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साइकिल पर कपड़े बेचने को मजबूर है हॉकी का 'द्रोणाचार्य'
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 05 Sep 2016 07:00 PM IST
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मोहम्मद इमरान
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एक वक्त में मोहम्मद इमरान हॉकी की दुनिया का बड़ा नाम हुआ करता था। कभी फर्टिलाइजेशन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के लिए हॉकी खेलने वाले मोहम्मद इमरान आज तंगहाली में अपना जीवन बिता रहे हैं। 8 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों समेत 50 से ज्यादा खिलाड़ियों को हॉकी के गुर सिखाने वाला यह गुरु आज साइकिल पर सड़क किनारे कपड़े बेच रहा है।
इमरान की मजबूरी ही ऐसी है कि उनके पास अब कोई रास्ता नहीं बचा। इमरान को अपनी बेटी की शादी के लिए पैसा इकट्ठा करना है। उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में रहने वाले इमरान अपनी साइकिल पर घूम-घूम कर ट्रेक सूट बेच रहे हैं।
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इमरान की मजबूरी ही ऐसी है कि उनके पास अब कोई रास्ता नहीं बचा। इमरान को अपनी बेटी की शादी के लिए पैसा इकट्ठा करना है। उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में रहने वाले इमरान अपनी साइकिल पर घूम-घूम कर ट्रेक सूट बेच रहे हैं।
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तंगहाली में भी काबिल है खेल के लिए जूनून
मोहम्मद इमरान
इमरान भारतीय महिला हॉकी टीम की उपकप्तान निधि खुल्लर के भी कोच हैं। फर्टिलाइजेशन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया बंद हो जाने के कारण वो इस तरह जीवन बिताने के लिए मजबूर हैं।
मोहम्मद इमरान ने रीता पांडे, रजनी चौधरी, संजीव ओझा, प्रतिमा चौधरी, जनार्दन गुप्ता और संवर अली समेत कई अतंरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को हॉकी स्टिक से कमाल करने का हुनर सिखाया है।
अपने गुजर-बसर के लिए कमाई करने के बाद उनके पास जो भी समय बचता है, वो उसमें नौजवान खिलाड़ियों को हॉकी सिखाने में बिताते हैं। उन्हें 1000 रुपए पेंशन के रूप में मिलते हैं। मगर बेटी की शादी का खर्च उठाने के लिए उन्हें साइकिल पर कपड़े बेचने पड़ रहे हैं।
यदि आपको लगता है कि देश में खेलों की बदहाली के लिए नेता जिम्मेदार हैं तो अमर उजाला की मुहिम ' नो पॉलिटिक्स इन ओलंपिक्स' का समर्थन करें।
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मोहम्मद इमरान ने रीता पांडे, रजनी चौधरी, संजीव ओझा, प्रतिमा चौधरी, जनार्दन गुप्ता और संवर अली समेत कई अतंरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को हॉकी स्टिक से कमाल करने का हुनर सिखाया है।
अपने गुजर-बसर के लिए कमाई करने के बाद उनके पास जो भी समय बचता है, वो उसमें नौजवान खिलाड़ियों को हॉकी सिखाने में बिताते हैं। उन्हें 1000 रुपए पेंशन के रूप में मिलते हैं। मगर बेटी की शादी का खर्च उठाने के लिए उन्हें साइकिल पर कपड़े बेचने पड़ रहे हैं।
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