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सविता पूनिया ने कहा- विश्व कप में बेहतर खेलेंगे तो एशियाड में स्वर्ण जीतने के विश्वास से उतरेंगे

Wed, 18 Jul 2018 05:31 AM IST
सत्येंद्र पाल सिंह, अमर उजाला
सत्येंद्र पाल सिंह, अमर उजाला Updated Wed, 18 Jul 2018 05:31 AM IST
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savita punia says if we played well can win gold in asian games
सविता पूनिया

सविता पूनिया की गिनती महिला हॉकी में दुनिया की बेहतरीन गोलरक्षकों में होती है। हकीकत यह है कि 28 वर्षीया सविता भारत की किले की चौकसी बतौर गोलरक्षक मुस्तैदी से करती हैं टीम की रक्षापंक्ति को विश्वास से खेलने को प्रेरित करती हैं।  

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भारतीय महिला हॉकी टीम की डिफेंस की 'लीडर' गोलरक्षक सविता ने 'अमर उजाला' से कहा, 'मैं हॉकी में आज जो कुछ भी हूं अपने परिवार के 'सहयोग' की बदौलत हूं। मैं इस मुकाम पर खासतौर पर अपने दादा स्वर्गीय रणजीत सिंह पूनिया के हॉकी प्रेम की वजह से पहुंच पाया। बचपन से उन्होंने मुझे हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। मैंने हॉकी में हमेशा बतौर गोलरक्षक अपने खेल का लुत्फ उठाय।' 
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उन्होंने आगे कहा, 'मेरा हॉकी में कामयाबी का एक ही मंत्र पूरी तरह फिट रहो और हॉकी का लुत्फ उठाओ। हमारी लंदन महिला हॉकी विश्व कप में खेलने जा रही टीम में केवल दीपिका ठाकुर और कप्तान रानी रामपाल ही हैं जो 8 बरस पहले भारत के 2010 में रोजारियो (अर्जेंटीना) में विश्व कप खेली थी। भारतीय हॉकी टीम की मुझ सहित बाकी सभी 16 खिलाड़ियों का यह पहला होगा और हम इसमें छाप छोड़ने को बेताब हैं। हमारी टीम बेहद अनुशासित है।' 
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सविता कहती हैं, 'हम मैदान पर पूरी शिद्दत से अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का सपना संजोए है। मेरा निजी तौर पर यह मानना हे कि  भारतीय टीम इस बार महिला हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल में खेलने का दम है। उसे इसमें सेमीफाइनल ही  खेलना चाहिए।  हमारी खिलाड़ियों के व्यक्तित्व हॉकी कौशल के साथ पेनल्टी कॉर्नर को भुना कर गोल करने का भी दम है। हमारी टीम ने राष्ट्रमंडल खेलों में दिखाया कि वह दुनिया की ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी दुनिया की शीर्ष महिला हॉकी टीम को टक्कर देने का दम रखती है।'

वह बताती हैं, 'हमारी टीम महिला हॉकी विश्व रैंकिंग में फिलहाल दसवें स्थान पर है। हमारी टीम पूल बी में दुनिया की दूसरे नंबर की टीम मेजबान इंग्लैंड और सातवें नंबर की टीम अमेरिका है। रैंकिंग में आयरलैंड केवल हमसे नीचे है। मेरा मानना है कि लंदन महिला विश्व कप में हम किसी भी टीम के नाम और रैंकिंग से आतंकित नहीं है। लंदन विश्व कप में हम बेहतर खेलेंगे तो जकार्ता में एशियाई खेलों में पूरे विश्वास साथ वहां स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य को पाने के विश्वास से उतर कर सीधे 2020 के टोक्यो ओलंपिक का टिकट हासिल कर सकेंगे।' 


सविता ने बताया, 'हमारी टीम की ताकत उसका आक्रामक खेल और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील करने का दम है। हां, जब प्रतिद्वंद्वी टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिले तो उस पर हमें 'डी' के भीतर चौकस रहने की जरूरत है। हमारे पास कप्तान रानी रामपाल और वंदना कटारिया के रूप में दो -दो सौ से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मैच खेलने वाली अनुभवी फॉरवर्ड के साथ ललरेमसियामी और नवजोत कौर जैसी चतुर फॉरवर्ड जो मैदानी गोल करने के साथ पेनल्टी कॉर्नर बनाना भी खूब जानती हैं।'

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