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Paris Olympics: लवलीना से लेकर निकहत तक उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे भारतीय मुक्केबाज, नहीं ला सके पदक
Mon, 12 Aug 2024 05:21 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Mon, 12 Aug 2024 05:21 PM IST
सार
निकहत जरीन और लवलीना बोरगोहेन जैसे विश्व चैंपियन खिलाड़ियों के बावजूद भारतीय मुक्केबाज पेरिस में प्रभावित नहीं कर सके और उन्हें बिना पदक के लौटना पड़ा। लवलीना और निकहत और पदक लाने के प्रबल दावेदार थे, लेकिन इन दोनों पहलवानों ने निराश किया।
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पेरिस ओलंपिक 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Paris Olympics: लवलीना से लेकर निकहत तक उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे भारतीय मुक्केबाज, नहीं ला सके पदकtsपेरिस ओलंपिक का समापन हो गया है और भारत ने इन खेलों में एक रजत और पांच कांस्य सहित छह पदक अपने नाम किए। पेरिस ओलंपिक में भारतीय मुक्केबाजों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन निकहत जरीन और लवलीना बोरगोहेन जैसे विश्व चैंपियन खिलाड़ियों के बावजूद भारतीय मुक्केबाज पेरिस में प्रभावित नहीं कर सके और उन्हें बिना पदक के लौटना पड़ा। लवलीना और निकहत और पदक लाने के प्रबल दावेदार थे, लेकिन इन दोनों पहलवानों ने निराश किया।
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मुक्केबाजी में पदक की थी उम्मीद
विजेंदर सिंह के बीजिंग ओलंपिक 2008 में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने के बाद भारतीय मुक्केबाजों से ओलंपिक में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाने लगी थी। इसके चार साल बाद एमसी मैरी कॉम ने लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। रियो ओलंपिक 2016 में भारतीय मुक्केबाज पदक नहीं जीत पाए लेकिन टोक्यो ओलंपिक में लवलीना कांस्य पदक हासिल करने में सफल रही थीं। इस परिदृश्य में उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय मुक्केबाज पदक जीतने का सिलसिला जारी रखेंगे लेकिन उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा। खेल के जानकारों का मानना था कि क्वालिफाई करने वाले छह मुक्केबाजों से दो नहीं तो कम से कम एक पदक की उम्मीद की जा सकती है। दो बार की विश्व चैंपियन जरीन (50 किग्रा), लवलीना (75 किग्रा) और विश्व चैंपियनशिप 2023 के कांस्य पदक विजेता निशांत देव (71 किग्रा) सभी को पोडियम पर पहुंचने का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। लेकिन जब वास्तविक प्रतिस्पर्धा की बात आई तो भारतीय खिलाड़ियों में आवश्यक गति की कमी नजर आई।
विजेंदर सिंह के बीजिंग ओलंपिक 2008 में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने के बाद भारतीय मुक्केबाजों से ओलंपिक में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाने लगी थी। इसके चार साल बाद एमसी मैरी कॉम ने लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। रियो ओलंपिक 2016 में भारतीय मुक्केबाज पदक नहीं जीत पाए लेकिन टोक्यो ओलंपिक में लवलीना कांस्य पदक हासिल करने में सफल रही थीं। इस परिदृश्य में उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय मुक्केबाज पदक जीतने का सिलसिला जारी रखेंगे लेकिन उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा। खेल के जानकारों का मानना था कि क्वालिफाई करने वाले छह मुक्केबाजों से दो नहीं तो कम से कम एक पदक की उम्मीद की जा सकती है। दो बार की विश्व चैंपियन जरीन (50 किग्रा), लवलीना (75 किग्रा) और विश्व चैंपियनशिप 2023 के कांस्य पदक विजेता निशांत देव (71 किग्रा) सभी को पोडियम पर पहुंचने का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। लेकिन जब वास्तविक प्रतिस्पर्धा की बात आई तो भारतीय खिलाड़ियों में आवश्यक गति की कमी नजर आई।
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लवलीना-निकहत ने किया निराश
निशांत को अपवाद माना जा सकता है क्योंकि क्वार्टर फाइनल में विवादास्पद परिणाम के कारण वह पदक से वंचित हो गए। जहां तक जरीन और लवलीना का सवाल है तो वह अपनी मजबूत प्रतिद्वंदियों के सामने संघर्ष करती हुई नजर आईं। अमित पंघाल (51 किग्रा) अपनी पिछली फॉर्म को दिखाने में नाकाम रहे। लवलीना, पंघाल और निशांत को पदक सुरक्षित करने के लिए सिर्फ दो जीत की जरूरत थी। लवलीना और जरीन को हालांकि मुश्किल ड्रॉ मिला था लेकिन वह दोनों मौजूदा विश्व चैंपियन हैं और ऐसे में उनसे इस तरह की चुनौतियों से पार पाने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन इन दोनों मुक्केबाजों ने चीन की अपनी प्रतिद्वंदियों के सामने आसानी से घुटने टेक दिए। जरीन को स्वर्ण पदक का दावेदार माना जा रहा था लेकिन वह दूसरे दौर में ही वू यू से हार गईं। लवलीना को चीन की अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी ली कियान से हार का सामना करना पड़ा। इन दोनों मुक्केबाजों के बीच अभी तक खेले गए चार मुकाबलों में से तीन में चीन की खिलाड़ी ने जीत दर्ज की है।
निशांत को अपवाद माना जा सकता है क्योंकि क्वार्टर फाइनल में विवादास्पद परिणाम के कारण वह पदक से वंचित हो गए। जहां तक जरीन और लवलीना का सवाल है तो वह अपनी मजबूत प्रतिद्वंदियों के सामने संघर्ष करती हुई नजर आईं। अमित पंघाल (51 किग्रा) अपनी पिछली फॉर्म को दिखाने में नाकाम रहे। लवलीना, पंघाल और निशांत को पदक सुरक्षित करने के लिए सिर्फ दो जीत की जरूरत थी। लवलीना और जरीन को हालांकि मुश्किल ड्रॉ मिला था लेकिन वह दोनों मौजूदा विश्व चैंपियन हैं और ऐसे में उनसे इस तरह की चुनौतियों से पार पाने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन इन दोनों मुक्केबाजों ने चीन की अपनी प्रतिद्वंदियों के सामने आसानी से घुटने टेक दिए। जरीन को स्वर्ण पदक का दावेदार माना जा रहा था लेकिन वह दूसरे दौर में ही वू यू से हार गईं। लवलीना को चीन की अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी ली कियान से हार का सामना करना पड़ा। इन दोनों मुक्केबाजों के बीच अभी तक खेले गए चार मुकाबलों में से तीन में चीन की खिलाड़ी ने जीत दर्ज की है।
पुरुष वर्ग में पंघाल जाम्बिया के पैट्रिक चिनेम्बा के खिलाफ अपने तेज और आक्रामक खेल का प्रदर्शन नहीं कर पाए। जांबिया का मुक्केबाज भी दूसरे दौर से आगे नहीं बढ़ पाया। जैस्मीन लैम्बोरिया (57 किग्रा) पिछले ओलंपिक खेलों की रजत पदक विजेता नेस्टी पेटेसियो से हार गईं। प्रीति पवार (54 किग्रा) ने मौजूदा विश्व रजत पदक विजेता येनी मार्सेला एरियास को कड़ी चुनौती दी, लेकिन आखिर में अनुभव की कमी उनके आड़े आई और उन्हें हार का सामना करना पड़ा।