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जीत की चाह में प्रतिबंधित दवाओं का धड़ल्ले से हो रहा सेवन, तस्वीरें खोल रहीं पोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 11 Nov 2018 04:45 PM IST
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मेरठ न्यूज
मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में शनिवार को आयोजित दो दिवसीय मंडलस्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता के पहले दिन स्टेरॉयड का जमकर इस्तेमाल हुआ। प्रतिबंध के बावजूद खिलाड़ियों द्वारा मैदान में सिरिंज और प्रतिबंधित दवाएं ले गए। स्टेडियम के शौचालय में कई दर्जन सिरिंज के रैपर और खाली शीशियां मिलीं। ऐसे में खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर भी खेल अधिकारी चिंता जता रहे हैं।
खेल अधिकारियों द्वारा एथलेटिक खिलाड़ियों के लिए स्टेरॉयड पर रोक लगाने के बावजूद प्रतिबंधित दवाओं का खूब सेवन हो रहा है। युवा खिलाड़ी हर हाल में अपनी स्पर्धाओं में जीत चाहते हैं। ऐसे में खिलाड़ी शरीर को नुकसान देने वाली प्रतिबंधित दवाओं से भी परहेज नही कर रहे हैं।
स्टेरॉयड से खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर रहे हैं। ऐसे में खिलाड़ी अपनी स्पर्धाओं में जीत तो हासिल कर सकते हैं। लेकिन शरीर को स्टेरॉयड से जबरदस्त नुकसान होता है। कैलाश प्रकाश स्टेडियम के पुरुष शौचालय में बरामद कई दर्जन सिरिंज और स्टेरॉयड के इंजेक्शन खिलाड़ियों के प्रतिबंधित दवाओं के लेने के सुबूत के लिये काफी हैं। ऐसे में खेल विभाग पर सवालिया निशान उठना लाजिमी है कि खिलाड़ी स्टेडियम परिसर में प्रतिबंधित दवाएं कैसे ले गए।
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खेल अधिकारियों द्वारा एथलेटिक खिलाड़ियों के लिए स्टेरॉयड पर रोक लगाने के बावजूद प्रतिबंधित दवाओं का खूब सेवन हो रहा है। युवा खिलाड़ी हर हाल में अपनी स्पर्धाओं में जीत चाहते हैं। ऐसे में खिलाड़ी शरीर को नुकसान देने वाली प्रतिबंधित दवाओं से भी परहेज नही कर रहे हैं।
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स्टेरॉयड से खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर रहे हैं। ऐसे में खिलाड़ी अपनी स्पर्धाओं में जीत तो हासिल कर सकते हैं। लेकिन शरीर को स्टेरॉयड से जबरदस्त नुकसान होता है। कैलाश प्रकाश स्टेडियम के पुरुष शौचालय में बरामद कई दर्जन सिरिंज और स्टेरॉयड के इंजेक्शन खिलाड़ियों के प्रतिबंधित दवाओं के लेने के सुबूत के लिये काफी हैं। ऐसे में खेल विभाग पर सवालिया निशान उठना लाजिमी है कि खिलाड़ी स्टेडियम परिसर में प्रतिबंधित दवाएं कैसे ले गए।
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मेरठ न्यूज
कर देंगे बाहर
आरएसओ आले हैदर ने कहा कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) और वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) डोपिंग टेस्ट करते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों पर पूरी तरह बैन लगाया जाता है। हैदर के अनुसार एथलेटिक्स प्रतियोगिता के दूसरे दिन रविवार को खिलाड़ियों पर सख्ती की जाएगी। प्रतिबंधित दवा इस्तेमाल करने वाले खिलाड़ियों को प्रतियोगिता से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इस संबंध में हमने एथलेटिक्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों से भी बात कर ली है।
मंडल स्तर पर नहीं होता टेस्ट : आरएसओ
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आले हैदर ने इस संबंध में बताया कि मंडलीय स्तर पर खिलाड़ियों का स्टेरॉयड या प्रतिबंधित दवाओं का सेवन करना वाकई दुर्भाग्यपूर्ण और चौंकाने वाला है। मंडल स्तर पर प्रतिबंधित दवाओं को लेकर कोई टेस्ट नहीं होता है। जिसके चलते खिलाड़ियों को प्रतिबंधित दवाओं को लेकर ज्यादा सख्ती नहीं बरती जाती है। हालांकि स्टेडियम में प्रवेश के दौरान खिलाड़ियों को सचेत किया जाता है। फिर भी खिलाड़ी प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल करते हैं तो वो खुद के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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आरएसओ आले हैदर ने कहा कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) और वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) डोपिंग टेस्ट करते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों पर पूरी तरह बैन लगाया जाता है। हैदर के अनुसार एथलेटिक्स प्रतियोगिता के दूसरे दिन रविवार को खिलाड़ियों पर सख्ती की जाएगी। प्रतिबंधित दवा इस्तेमाल करने वाले खिलाड़ियों को प्रतियोगिता से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। इस संबंध में हमने एथलेटिक्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों से भी बात कर ली है।
मंडल स्तर पर नहीं होता टेस्ट : आरएसओ
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आले हैदर ने इस संबंध में बताया कि मंडलीय स्तर पर खिलाड़ियों का स्टेरॉयड या प्रतिबंधित दवाओं का सेवन करना वाकई दुर्भाग्यपूर्ण और चौंकाने वाला है। मंडल स्तर पर प्रतिबंधित दवाओं को लेकर कोई टेस्ट नहीं होता है। जिसके चलते खिलाड़ियों को प्रतिबंधित दवाओं को लेकर ज्यादा सख्ती नहीं बरती जाती है। हालांकि स्टेडियम में प्रवेश के दौरान खिलाड़ियों को सचेत किया जाता है। फिर भी खिलाड़ी प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल करते हैं तो वो खुद के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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