मिशन ओलंपिक : क्रांतिधरा पर शुरू हुई पहलवानों की कदमताल, कुश्ती के दांव-पेच सीख रहे खिलाड़ी
कॉमनवेल्थ गेम्स हो या फिर एशियन गेम्स, देश के पहलवानों ने खुद को साबित किया है। अब पहलवानों का लक्ष्य ओलंपिक में तिरंगे का मान बढ़ाना है। इसके लिए रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने भी तैयारी शुरू कर दी है। दो साल में फेडरेशन टाटा ग्रुप के साथ मिलकर 100 ऐसे पहलवान तैयार करेगी, जिनमें से 2020 की ओलंपिक कुश्ती टीम का चयन होगा। मिशन ओलंपिक के लिए क्रांतिधरा पर भी पहलवानों की कदमताल शुरू हो गई है। सीसीएसयू के रुस्तम-ए-जमा दारा सिंह कुश्ती हॉल में पहलवान सुबह से लेकर शाम तक अभ्यास कर रहे हैं।
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में पिछले दिनों संपन्न हुई अंडर-23 रेसलिंग चैंपियनशिप के दौरान खेल निदेशकों ने भी शिरकत की थी। चैंपियनशिप में युवा पहलवानों ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसके बाद कुश्ती के बेहतर भविष्य की संभावना जताई जाने लगी। यहां तक कहा गया कि अगर निजी बड़ी कंपनियां खेलों में सहयोग करें तो 2020 के ओलंपिक में पदकों की स्थिति सुधर सकती है। इसी दौरान टाटा समूह ने कुश्ती का दायित्व संभालने की घोषणा कर दी। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने मौके पर ही इसका एलान किया। सूत्रों के मुताबिक टाटा समूह ने 15 करोड़ रुपये की पहली किश्त भी जारी कर दी है।
छिपी प्रतिभाओं को मिलेगा मंच
इस मुहिम से गांव और कस्बों में छिपी प्रतिभाओं को भी मंच मिलने की उम्मीद जगी है। ट्रायल की मदद से जनपद स्तर पर कुश्ती के खिलाड़ी तैयार होंगे। इसके बाद मंडल स्तर और फिर प्रदेश स्तर पर टीम तैयार होगी। इन सब के बाद नेशनल ट्रायल होंगे और पूरे देश से 100 कुश्ती खिलाड़ी चुने जाएंगे। हर खिलाड़ी को तैयार करने में बराबर की धनराशि खर्च होगी।
जूनियर वर्ग पर रहेगा जोर
सब जूनियर, जूनियर, अंडर-23 और सीनियर वर्ग में पूरे देश से 100 खिलाड़ियों का चयन होना है। इसमें भी चयनकर्ताओं का पूरा फोकस सब-जूनियर और जूनियर पर रहेगा। फेडरेशन का मानना है कि अगर खिलाड़ियों की नींव मजबूत हो तो परिणाम बेहतर ही रहेंगे।
खेल के लिए संकेत अच्छे
जिस तरह के संकेत मिले हैं, वह कुश्ती के बेहतर भविष्य की ओर इशारा कर रहे हैं। पहलवानों में इसको लेकर उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। सबसे बड़ी बात है कि छिपी प्रतिभाओं को भी मंच मिलेगा।
- जबर सिंह सोम, कुश्ती कोच
प्रतिभाओं की कमी नहीं
पहलवानों को अगर सुविधाएं मिलें तो वह मेडल की झड़ी लगा सकते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुश्ती प्रतिभाओं की भरमार है। योजना परवान चढ़ी तो आने वाले समय में पदकों के ढेर लग जाएंगे।
- अलका तोमर, अर्जुन अवार्डी/अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
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