इन 18 बालाओं पर रहेगा हॉकी विश्व कप में भारत की नैया पार लगाने का भार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत की शनिवार को लंदन में 14वें महिला हॉकी विश्व कप में पदक जीतने की उम्मीदों को हकीकत में बदलने का जिम्मा इन 18 बालाओं पर रहेगा। 1974 में महिला हॉकी विश्व कप मे चौथा स्थान भारत का अब तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। रानी रामपाल की अगुवाई भारतीय टीम से इतिहास बदलने की उम्मीद की जा रही है।
1 . रानी रामपाल मात्र 23 बरस की उम्र में अपना दूसरा महिला हॉकी विश्व कप खेलेंगी। हरियाणा के शाहबाद मारकांडा की मात्र 15 बरस की उम्र में अपना पहला विश्व कप चुकी रानी पर कप्तानी के साथ इस बार भारत के हमलों और गोल करने की जिम्मेदारी हैं। 2010 में भारत भले ही अर्जेंटीना में नौंवे स्थान पर रहा था लेकिन रानी तब छह मैदानी गोल कर सर्वश्रेष्ठ यंग खिलाड़ी रही थी। रियो ओलंपिक विश्व कप, एशियाई खेल, एशिया कप, वह इस भारत के हमलों की 'लीडर' अब देश के लिए करीब सवा दो सौ अंतर्राष्ट्रीय मैच खेल चुकी हैं रानी पर भारत को पदक जितवाने की आस पूरी कराने की जि मेदारी होगी। अनुभवी फुलबैक सुशीला चानू को न चुने पर उनकी जगह चुनी जगह रीना खोखर कसौटी पर होंगी।
2. सविता पूनिया भारत की सर्वश्रेष्ठ गोलरक्षकों में से हैं। 28 बरस की सविता पूनिया भी हरियाणा की हैं। भारत को रियो ओलंपिक के क्वॉलिफाई कराने की अहम भूमिका और पिछले साल शूटआउट में अहम बचाव कर भारत को 13 बरस बाद महिला एशिया कप हॉकी खिताब जितवाने में अहम रोल निभाया। करीब पौने दो अंतर्राष्ट्रीय मैच खेल चुकीं उपकप्तान सविता पर भारत की किले की चौकसी कर उसे महिला विश्व कप में पहली बार पदक दिलाने की हसरत को पूरा कराने की जिम्मेदारी होगी।
3. रजनी इतिमारपू भारतीय टीम में सविता पूनिया के साथ दूसरी गोलरक्षक और उनकी तरह ही 28 बरस की है। भारत के लिए 70 से ज्यादा मैच खेल चुकी रजनी किसी भी मुश्किल हालात से निबटने का टीम को संबल देती हैं।
4. वंदना कटारिया का शुमार भारत और दुनिया की तेज तर्रार फॉरवर्ड में होता है। वह भारत की मौजूदा टीम की 200 से ज्यादा मैच खेलने वाली तीन खिलाडिय़ों में से एक है। भारत के आक्रमण की लीडर कप्तान रानी रामपाल के भारत के लिए गोल करने के साथ गोल करने के हमले और अभियान बनाने का दारोमदार बीएचईएल से सटे रोशनाबाद गांव की 26 वर्षीया स्ट्राइकर वंदना पर रहेगा। भारत को विश्व कप में इस बार पदक जीतना है तो वंदना को अपनी प्रतिष्ठा के मुताबिक खेलना होगा।
5, 26 वर्षीया सुनीता लाकड़ा भी ओडिशा से हैं और दीपग्रेस के साथ बतौर डिफेंडर रक्षापंक्ति में उनकी मौजूदगी गोलरक्षक सविता पूनिया को और आश्वस्त करती हैं। सुनीता लाकड़ा की टैकलिंग तो बेहतरीन है वह टीम को जवाबी हमले बनाने में भी माहिर है। भारत के लिए रियो ओलंपिक। एशियाई खेलों । एशिया कप में भी भारत की नुमाइंदगर कर चुकी हैं। भारत के लिए 132 मैच खेल चुकी हैं। इस विश्व कप में सुनीता की किले की चौकसी भारत के भाग्य का फैसला करेगी।
6. गुरजीत कौर पंजाब से हैं और मात्र 22 बरस की उम्र में उन्होंने खुद को भारत की सर्वश्रेष्ठ ड्रैग फ्लिकर और डिफेंडर के रूप में स्थापित कर लिया है। भारत को पिछले साल जापान में सबसे ज्यादा आठ गोल कर भारत को महिला एशिया कप हॉकी खिताब जितवाने में गुरजीत ने अहम रोल किया। अब तक देश के लिए 55 मैच खेल चुकी गुरजीत सिंह के पेनल्टी कॉर्नर पर ड्रैग फ्लिक पर निशाने ठीक रहे तो भारत की इस बार पदक जीतने की आस पूरी हो सकती है।
7. रीना खोखर मूलत: फॉरवर्ड हैं लेकिन भारत के कोच ने उन्हें सुशीला चानू पर तवज्जो देते हुए विश्व कप के लिए बतौर डिफेंडर चुना है।25 बरस रीना ने भारत के लिए अब तक महज 14 मैच खेले हैं लेकिन उनकी हॉकी की कलाकारी और प्रतिद्वंद्वी फॉरवर्ड की स्टिक से बाज की गेंद को छीनने की कूवत को देखकर मराइन ने उन्हें बतौर डिफेंडर चुना है।
8. दीपिका ठाकुर भारत के लिए 2010 के विश्व कप में मौजूदा कप्तान रानी रामपाल के साथ फॉरवर्ड खेली थी। यमुनानगर की टीम की सबसे उम्रदराज 31 बरस की दीपिका के लंबे अनुभव को देखते हुए मौजूदा कोच सोएर्ड मराइन शुरू से बतौर डिफेंडर खिला रहे हैं। चंडीगढ़ स्पोटर्स हॉस्टल की भारत के लिए सबसे ज्यादा 219 मैच खेल चुकी दीपिका की टैकलिंग और जवाबी हमले की क्षमता इस विश्व कप में उन्हें छुपा रूस्तम बनाती है। उनकी मौजूदगी में रक्षापंक्ति को नया भरोसा देती है।
9. उदिता हरियाणा के हिसार की हैं। मैदान पर फुटबॉल खेलते खेलते अचानक एक हॉकी क्या थामी कि 20 बरस की उदिता इसी में रम गई। उनके पिता की तमन्ना थी कि वह अपनी बेटी उदिता को भारत के लिए हॉकी खेलता देखे बदकिस्मती से असमय मौत के कारण ऐसा न हो सका। चतुर मिडफील्डर उदिता इस विश्व कप में दमदार प्रदर्शन कर भारत को पदक दिलाने में अहम रोल निभा कर खुद के लिए एक अदद नौकरी हासिल करना चाहती है। जिससे कि परिवार को चला सके।
10. बेबी ऑफ द टीम टीम की सबसे कम 18 बरस की ललरेमसियामी मिजोरम जैसे हॉकी की बजाय फुटबॉल के लिए याति मिजोरम से आती हैं। वह भारत के लिए भले ही अब तक महज 25 मैच खेली हैं लेकिन कप्तान रानी रामपाल उनकी मुरीद हैं। किसी भी कोण से गोल करने का दम रखते वाली ललरेमसियामी वह इस महिला विश्व कप में भारत के आक्रमक का तुरुप का इक्का साबित हो सकती हैं।
11. नवनीत कौर कप्तान रानी रामपाल की तरह शाहबाद मरकंडा के बलदेव सिंह की हॉकी नर्सरी की है।मात्र 22 बरस की नवनीत कौर ने भारत के भले ही 40 मैच खेले हैं लेकिन इस महिला विश्व कप में भारत को पदक जीतने की हसरत पूरी करनी है तो उन्हें उम्मीदों पर खरा उतरना होगा।
12. नेहा गोयल भारत की मध्यपंक्ति की जान है और बहुत सफाई से प्रतिद्वंद्वी टीम के किले में दरार खोजने के साथ उतनी ही फुर्ती से पीछे आकर रक्षण में भी मदद करती है। 21 वर्षीया नेहा भी हरियाणा की है मात्र 36 मैच खेलने के बावजूद कप्तान रानी रामपाल को उन पर खासा भरोसा है।
13. 24 वर्षीय निकी प्रधान झारखंड के आदिवासी अंचल से आती हैं और अपने बेखौफ खेल से भारत की मध्यपंक्ति को नया विश्वास जगाती हैं। वह रियो ओलंपिक, जापान में 2017 में महिला एशिया कप में विश्वास से खेलने के कारण इस विश्व कप में उसकी मध्यपंक्ति की जान होंगी।
14. नवजोत कौर भी रानी रामपाल की तरह शाहबाद मरकंडा की हैं। 23 बरस की नवजोत कप्तान रानी, नवनीत, वंदना और ललरेमसियामी के साथ विश्व कप में भारत के आक्रमण को विविधता देंगी। भारत के लिए ओलंपिक, एशियाई खेलों, एशिया कप जैसे सभी अहम टूर्नामेंट की नुमाइंदगी कर 133 मैच खेल चुकी उन पर गोल करने के साथ गोल के अभियान बनाने की भी जिम्मेदारी होगी।
15. मोनिका मलिक हरियाणा की है और भारत की मध्यपंक्ति की जान है। भारत को पिछले साल महिला एशिया कप जितवाने में 24 बरस की मोनिका आक्रमण और रक्षण की अहम कड़ी रही थी। भारत के 117 मैच चुकी मोनिका का मध्यपंक्ति में लिलिमा मिंज के साथ तालमेल इस विश्व कप में खासा अहम रहेगा।
16. लिलिमा मिंज ओडिशा की हैं और मध्यपंक्ति में उन पर भारत की अग्रिम पंक्ति में गेंद बढ़ाने के साथ पीछे आकर किले की भी चौकसी भी अहम जिम्मेदारी होगी। वह मोनिका की तरह 100 से ज्यादा मैच खेल चुकी हैं और उनके साथ तालमेल भारत की इस महिला विश्व कप में कामयाबी के लिए खासा अहम होगा।
17. नमिता टोपो ओडिशा से आने वाली भारत की मध्यपंक्ति की जान है। 22 बरस की नमिता भारत के एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और 2017 के एशिया कप में सबसे अहम खिलाड़ी रही है। वह जितने विश्वास से प्रतिद्वंद्वी टीम के हमले को नाकाम करती हैं उतनी ही तेजी से जवाबी हमले बनाने में सक्षम है। भारत के लिए करीब डेढ़ सौ मैच खेल चुकी नमिता को इस विश्व कप में अपनी याति के मुताबिक खेलना होगा।
18. दीप ग्रेस एक्का ओडिशा की हैं और पारंपरिक रूप से वह भारत की रक्षापंक्ति की मजबूत दीवार हैं। 24 बरस की दीप ग्रेस भारत के लिए करीब डेढ़ सौ मैच खेल कर एशिया कप और राष्ट्रमंडल खेल जैसे सभी अहम टूर्नामेंट खेल चुकी हैं। इस विश्व कप में भी उनसे किले की मजबूत चौकसी की आस है।