{"_id":"5bd9f0b2bdec2269377f7686","slug":"system-s-negligence-broke-women-players-of-basketball-dream","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिस्टम की लापरवाही ने तोड़ा महिला खिलाड़ियों का सपना, कोच को टहलाते रहे यूनिवर्सिटी के अफसर","category":{"title":"Local Sports","title_hn":"स्थानीय खेल","slug":"local-sports"}}
सिस्टम की लापरवाही ने तोड़ा महिला खिलाड़ियों का सपना, कोच को टहलाते रहे यूनिवर्सिटी के अफसर
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 31 Oct 2018 11:43 PM IST
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डेमो पिक
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर (सीएसजेएमयू) के सिस्टम ने बास्केटबॉल की 13 महिला खिलाड़ियों का सपना तोड़ दिया। इन खिलाड़ियों को अंतरविश्वविद्याललीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए मंगलवार रात गुरुग्राम जाना था। दो माह से इन खिलाड़ियों के खर्चे की फाइल विश्वविद्यालय के वित्त विभाग में ही दबी रही। कोच बार-बार विभाग में गुहार लगाते रहे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मंगलवार को इसकी जानकारी कुलपति को हुई तो उन्होंने तत्काल फाइलें मंगवाकर धनराशि स्वीकृत तो कर दी लेकिन तबतक काफी देर हो चुकी थी। महिला खिलाड़ी प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए गुरुग्राम नहीं जा पाई।
इन खिलाड़ियों का पहला मैच बुधवार रात आठ बजे से था। टीम के न जा पाने की खबर विश्वविद्यालय में फैली तो सब एक-दूसरे पर इल्जाम लगाने लगे। विश्वविद्यालय के क्रीड़ाधिकारी डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि छात्राओं के चयन और टीम जाने के लिए खर्च का पूरा ब्योरा वित्त विभाग को दो माह पहले ही भेजा जा चुका था। अब वहां से क्यों रुका, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
फाइल पास कराने के लिए भटकते रहे कोच
डीएवी के क्रीड़ाधिकारी डॉ. राजीव को टीम का कोच बनाया गया था। उन्होंने बताया कि कई दिनों से वह बजट पास कराने के लिए विश्वविद्यालय का चक्कर लगा रहे थे। मंगलवार शाम पांच बजे तक वह विश्वविद्यालय में ही अधिकारियों से मिलते रहे लेकिन कहीं भी सही जवाब नहीं मिला। करीब सात बजे उन्हें जानकारी मिली कि बजट स्वीकृत हो चुका है तबतक काफी देर हो चुकी थी।
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बार-बार कोच को फोन करती रहीं खिलाड़ी
डॉ. राजीव ने बताया कि बुधवार रात आठ बजे खिलाड़ियों का पहला मैच गुरुग्राम के एमिटी यूनिवर्सिटी में था। छात्राएं मंगलवार से लेकर बुधवार तक बार-बार फोन करती रहीं। सभी ने मैच के लिए दो माह से काफी तैयारी कर रखी थी। रेगुलर प्रैक्टिस करती थीं।
वीसी बोलीं, आगे ऐसा न हो इसका पूरा ख्याल रहेगा
कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने टीम न जा पाने पर दुख जाहिर किया। उन्होंने बताया कि मंगलवार को जैसे ही उन्हें इसकी जानकारी हुई उन्होंने वित्त नियंत्रक को बुलाकर बजट को मंजूर कर दिया। इसके पहले टीम कोच को खुद के खर्च से टीम ले जाने के लिए कहा गया था। वापस आने पर उन्हें विवि से पैसे लौटा दिए जाते लेकिन पता नहीं क्यों ऐसा नहीं हो पाया। फाइलें वित्त विभाग में क्यों फंस रही हैं इसकी जानकारी ली जा रही है। आगे से इसका पूरा ख्याल रखा जाएगा कि खिलाड़ियों का नुकसान न हो।
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इन खिलाड़ियों का पहला मैच बुधवार रात आठ बजे से था। टीम के न जा पाने की खबर विश्वविद्यालय में फैली तो सब एक-दूसरे पर इल्जाम लगाने लगे। विश्वविद्यालय के क्रीड़ाधिकारी डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि छात्राओं के चयन और टीम जाने के लिए खर्च का पूरा ब्योरा वित्त विभाग को दो माह पहले ही भेजा जा चुका था। अब वहां से क्यों रुका, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
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फाइल पास कराने के लिए भटकते रहे कोच
डीएवी के क्रीड़ाधिकारी डॉ. राजीव को टीम का कोच बनाया गया था। उन्होंने बताया कि कई दिनों से वह बजट पास कराने के लिए विश्वविद्यालय का चक्कर लगा रहे थे। मंगलवार शाम पांच बजे तक वह विश्वविद्यालय में ही अधिकारियों से मिलते रहे लेकिन कहीं भी सही जवाब नहीं मिला। करीब सात बजे उन्हें जानकारी मिली कि बजट स्वीकृत हो चुका है तबतक काफी देर हो चुकी थी।
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बार-बार कोच को फोन करती रहीं खिलाड़ी
डॉ. राजीव ने बताया कि बुधवार रात आठ बजे खिलाड़ियों का पहला मैच गुरुग्राम के एमिटी यूनिवर्सिटी में था। छात्राएं मंगलवार से लेकर बुधवार तक बार-बार फोन करती रहीं। सभी ने मैच के लिए दो माह से काफी तैयारी कर रखी थी। रेगुलर प्रैक्टिस करती थीं।
वीसी बोलीं, आगे ऐसा न हो इसका पूरा ख्याल रहेगा
कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने टीम न जा पाने पर दुख जाहिर किया। उन्होंने बताया कि मंगलवार को जैसे ही उन्हें इसकी जानकारी हुई उन्होंने वित्त नियंत्रक को बुलाकर बजट को मंजूर कर दिया। इसके पहले टीम कोच को खुद के खर्च से टीम ले जाने के लिए कहा गया था। वापस आने पर उन्हें विवि से पैसे लौटा दिए जाते लेकिन पता नहीं क्यों ऐसा नहीं हो पाया। फाइलें वित्त विभाग में क्यों फंस रही हैं इसकी जानकारी ली जा रही है। आगे से इसका पूरा ख्याल रखा जाएगा कि खिलाड़ियों का नुकसान न हो।