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Hindi News ›   Sports ›   Hockey ›   Rajiv Gandhi Khel Ratna award will now be known as the  Major Dhyan Chand Khel Ratna Award

हॉकी के जादूगर 'मेजर ध्यानचंद' के नाम पर मिलेगा खेल रत्न अवार्ड, लगातार तीन ओलंपिक में लहराया था तिरंगा

Fri, 06 Aug 2021 01:08 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Fri, 06 Aug 2021 01:08 PM IST
सार

हॉकी के जादूगर ने अंतिम साक्षात्कार में कहा था, 'जब मेरा निधन होगा तो पूरा विश्व रो रहा होगा, लेकिन भारत के लोगों की आंखों से मेरे लिए एक आंसू भी नहीं निकलेंगे। मैं अपने देश के लोगों को अच्छी तरह जानता हूं।'

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Rajiv Gandhi Khel Ratna award will now be known as the  Major Dhyan Chand Khel Ratna Award
हॉकी के जादूगर 'मेजर ध्यानचंद' - फोटो : social media

विस्तार

केंद्र सरकार ने खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदल दिया है। अब इस अवार्ड का नाम हॉकी के जादूगर 'मेजर ध्यानचंद' के नाम पर रख दिया गया है। वही ध्यानचंद, जिन्होंने लगातार तीन ओलंपिक (1928 एम्सटर्डम, 1932 लॉस एंजेलिस और 1936 बर्लिन) में भारत को हॉकी का स्वर्ण पदक दिलाया था। 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में जन्मे ध्यानचंद की उपलब्धियों ने भारतीय खेल के इतिहास को नए शिखर पर पहुंचाया।

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जब मेरा निधन होगा तो पूरा विश्व रो रहा होगा...

दरअसल, जब हमारा देश गुलाम था तब दुनिया में भारत की पहचान गांधी, हॉकी और ध्यानचंद की वजह से होती थी। आजाद भारत में हॉकी और ध्यानचंद हमेशा से उपेक्षित रहे। हॉकी और उसके जादूगर पर देश और उसकी सरकार का ध्यान नहीं गया। ध्यानचंद को शायद अपनी उपेक्षा का अंदाजा हो गया था। तभी तो उन्होंने अपने अंतिम साक्षात्कार में कहा था, 'जब मेरा निधन होगा तो पूरा विश्व रो रहा होगा, लेकिन भारत के लोगों की आंखों से मेरे लिए एक आंसू भी नहीं निकलेंगे। मैं अपने देश के लोगों को अच्छी तरह जानता हूं।'

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हिटलर का ऑफर ठुकराया

यह वही ध्यानचंद थे जिन्होंने हिटलर का ऑफर यह कहकर ठुकरा दिया था कि मुझे मेरा देश भारत सबसे अच्छा लगता है, मुझे कुछ नहीं चाहिए। हॉकी की जादूगरी को देखते हुए हिटलर ने ध्यानचंद को जर्मनी में सेना में सर्वोच्च पद देने की पेशकश की थी। ध्यानचंद को दुनिया में लगभग 55 देशों के 400 से अधिक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उनके जन्मदिन को देश में खेल दिवस के रूप में मनाया तो गया। लेकिन एक एक सपना जो अब भी अधूरा है, वो है भारत रत्न का। नाम बदकर केंद्र सरकार ने जरूर उसकी भरपाई की है लेकिन भारत रत्न के हकदार वो तब भी थे और मरणोपरांत भी कहीं न कही लोगों में इस बात की कसक है कि उन्हें भारत रत्न जरूर दिया जाना चाहिए। हालांकि, इसको लेकर पिछले कई वर्षों से अलग किस्म की राजनीति चलती आ रही है। 

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22 साल तक भारत के लिए खेला और 400 अंतरराष्ट्रीय गोल दागे

ध्यानचंद ने 22 साल तक भारत के लिए खेला और 400 अंतरराष्ट्रीय गोल दागे। कहा जाता है कि जब वो खेलते थे, तो मानो गेंद स्टिक पर चिपक जाती थी। हॉलैंड में एक मैच के दौरान चुंबक होने की आशंका में उनकी स्टिक तोड़कर देखी गई थी। जापान में एक मैच के दौरान उनकी स्टिक में गोंद लगे होने की बात भी कही गई थी।

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