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अनुज ने मार्शल आर्ट में दो साल में जीते चार स्वर्ण, पिता चट्टे में करते हैं मजदूरी
Mon, 02 Sep 2019 11:55 AM IST
शिखा पांडेय
पुलकित तिवारी, अमर उजाला, कानपुर
पुलकित तिवारी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 02 Sep 2019 11:55 AM IST
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अनुज कुमार
- फोटो : अमर उजाला
अभावों में पले बढ़े अनुज कुमार ने महज दो साल के अभ्यास में मार्शल आर्ट में चार स्वर्ण समेत सात पदक अपने नाम किए हैं। 14 साल के अनुज कुमार बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पिता एक चट्टे में मजदूरी करते हैं। इसके बाद भी अनुज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि इरादे बुलंद हों तो कोई बाधा आपको डिगा नहीं सकती।
कानपुर के केशवपुरम आवास विकास निवासी अनुज ने भूटान में तीन व चार अगस्त को हुई चौथी ऑफ किडो बॉक्सिंग अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर शहर का नाम रोशन किया है। ‘ऑफ किडो बॉक्सिंग’ कराटे और बॉक्सिंग का मिलाजुला खेल है।
अनुज घर के पास स्थित निजी स्कूल में आठवीं का छात्र है। अनुज ने बताया कि जून 2017 में विद्यालय में समर कैंप हुआ था, उसमें मार्शल आर्ट सीखने गया था। तभी से उसकी इस खेल के प्रति रुचि बढ़ी और उसने कल्याणपुर स्थित एक क्लब में प्रशिक्षक आजाद सिंह से प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया।
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कानपुर के केशवपुरम आवास विकास निवासी अनुज ने भूटान में तीन व चार अगस्त को हुई चौथी ऑफ किडो बॉक्सिंग अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर शहर का नाम रोशन किया है। ‘ऑफ किडो बॉक्सिंग’ कराटे और बॉक्सिंग का मिलाजुला खेल है।
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अनुज घर के पास स्थित निजी स्कूल में आठवीं का छात्र है। अनुज ने बताया कि जून 2017 में विद्यालय में समर कैंप हुआ था, उसमें मार्शल आर्ट सीखने गया था। तभी से उसकी इस खेल के प्रति रुचि बढ़ी और उसने कल्याणपुर स्थित एक क्लब में प्रशिक्षक आजाद सिंह से प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया।
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पिता ने उधार रुपये लेकर भेजा भूटान
अनुज के पिता श्रीपाल ने बताया कि सरकार की तरफ से कभी कोई मदद नहीं मिली है। बेटे की मेहनत व लगन को देखकर लोगों से 25 हजार रुपये उधार लेकर उसे भूटान भेजा था। प्रशिक्षक आजाद सिंह भी उसकी मदद करते हैं।
नहीं मिलती है भरपूर डाइट
श्रीपाल ने बताया कि इस खेल में बहुत मेहनत लगती है। एक खिलाड़ी को जितनी डाइट मिलनी चाहिए, बेटे को उतनी मिलती नहीं। इसके बाद भी वह मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ता है। कई बार ऐसा भी हुआ है कि रुपयों के अभाव में वह खेलने नहीं जा सका।
अनुज के पिता श्रीपाल ने बताया कि सरकार की तरफ से कभी कोई मदद नहीं मिली है। बेटे की मेहनत व लगन को देखकर लोगों से 25 हजार रुपये उधार लेकर उसे भूटान भेजा था। प्रशिक्षक आजाद सिंह भी उसकी मदद करते हैं।
नहीं मिलती है भरपूर डाइट
श्रीपाल ने बताया कि इस खेल में बहुत मेहनत लगती है। एक खिलाड़ी को जितनी डाइट मिलनी चाहिए, बेटे को उतनी मिलती नहीं। इसके बाद भी वह मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ता है। कई बार ऐसा भी हुआ है कि रुपयों के अभाव में वह खेलने नहीं जा सका।
ये उपलब्धियां मिलीं
- कानपुर में अगस्त 2017 में हुई जिला स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता।
- हरदोई में अक्तूबर 2017 में हुई राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता।
- शाहजहांपुर में अप्रैल 2018 में हुई राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
- पटना में सितंबर 2018 में हुई राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
- पांडुचेरी में फरवरी 2019 हुई राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
- त्रिपुरा में मई 2019 में हुई राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता।
- भूटान में अगस्त 2019 में हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
- कानपुर में अगस्त 2017 में हुई जिला स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता।
- हरदोई में अक्तूबर 2017 में हुई राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता।
- शाहजहांपुर में अप्रैल 2018 में हुई राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
- पटना में सितंबर 2018 में हुई राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
- पांडुचेरी में फरवरी 2019 हुई राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
- त्रिपुरा में मई 2019 में हुई राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता।
- भूटान में अगस्त 2019 में हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।