रुपये की गिरावट का असर खेल पर, 10 से 15 प्रतिशत बढ़े निर्यात किए जाने वाले उत्पादों के दाम
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आई गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। इसका असर खेल कारोबार पर हो रहा है। आलम यह है कि चीन से आयात होने वाली खेल सामग्री के दाम 10 से 15 फीसदी बढ़ गए हैं।
खेल सामग्री निर्माता कंपनियां चीन से कच्चा माल आयात करती हैं। शहर में भी कच्चे माल की बड़ी खेप मंगाई जाती है। जिससे माल तैयार कर बाजार में उतारा जाता है। डालर के मुकाबले रुपये में आ रही गिरावट से कच्चा माल महंगा होने का असर उत्पाद पर पड़ा रहा है। जानकारों की मानें तो खेल के कई उत्पाद के दामों में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि खरीददारों को यह नहीं भा रहा है। इससे खेल सामग्री विक्रेताओं में खलबली है।
क्या कहते हैं कारोबारी
डॉलर के मुकाबले रुपये में आई गिरावट से बाजार बुरी तरह प्रभावित है। स्टॉक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। मजबूरी में पुराने रेटों पर बिक्री करनी पड़ रही है। हालांकि निकट भविष्य में खिलाड़ियों को जेब ढीली करनी होगी। - रविन्दर सिंह, खेल सामग्री कारोबारी
यूएसडी रेट बढ़ने से खेल सामग्री महंगी हुई है। हालांकि ग्राहक इससे संतुष्ट नहीं हैं और पुराने दामों पर ही सामान खरीदना चाह रहे हैं। इसका सीधा नुकसान कारोबारियों को उठाना पड़ रहा है। - गगन पिपलानी, खेल सामग्री कारोबारी
ट्रैक सूट से लेकर क्रिकेट किट बैग तक महंगा
रुपये में गिरावट के चलते जिस ट्रैक सूट की कीमत 550 रुपये थी। अब 580 से 600 रुपये तक पहुंच गई है। इसकी वजह चीन से आयात होने वाले कपड़े (लैकरा, सुपर पॉली, एनएस) के दामों में इजाफा बताई जा रही है। किलोग्राम में बिकने वाले इस कपड़े के रेट में 20 से 30 रुपये प्रति मीटर वृद्धि हुई है।
बाजार में दिख रही 40 प्रतिशत तक महंगाई
बैडमिंटन रैकेट, शटल कॉक, स्वीमिंग कास्ट्यूम, स्कीपिंग रोप, योगा मैट सरीखी खेल सामग्री काफी मात्रा में चीन से आयात की जाती हैं। स्वीमिंग कास्ट्यूम का सबसे अधिक निर्माण चीन में होता है। ये भारत में नहीं बनाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त किट बैग में इस्तेमाल होने वाला कपड़ा भी चीन से आयात किया जाता है। ऐसे उत्पाद बाजार में 40 फीसदी तक महंगे हो गए हैं।
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