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Sign Petition for no Politics in Olympics

नो पॉलिटिक्स इन ओलंपिक्स
नो पॉलिटिक्स इन ओलंपिक्स
भारत के लिए रियो ओलंपिक 2016 बेहद निराशाजनक रहा। रियो में भारत को केवल दो पदक हासिल हुए। ऐसे में सवाल पूछे जा रहे हैं कि देश में खेलों की बुरी हालत के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? पीवी सिंधू और साक्षी मलिक ने पदक जीतकर देश की लाज रख ली, नहीं तो भारत की झोली इस बार खाली रह जाती। जिन स्पर्धाओं में भारत को पदक हासिल हुए उन खेलों की कमान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर पूर्व खिलाड़ियों के हाथों में थी। यदि इन खेलों की कमान भी राजनेताओं के हाथों में होती तो शायद हमें रियो से खाली हाथ लौटना पड़ता।

खेलों के साथ हो रहे खिलवाड़ के खिलाफ से देश के लोगों में आक्रोश है। जिस तरह लोढ़ा कमेटी ने बीसीसीआई के ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन करने की सिफारिश की है, उसी तरह अन्य खेल संघों को भी नेताओं के चंगुल से मुक्त कराने का वक्त आ गया है। सालों से खेल संघों की कमान संभाल रहे नेताओं को न तो खिलाड़ियों की जरूरतों की समझ है और न ही उनके पास खेलों के विकास की कोई दूरदर्शी सोच।

अमर उजाला ने इस बार भारत में खेल संघों में बदलाव का बीड़ा उठाया है। अमर उजाला हमेशा से सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों को उठाता रहा है। हम आपके समर्थन से इस मुहिम को आगे बढ़ाएंगे। आइए बदलाव की इस मुहिम का हिस्सा बनें और "नो पॉलिटिक्स इन ओलंपिक्स" मुहिम का समर्थन करने के लिए ऑनलाइन पिटीशन साइन करें।
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