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कामयाबी की कहानी: टोक्यो में हीट चैम्बर में की ट्रेनिंग और जीता सोना, जानें बेल्जियम ने कैसे बदली देश में हॉकी की तस्वीर?

Thu, 05 Aug 2021 10:11 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: मुकेश कुमार झा Updated Thu, 05 Aug 2021 10:11 PM IST
सार

हॉकी में बेल्जियम को यूं ही कामयाबी नहीं मिली है। इसके लिए उसने वर्षों से कड़ी मेहनत की है। अगर आप इतिहास के पन्नों को पलटेंगे तो बेल्जियम ने देश में हॉकी की वाकई तस्वीर बदल दी है।

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Success story: How did Belgium change the picture of hockey in the country, To prepare for Tokyos weather,trained in a heat chamber
बेल्जियम ने ओलंपिक में पहली बार जीता गोल्ड - फोटो : social media

विस्तार

बेल्जियम ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर पहली बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता। खिताबी मुकाबले में बेल्जियम ने ऑस्ट्रेलिया को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 के अंतर से मात दी। 60 मिनट के खेल में दोनों टीमें 1-1 गोल करके बराबरी पर रहीं। मगर अंत में हार-जीत का फैसला पेनाल्टी शूटआउट से हुआ, जिसमें बेल्जियम ने बाजी मार ली। हॉकी में बेल्जियम को यूं ही कामयाबी नहीं मिली है। इसके लिए उसने वर्षों से कड़ी मेहनत की है। अगर आप इतिहास के पन्नों को पलटेंगे तो बेल्जियम ने देश में हॉकी की वाकई तस्वीर बदल दी है। चलिए शुरू से शुरुआत करते हैं और आपको बताते हैं हॉकी में बेल्जियम की कामयाबी की कहानी? इसके साथ ही हम आपको इस खबर में ये भी बताएंगे कि टोक्यो की तपती गर्मी में बेल्जियम की टीम ने किस तरह अभ्यास किया और पहली बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 

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बेल्जियम में हॉकी की शुरुआत

बेल्जियम में पहली बार 1902 में हॉकी खेली गई। 1904 में पहला क्लब स्थापित किया गया। 1907 में बेल्जियम हॉकी संघ की स्थापना हुई। जर्मनी के खिलाफ बेल्जियम ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। 1920 से लेकर 1978 तक दो विश्व कप और 11 समर ओलंपिक में हिस्सा लिया। इस दौरान बेल्जियम ने हॉकी में अपनी जबरदस्त पैठ बनाई। साल 2008 बेल्जियम के लिए ऐतिहासिक था। 32 साल बाद देश ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। हालांकि, 2008 ओलंपिक में बेल्जियम नौवें स्थान पर रहा था, 2012 में पांचवें, 2016 में दूसरे स्थान पर रहा था। यूं कहें तो देश ने 2000 के बाद हॉकी में निवेश करना शुरू किया और युवाओं में जोश भरा। साथ ही इसकी संरचनाओं का भी आधुनिकीकरण किया। 

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बेल्जियम ने 2018 में रचा था इतिहास

साल 2018 में बेल्जियम की टीम ने इतिहास रचते हुए पहली बार हॉकी विश्व कप का खिताब जीता था। फाइनल मैच में बेल्जियम ने नीदरलैंड को हराकर ये उपलब्धि हासिल की थी। दोनों टीमों के बीच मुकाबला 2-2 की बराबरी पर था। फुल टाइम तक दोनों टीमें एक भी गोल करने में नाकाम रहीं। इसके बाद जीत-हार का फैसला पेनल्टी शूटआउट पर गया, जहां बेल्जियम ने नीदरलैंड को 3-2 से हराया था। यह देश के लिए पहली अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी थी। 

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भारत को हराकर फाइनल में प्रवेश

हॉकी के दूसरे सेमीफाइनल में भारत को बेल्जियम के हाथों हार का सामना करना पड़ा। भारतीय टीम ने शुरुआती बढ़त के बावजूद मैच को अपने हाथों से गंवाया। दुनिया की नंबर दो टीम बेल्जियम ने भारत को न सिर्फ बुरी तरह रौंदा, बल्कि उसका विजयी रथ रोककर फाइनल का टिकट हासिल किया। विश्व चैंपियन बेल्जियम के आक्रामक खेल के आगे भारतीय डिफेंस कहीं नहीं टिक पाई और 2-5 से हार गई। ऐसा पहली बार नहीं है, जब बेल्जियम की टीम भारत की राह में रोड़ा बनी है। इससे पहले 2012 में लंदन ओलंपिक और 2016 रियो ओलंपिक में भारतीय टीम बेल्जियम से पार नहीं पा सकी है। रियो ओलंपिक के क्वार्टरफाइनल में बेल्जियम के हाथों 1-3 से हारकर ही भारत बाहर हुआ था। इससे पहले 2012 में लंदन ओलंपिक में भी बेल्जियम ने ही भारत का रास्ता रोका था।  

हीट चैम्बर में की ट्रेनिंग

बेल्जियम की टीम ने टोक्यो के मौसम को देखते हुए हीट चैम्बर में ट्रेनिंग की। इसकी जानकारी बेल्जियम के पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी मिक ब्यूनेन ने दी। ब्यूनेन साल 2010 से ही टीम की ट्रेनिंग को गौर से देखा है। ब्यूनेन कैथोलीके यूनिवर्सिटिट ल्यूवेन में शारीरिक शिक्षा और प्रशिक्षण विज्ञान का अध्ययन किया है। टोक्यों में खिलाड़ियों को 12 और 40 डिग्री सेल्सियस (लगभग 54 से 104 डिग्री फारेनहाइट) तापमान में भी ट्रेंनिग कराया गया है। वहीं, 35 डिग्री सेल्सियस (95 डिग्री फारेनहाइट) तापमान में भी खिलाडियों ने अभ्यास किया है। इतना ही अभ्यास के दौरान और बाद में खिलाड़ियों के तापमान की भी जांच की जाती थी। इसके अलावा टीम ने खिलाड़ियों की हृदय गति, स्प्रिंट गति, तय की गई दूरी और अन्य मैट्रिक्स को मापने के लिए भी अलग प्रकार के तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे पता चल सके कि कौन खिलाड़ी चोट के कारण अधिक जोखिम में है और कौन थका हुआ है?
 

हॉकी में बेल्जियम की उपलब्धि पर एक नजर

समर ओलंपिक
  • 2020 में गोल्ड
  • 2016 में सिल्वर
  • 1920 में ब्रॉन्ज
विश्व कप
  • 2018 में स्वर्ण पदक जीता था
यूरोपियन चैंपियनशिप
  • 2019 में गोल्ड
  • 2013 और 2017 में सिल्वर
  • 2007 और 2021 ब्रॉन्ज
एफआईएच प्रो लीग
  • 2020-21 में गोल्ड
  • 2019 में सिल्वर
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