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हॉकी में भारत की सुनहरी कामयाबी का हीरो कौन?

Thu, 02 Oct 2014 09:54 PM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह/अमर उजाला, नई दिल्ली
सत्येन्द्र पाल सिंह/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Oct 2014 09:54 PM IST
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success of indian hockey in asiad.

एशियाई खेलों में भारत ने पुरुष हॉकी में अब तक महज तीन बार सुनहरी कामयाबी पाई। एक सुखद संयोग है की तीनों ही मौकों पर भारत को ये सुनहरे तमगे दिलाने में उसके गोलकीपरों की जांबाजी निर्णायक साबित हुई।

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1966 में सबसे पहले बैंकॉक में फाइनल में गोलरक्षक कप्तान शंकर लक्ष्मण, 1998 में बैंकॉक में ही गोलकीपर आशीष बलाल और 2014 में बृहस्पतिवार को इंचियोन में गोलरक्षक पीआर श्रीजेश की मुस्तैदी ने भारत को एशियाई खेलों का चैंपियन बनाया।
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भारत ने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर फाइनल में जीत दर्ज कर सोने का तमगा जीतने के साथ 2016 में सीधे रियो ओलंपिक का टिकट पा लिया।

जीत भारतीय हॉकी के लिए संजीवनी

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सरदार सिंह की सेना में1998 में बैंकॉक में सोने का तमगा जीतने वाली धनराज पिल्लै की अगुवाई वाली टीम के बलजीत सिंह ढिल्लों और मुकेश कुमार जैसे स्ट्राइकर नहीं थे। इसकी भरपाई सरदार की सेना बतौर ‘फौज’ जंग जीतने का जज्बा दिखाकर की। यह सरदार और भारत के ऑस्ट्रेलियाई हॉकी उस्ताद टैरी वॉल्श के सपने की जीत तो है ही अपने आलोचक को भी करारा जवाब है। यह जीत भारतीय हॉकी के लिए संजीवनी साबित होगी।

भारत की यह जीत हेग विश्व कप में आठवें स्थान पर आने के बाद उस पर भरोसा कायम रखने की जीत है। इस जीत से भारत को अब रियो ओलिंपिक के लिए तैयारी के लिए दो बरस से ज्यादा का वक्त मिलेगा।

भारत को अब रक्षापंक्ति की खामियों को दूर करने के साथ गोल के ठीक सामने जाकर गोल करने की कला बेहतर करनी होगी। तभी वह ओलंपिक में लंबे अंतराल के बाद फिर पदक का सपना संजो सकेगा।

'वाकई चैंपियन हैं श्रीजेश'

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‘फॉरवर्ड और मिडफील्डर मैच जिता सकते हैं। टीम को खिताब तो गोलकीपर ही जिताते हैं। भारत की पाकिस्तान पर इंचियोन में फाइनल में जीत के मेरे हीरो गोलकीपर पीआर श्रीजेश। वाकई चैंपियन हैं श्रीजेश। फाइनल में पेनल्टी कॉर्नर पर बेहतरीन बचाव करने के दौरान चोट के बाद भी वह डटे रहे और शूटआउट में दो बेहतरीन बचाव किए। मैं श्रीजेश को सलाम करता हूं।
-आशीष बलाल (भारत की 1998 के बैंकॉक एशियाड की जीत के हीरो गोलरक्षक )

‘फाइनल का निर्णायक मोड़ रहा दूसरे ओर तीसरे क्वॉर्टर में भारत का दबदबा। दूसरे क्वॉर्टर में बराबरी के बाद भारत की मध्यपंक्ति और अग्रिम पंक्ति ने गलतियां जरूर कीं, लेकिन टीम ने अपनी पकड़ बनाए रखी। 1998 में बलाल ने टाईब्रेकर में बेहतरीन बचाव कर दक्षिण कोरिया के खिलाफ जिताया था।’ इंचियोन में गोलकीपर श्रीजेश ने यही रोल निभा भारत को फंसा फाइनल जिताया।’
-बलजीत सिंह ढिल्लों । (1998 एशियाड में गोल्ड विजेता टीम के सदस्य)

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