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बर्थडे स्पेशलः '...जिस दिन ध्यानचंद को 'भारत रत्न' से नवाजा जाएगा, उस दिन पूरा देश झूम उठेगा'
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 29 Aug 2018 01:06 AM IST
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मेजर ध्यानचंद
- फोटो : Sportskeeda.com
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दद्दा ध्यानचंद के मंझले बेटे पूर्व ओलंपियन अशोक कुमार सिंह खुद अपने जमाने में भारतीय टीम 'हॉकी कलाकार' के रूप में ख्यात रहे। सही मायनों में दद्दा की हॉकी विरासत के सही वारिस अशोक कुमार ही हैं। दद्दा को भारत रत्न दिलाने के लिए परिवार में हर मंच पर सबसे ज्यादा जोरशोर से अशोक कुमार ने ही आवाज बुलंद की।
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इस मुहिम में पूर्व हॉकी ओलंपियनों और अन्य खेलों के खिलाडियों को अशोक कुमार ने ही जोड़ा। दद्दा का जन्मदिन 29 अगस्त खेल दिवस भी अशोक कुमार के प्रयासों से बन पाया। दद्दा का जन्म 29 अगस्त, 1905 को इलाहाबाद की पावन धरती पर हुआ। दद्दा आज जिंदा होते तो 113 बरस के होते। दद्दा ध्यानचंद की हॉकी की कलाकारी पर भारत ही ही दुनिया नाज करती है।
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ध्यानचंद के मंझले बेटे अशोक कुमार ने मंगलवार को 'अमर उजाला' से कहा, 'हमें इस बात की खुशी है कि दद्दा ध्यानचंद के जन्मदिन को देश खेल दिवस के रूप मनाता है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू और नरसिम्हा राव से लेकर मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक ध्यानचंद की हॉकी की जादूगरी के मुरीद रहे हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू ने जब ध्यानचंद से मिले और उनके सीने पर ओलंपिक हॉकी के सुनहरे तमगे देखे तो उन्होंने उनसे हल्के फुल्के अंदाज में कहा था कि वे कुछ तमगे मुझे दे दें। 1995 में दद्दा की ध्यानचंद स्टेडियम में मूर्ति लगाने के मौके पर नरसिम्हा केवल और केवल उनकी हॉकी के किस्से कहते रहे थे। इससे भी खुशी की बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले तीन बरस से 'मन की बात कार्यक्रम' में ध्यानचंद के जन्मदिन 29 अगस्त का जिक्र खेल दिवस के रूप में करने के साथ उनके हॉकी के कारनामों का जिक्र कर बराबर कर रहे हैं। इससे देश में हर हॉकी प्रेमी को खेल दिवस की परिभाषा और महत्व का पता चल चुका है। बस देश को मलाल यही है कि देश के महान सपूत हॉकी के जादूगर ध्यानचंद को अब तक सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न’ से नहीं नवाजा गया है। जिस दिन ध्यानचंद को 'भारत रत्न' से नवाजा जाएगा, उस दिन पूरा देश झूम उठेगा।'
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1975 में भारत की क्वालालंपुर में हॉकी विश्व कप की खिताबी जीत के हीरो रहे अशोक कुमार कहते हैं, 'भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीम जकार्ता में एशियाई खेलों में बेहतरीन लय और ताल से खेल रही हैं। खासतौर पर हरेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में भारतीय पुरुष हॉकी टीम जैसी कलात्मक अैर आक्रामक हॉकी खेल रही है उससे मुझे उसके एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक बरकरार रखने का पूरा यकीन है। एशियाई खेलों का यही स्वर्ण पदक दद्दा ध्यानचंद की जयंती पर उनको भारतीय टीम का सबसे बड़ा तोहफा होगा। मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि भारतीय पुरुष हॉकी टीम निरंतर बड़े अंतर्राष्ट्रीय हॉकी टूर्नामेंट में इसी लय और ताल के साथ खेलना जारी रख ध्यानचंद की देश को हॉकी में गौरव दिलाने की परंपरा को जारी रखेगी। रानी रामपाल की अगुवाई भारतीय महिला हॉकी टीम ने भी मौजूदा एशियाई खेलों में जिस शान से सेमीफाइनल में जगह बनाई है उससे साफ है कि वे भी भी इस बार पिछली बार के कांसे के रंग को सुनहरे तमगे में तब्दील करने का दम रखती है।'