देश को मेडल दिलाया, खेल कोटे में नौकरी का नंबर न आया
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम चमकाने वाले खिलाड़ियों पर सरकार की अनदेखी भारी पड़ रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परशुराम अवार्ड विजेता तक खिलाड़ी को खेल कोटे में नौकरी नहीं मिली है।
संजय यादव चार गेम्स में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को मेडल दिलवा चुके हैं। उन्हें मलाल है कि देश के लिए मेडल लाने के बावजूद उन्हें सरकार की अनदेखी का सामना करना पड़ा। वे कमीशन टेस्ट पास कर वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बगला (मंडी) में बतौर डीपीई सेवाएं दे रहे हैं।
मंडी जिले के सुंदरनगर के संजय यादव हिमाचल के एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चार बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और देश के लिए मेडल ला चुके हैं।
किक बॉक्सिंग में वे देश के दस बेहतर अंतरराष्ट्रीय रेफरियों में शुमार है। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली किक बॉक्सिंग की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं। संजय मेसिडोनिया के स्कोबजे में हुई वर्ल्ड वेटरन रेसलिंग प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं।
इसमें चौथा स्थान हासिल किया था। इसके अलावा 2010 में रशिया में हुई मिक्स मार्शल आर्ट की वर्ल्ड प्रतियोगिता में देश को रजत पदक दिला चुके हैं। जयपुर में हुए अंतरराष्ट्रीय जूडो कॉमनवेल्थ गेम्स में संजय ने कांस्य पदक जीता था।
संजय ने वुशू खेल में 2010 में हांगकांग में हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता है। 2012 में उन्हें परशुराम अवार्ड से नवाजा गया। मार्शल ऑर्ट में वे परशुराम अवार्ड पाने वाले प्रदेश के पहले खिलाड़ी हैं।
संजय यादव का कहना है कि उन्होंने प्रदेश और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है, लेकिन आजतक उन्हें स्पोर्ट्स कोटे में नौकरी नहीं दी गई है।