फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   Lost His Father, Drove a Cab, Joined Army: Salman’s Journey to Asian Games Rowing Medal

एशियन गेम्स: पिता को खोया-कैब भी चलाई, अब बन गए पदक विजेता; अमेठी के सलमान के लिए संजीवनी है एशियाड पदक

Fri, 25 Sep 2026 07:37 AM IST
हेमंत रस्तोगी अमर उजाला ब्यूरो, आइची नागोया
अमर उजाला ब्यूरो, आइची नागोया Published by: हेमंत रस्तोगी Updated Fri, 25 Sep 2026 07:37 AM IST
सार

अमेठी के सलमान ने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए सेना में भर्ती होने से पहले संघर्ष किया और दो साल कैब भी चलाई। रोइंग छोड़ने के चार साल बाद मेजर नागेंद्र हुड्डा की सलाह पर उन्होंने वापसी की। एशियाड में सतनाम के साथ डबल स्कल्स में कांस्य जीतकर सलमान ने संघर्ष को सफलता में बदला।

विज्ञापन
Lost His Father, Drove a Cab, Joined Army: Salman’s Journey to Asian Games Rowing Medal
ब्रोंज मेडल के साथ सतनाम (बाएं) और सलमान (दाएं)

विस्तार

मर जाएंगे पर बगैर मेडल वापस नहीं आएंगे, रोइंग की डबल स्कल्स स्पर्धा शुरू होने से पहले सलमान ने अपनी साथी सतनाम से यही कहा। सलमान आर्मी से हैं और सतनाम नेवी से और पहले कभी दोनों एक साथ नाव पर नहीं बैठे थे। अमेठी में पड़ते गांव ढिंगाई खैराना के रहने वाले सलमान के दिमाग में यही था अगर यहां मेडल नहीं आया तो उन्हें रोइंग फिर न छोड़नी पड़ जाए, लेकिन 1200 तक शीर्ष पर रहने के बाद दोनों कांस्य पाने में सफल रहे। पदक के साथ सलमान और सतनाम।
विज्ञापन


सलमान के लिए यह पदक संजीवनी से कम नहीं है। वह अमर उजाला को बताते हैं कि चार साल पहले उन्होंने रोइंग छोड़ दी थी, लेकिन मेजर नागेंद्र हुड्डा के समझाने पर उन्होंने वापसी की। आज सलमान के मुंह से नागेंद्र के सम्मान में शब्द कम पड़ रहे थे। उन्हें रेस के दौरान अपने पिता भी आए।
विज्ञापन


2016 में उनका डेंगू से इंतकाल हो गया था और उनकी इच्छा थी कि बेटा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करे। पिता के इंतकाल के बाद उनके परिवार को मेवात जिला छोड़ वापस अमेठी आना पड़ा। दो साल उन्होंने दिल्ली में उबर कैब चलाई, लेकिन 2018 में वह सेना में भर्ती होने में सफल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


पदक जीतने के बाद फूट-फूट कर रोए
सलमान पदक जीतने के बाद फूट-फूट कर रोए। वह कहते हैं कि उन्होंने जिंदगी भर संघर्ष किया है। उनके पिता मोहम्मद कासिम खान मेवात में पड़ते ताउडू में ट्रक की बॉडी बनाते थे। उनके जाने के बाद चीजें बदल गईं। पिता के रहते उन्होंने सेना में भर्ती के लिए परीक्षा दी थी। 2018 में जब वह कैब चला रहे थे तो एक दोस्त ने सेना में भर्ती के बारे में बताया। वह सेना में जाने में सफल रहे, जहां 2019 में उन्होंने रोइंग शुरू की।


हैंडबॉल खेलते थे सतनाम, बने रोइंग विजेता
सतनाम का यह लगातार दूसरा एशियाड पदक है। सतनाम 2016 तक हैंडबॉल खेलते थे। वह पंजाब के लिए राष्ट्रीय चैंपियनशिप भी खेले, लेकिन रोइंग खिलाड़ी स्वर्ण सिंह से प्रेरित होकर उन्होंने रोइंग शुरू की। नेवी में उन्होंने इस खेल में जड़ें जमाईं। वह कहते हैं कि जिस तरह अंतिम क्षणों में अदला-बदली हुई, उस लिहाज से यह पदक उनके लिए बड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed