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Hockey World Cup: सेमीफाइनल से चूकने के बाद छलक पड़े भारतीय महिला खिलाड़ियों के आंसू, चेहरे पर छाई उदासी
Mon, 24 Aug 2026 04:23 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, एम्सटेलवीन
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, एम्सटेलवीन
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Mon, 24 Aug 2026 04:23 PM IST
सार
भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप में पदक से चूक गई है। भारतीय महिला टीम इतने करीब आकर पदक चूकने से काफी निराश है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच के बाद भारतीय खिलाड़ी हताश नजर आईं।
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भारतीय महिला हॉकी टीम
- फोटो : IANS
विस्तार
भारतीय महिला हॉकी टीम का सफर विश्व कप में समाप्त हो चुका है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे चरण का मैच गोलरहित ड्रॉ रहने के बावजूद भारतीय टीम गोल की गणना के आधार पर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई। हूटर बजते ही डगआउट में बैठीं भारत की सबसे अनुभवी खिलाड़ी सविता पूनिया और उनकी साथी गोलकीपर बिछू देवी अपने आंसू नहीं रोक सकीं और ठीक पीछे बैठी इशिका चौधरी को यकीन ही नहीं हुआ कि अपने पहले ही विश्व कप में वह पदक के इतने करीब पहुंचकर चूक गईं।
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लाल थी खिलाड़ियों की आंखें
मैच के बाद खिलाड़ियों के चेहरे बयां कर रहे थे कि उन पर क्या बीत रही है। मैदान से निकलकर अपनी टीम बस का इंतजार कर रही खिलाड़ियों की आंखें लाल थी। मुख्य कोच शोर्ड मारिन मीडिया से बात कर रहे थे लेकिन अपनी उदासी नहीं छिपा सके। टीम के वैज्ञानिक सलाहकार और एथलीट परफार्मेस प्रमुख वेन लोम्बार्ड और सीनियर खिलाड़ी पहली बार विश्व कप खेल रही खिलाड़ियों का हौसला बंधा रहे थे। भारतीय टीम में 11 खिलाडियों का यह पहला विश्व कप है और उन्हें यकीन की नहीं हो रहा था कि वे सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हैं। सीढियों पर बैठकर फोन पर अपनी मां से बात कर रही एक खिलाड़ी ने कहा, यह सबसे अच्छा मौका था। हम इतने करीब पहुंच गए थे और अब पता नहीं कब ये मौका मिलेगा।
मैच के बाद खिलाड़ियों के चेहरे बयां कर रहे थे कि उन पर क्या बीत रही है। मैदान से निकलकर अपनी टीम बस का इंतजार कर रही खिलाड़ियों की आंखें लाल थी। मुख्य कोच शोर्ड मारिन मीडिया से बात कर रहे थे लेकिन अपनी उदासी नहीं छिपा सके। टीम के वैज्ञानिक सलाहकार और एथलीट परफार्मेस प्रमुख वेन लोम्बार्ड और सीनियर खिलाड़ी पहली बार विश्व कप खेल रही खिलाड़ियों का हौसला बंधा रहे थे। भारतीय टीम में 11 खिलाडियों का यह पहला विश्व कप है और उन्हें यकीन की नहीं हो रहा था कि वे सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हैं। सीढियों पर बैठकर फोन पर अपनी मां से बात कर रही एक खिलाड़ी ने कहा, यह सबसे अच्छा मौका था। हम इतने करीब पहुंच गए थे और अब पता नहीं कब ये मौका मिलेगा।
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चुपचाप खड़ी रहीं सविता
तीसरा विश्व कप खेल रही सविता चुपचाप खड़ी थी और इतना ही बोल सकी कि यह सर्वश्रेष्ठ मौका था। अनुभवी मिडफील्डर नेहा गोयल के आंसू नहीं थम रहे थे। उनसे कहा गया कि आगे एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है तो उन्होंने सिर्फ हां में सिर हिलाया और कुछ बोल नहीं सकीं। भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप में कभी पदक नहीं जीती है और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1974 में फ्रांस में खेले गए पहले ही विश्व कप में था जब टीम चौथे स्थान पर रही थी। अब भारत को पांचवें छठे स्थान का मुकाबला 27 अगस्त को खेलना है और वह भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा।
टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने कहा, हम खुश नहीं है क्योंकि पदक के इतने करीब आने के बाद चूकना नहीं था। हमने इसके लिए इतनी मेहनत की थी। अच्छा भी खेले लेकिन फिनिश नहीं कर पाए। हम हार में भी साथ हैं और जीत में भी। हमें इससे सीख मिली है कि कोई मौका नहीं गंवाना है। अब पांचवें स्थान के लिए खेलना है और दोबारा वापसी करेंगे। हमने अभी तक जुझारूपन नहीं छोड़ा है और इस आखिरी मैच में भी नहीं छोड़ेंगे।
तीसरा विश्व कप खेल रही सविता चुपचाप खड़ी थी और इतना ही बोल सकी कि यह सर्वश्रेष्ठ मौका था। अनुभवी मिडफील्डर नेहा गोयल के आंसू नहीं थम रहे थे। उनसे कहा गया कि आगे एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है तो उन्होंने सिर्फ हां में सिर हिलाया और कुछ बोल नहीं सकीं। भारतीय महिला हॉकी टीम विश्व कप में कभी पदक नहीं जीती है और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1974 में फ्रांस में खेले गए पहले ही विश्व कप में था जब टीम चौथे स्थान पर रही थी। अब भारत को पांचवें छठे स्थान का मुकाबला 27 अगस्त को खेलना है और वह भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा।
टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने कहा, हम खुश नहीं है क्योंकि पदक के इतने करीब आने के बाद चूकना नहीं था। हमने इसके लिए इतनी मेहनत की थी। अच्छा भी खेले लेकिन फिनिश नहीं कर पाए। हम हार में भी साथ हैं और जीत में भी। हमें इससे सीख मिली है कि कोई मौका नहीं गंवाना है। अब पांचवें स्थान के लिए खेलना है और दोबारा वापसी करेंगे। हमने अभी तक जुझारूपन नहीं छोड़ा है और इस आखिरी मैच में भी नहीं छोड़ेंगे।