीय हॉकी से 400 ज्यादा गोल करने वाले ध्यानचंद अपने उसूलों और नियमों के भी काफी पक्के थे।
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बताया जाता है कि एक मैच में लगातार कईं प्रयासों के बाद भी ध्यानचंद गोल करने में नाकाम रहे। ऐसा उनके साथ पहले कभी नहीं हुआ था। वो बार-बार कोशिश करते पर गेंद गोल पोस्ट के अंदर नहीं डाल पाते।
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ध्यानचंद के खेल पर न तो दर्शकों और न ही किसी खिलाड़ी को शक था। आखिरकार उन्होंने गोल पोस्ट की लम्बाई को लेकर रेफरी से शिकायत की। उनकी इस शिकायत पर सब हैरान थे। हॉकी के खेल इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था।

ध्यानचंद की शिकायत पर जब गोल पोस्ट को नापा गया, तो नियमों के मुताबिक गोल पोस्ट छोटा था। हालांकि यह मैच कौन सा था, ये स्पष्ट नहीं हो पाया है। कहते है कि जब ध्यानचंद मैदान में उतरते थे तो गेंद उनकी स्टिक से चिपकी रहती थी।

इसी तरह हॉलैंड में विरोधी टीम ने मेजर की हॉकी पर आपत्ति जताई, जिस पर मैच रेफरी ने उनकी हॉकी स्टिक तोड़कर देखी,कि कहीं उसके अन्दर चुम्बक तो नहीं है।

 

तो इसलिए हॉकी के जादूगर हैं मेजर ध्यानचंद...

1- ध्यानचंद के जन्मदिन पर ही भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है.

2- ध्यानचंद ने हॉकी में भारत को 1928, 1932 और 1936 ओलम्पिक में तीन गोल्ड मेडल दिलाए.

3- 1928 एम्स्टरडैम ओलम्पिक में उन्होंने 14 गोल किए और यहीं से उन्हें हॉकी का महान जादूगर कहा जाने लगा।

4- ध्यानचंद ने अपने करियर में 400 से ज्यादा गोल किए.

5- क्रिकेट के महान खिलाड़ी डॉन ब्रेडमैन मेजर ध्यानचंद के जबरदस्त प्रशंसक थे.

6- ध्यानचंद चांदनी रात में हॉकी का अभ्यास करते थे, इसलिए साथी खिलाड़ियों ने उनका नाम 'चंद' रख दिया था।

7- 1936 में बर्लिन ओलम्पिक के बाद जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर ने ध्यानचंद को जर्मन सेना में भर्ती होने और नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन ध्यानचंद से ठुकरा दिया.

8- 1933 में बीटन कप में हुए कलकत्ता कस्टम्स और झांसी हीरोज के बीच हुए मैच को ध्यानचंद सबसे बढ़िया मैच मानते थे।

8- महान हॉकी खिलाड़ी के रूप में ऑस्ट्रेलिया के विएना में सरकार ने उनकी मूर्ति लगाई है।

10- भारतीय खेलों में अहम योगदान के लिए लाइफटाइम अवार्ड मेजर ध्यान चंद के नाम से दिया जाता है 

ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां - https://goo.gl/j6S1ic
 
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