राज्य खेल फुटबॉल में फिर शर्मसार हुआ उत्तराखंड, पिछले 18 वर्षों में एक बार भी नहीं हुआ ऐसा
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राज्य खेल फुटबॉल में एक बार फिर उत्तराखंड को शर्मसार होना पड़ा है। उड़ीसा के कटक में आयोजित अंडर-19 बीसी रॉय नेशनल फुटबॉल चैंपियनशिप में उत्तराखंड को अपने तीनों मुकाबलों में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। राज्य गठन के बाद से कभी भी उत्तराखंड की टीम क्वालिफाइंग राउंड तक पहुंचने में कामयाब नहीं हो पाई है।
प्रतियोगिता में खेले गए तीन मुकाबलों में उत्तराखंड ने केवल एक गोल किया। जबकि विरोधीटीमों ने 15 गोल दागकर टीम को कड़ी शिकस्त दी। उत्तराखंड को पहले मुकाबले में मिजोरम ने 5-0, दूसरे मुकाबले में केरल ने 5-0 और तीसरे मुकाबले में छत्तीसगढ़ ने 5-1 से हराया। उत्तराखंड की टीम इससे पहले सबसे अधिक 54 गोल खाने का अनचाहा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर चुकी है।
चयन ट्रायल न कोचिंग कैंप
प्रदेश की फुटबॉल टीम के चयन के लिए जिलों में चयन ट्रायल तक नहीं लिए जाते। वहीं, कई खिलाड़ियों को बिना कैंप टीम में शामिल कर लिया गया। ऐसे में कई बेहतर फुटबॉलरों को राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका ही नहीं मिल पाता है।
खेल मंत्री और विभाग मौन
प्रदेश में राज्य खेल की दुर्दशा पर खेल मंत्री और खेल विभाग भी चुप्पी साधे हुए हैं। टीम चयन से लेकर खिलाड़ियों को भेजने तक में एसोसिएशन की मनमानी पर कई बार सवाल उठ चुके हैं, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। कुछ समय पूर्व खेल मंत्री अरविंद पांडेय ने फुटबॉल एसोसिएशन की स्थिति सुधारने और एक सप्ताह के भीतर दूसरी बैठक बुलाने का दावा किया था, हालांकि उनका यह दावा भी हवाई ही निकला। यही कारण है कि राज्य में फुटबॉल एसोसिएशन जमकर मनमानी कर रही है। इसका खामियाजा राज्य खेल और फुटबालरों को भुगतना पड़ रहा है।
जिन अच्छे खिलाड़ियों का चयन हुआ था, वह सभी मेडिकल में ओवरएज निकल गए। बाद में कैंप में शामिल 30 में से अन्य खिलाड़ियों को खेलने के लिए भेजना पड़ा। इससे टीम अच्छी नहीं बन पाई। यही कारण है कि टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई।
- देवेंद्र राणा, संयुक्त सचिव, उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन